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दुखभरी है वृद्धाश्रम के बुजुर्गों की कहानी, बेटों ने निकाला घर से, फिर भी दिल में है यह आस
Mon, 07 Sep 2020 12:12 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 07 Sep 2020 12:12 AM IST
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रामलाल आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग
- फोटो : अमर उजाला
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बेटों ने घर से निकाल दिया। वृद्धाश्रम में रह रहे हैं...बच्चों की याद सताती है। बेटे के बारे में बात करो तो यह कहते हुए रोक देते हैं कि दिल दुखता है, उसका जिक्र मत छेड़ो। पितृ अमावस्या पर सभी को परिवार की याद बहुत सता रही है। पितृों को तर्पण देने के समय आगरा के रामलाल वृद्ध आश्रम में रह रहे अधिकांश बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि आशा है कि चाहे जैसा हो लेकिन हमारे मरने के बाद बेटा भी श्राद्ध जरूर करेगा। कुछ इतने दुखी हैं कि उन्होंने बेटे के लिए यह जिम्मेदारी निभाने से भी मना कर दिया।
महेश अग्रवाल
- फोटो : अमर उजाला
जन्मदिन पर आती है बहुत याद : महेश अग्रवाल
सात साल से आश्रम में रह रहे बेलनगंज के रहने वाले 70 साल के महेश अग्रवाल का कहना है कि बेटा तो आखिर बेटा ही होता है। हम तो अपने बेटे के लिए उसी दिन मर चुके, जिस दिन आश्रम आना पड़ा। लेकिन आज भी अपने बेटे के जन्मदिन पर उसे बहुत याद करता हूं। मेरे मरने के बाद बेटा अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।
सात साल से आश्रम में रह रहे बेलनगंज के रहने वाले 70 साल के महेश अग्रवाल का कहना है कि बेटा तो आखिर बेटा ही होता है। हम तो अपने बेटे के लिए उसी दिन मर चुके, जिस दिन आश्रम आना पड़ा। लेकिन आज भी अपने बेटे के जन्मदिन पर उसे बहुत याद करता हूं। मेरे मरने के बाद बेटा अपनी जिम्मेदारी निभाएगा।
राजेंद्र प्रसाद शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
बचपन की यादों में ले जाता है बेटा : राजेंद्र प्रसाद शर्मा
हाथरस के नौपुरा के रहने 80 साल के राजेंद्र प्रसाद शर्मा चार साल से वृद्ध आश्रम में हैं। बेटे के बारे में पूछने पर उनकी आंखें नम हो गईं। बोले कि बेटे के बारे में बातचीत मुझे उसके बचपन की यादों में ले जाती है। इसलिए उसकी याद नहीं दिलाओ। मेरे मरने के बाद वह जरूर समझेगा। श्राद्ध की जिम्मेदारी निभाएगा।
हाथरस के नौपुरा के रहने 80 साल के राजेंद्र प्रसाद शर्मा चार साल से वृद्ध आश्रम में हैं। बेटे के बारे में पूछने पर उनकी आंखें नम हो गईं। बोले कि बेटे के बारे में बातचीत मुझे उसके बचपन की यादों में ले जाती है। इसलिए उसकी याद नहीं दिलाओ। मेरे मरने के बाद वह जरूर समझेगा। श्राद्ध की जिम्मेदारी निभाएगा।
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केलाराम
- फोटो : अमर उजाला
मेरी हड्डी क्या टूटी, बेटा छूट गया : केलाराम
यमुना विहार निवासी 66 साल के केला राम 14 महीने से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। बोले कि मेरी हड्डी क्या टूटी, बेटा छूट गया। उन्हें बेघर कर दिया। रोते हुए कहा कि दिल टूट गया है। मरने के बाद मेरा बेटा श्राद्ध नहीं करे, अगर वो ऐसा करेगा, तो मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।
यमुना विहार निवासी 66 साल के केला राम 14 महीने से वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। बोले कि मेरी हड्डी क्या टूटी, बेटा छूट गया। उन्हें बेघर कर दिया। रोते हुए कहा कि दिल टूट गया है। मरने के बाद मेरा बेटा श्राद्ध नहीं करे, अगर वो ऐसा करेगा, तो मेरी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।
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परशुराम
- फोटो : अमर उजाला
हमेशा सलामत रहे बेटा: परशुराम
झांसी के रहने वाले परशुराम को उनके बेटे ने दो साल पहले घर से निकाला। उन्होंने बताया कि तब से आज का दिन है वह उनको एक भी दिन देखने नहीं आया। लेकिन मैं हमेशा यह सोचता हूं कि मेरा बेटा जहां कहीं भी रहे सलामत रहे। हां, भगवान से एक प्रार्थना है कि मेरे मरने के बाद वो मुझे हाथ भी नहीं लगाए।
झांसी के रहने वाले परशुराम को उनके बेटे ने दो साल पहले घर से निकाला। उन्होंने बताया कि तब से आज का दिन है वह उनको एक भी दिन देखने नहीं आया। लेकिन मैं हमेशा यह सोचता हूं कि मेरा बेटा जहां कहीं भी रहे सलामत रहे। हां, भगवान से एक प्रार्थना है कि मेरे मरने के बाद वो मुझे हाथ भी नहीं लगाए।