फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Phool Bangla In Braj Mandir For Save God In Summer Season

Mathura: ताकि ठाकुरजी को नहीं लगे गर्मी, जानें किस तरह के किए जा रहे जतन 

Sat, 04 Jun 2022 02:12 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 04 Jun 2022 02:12 PM IST
सार

जून के महीने में तापमान चढ़ रहा है, जिसके चलते गर्मी से भगवान को बचाने के लिए जतन हो रहे हैं। मंदिरों में ठंडे पदार्थों का  भोग लगाया जा रहा है। तो वहीं ठाकुर बांके बिहारी को गर्मी से निजात दिलाने के लिए फूल बंगला में विराजमान कराया जा रहा है।
 

विज्ञापन
Phool Bangla In Braj Mandir For Save God In Summer Season
ठा. बांकेबिहारी मंदिर में देशी-विदेशी पुष्पों से सजा फूलबंगला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा वृंदावन में आराध्य को ग्रीष्म ताप से शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से फूल बंगला का निर्माण प्रारंभ हो गया है। 16वीं शताब्दी में रचित वाणी साहित्य में फूलबंगले में ठाकुरजी के विराजने का वर्णन प्राप्त होता है। फूलबंगले में उपयोग में लाए जाने वाले फूलों एवं बंगला निर्माण के विविध पक्षों से संबंधित जानकारी पदावलियों में प्राप्त होती हैं। ठाकुरजी को शीतलता प्रदान करने के लिए फूलबंगला, गले में वैजयंती माला व कानों में कनेर पुष्प के कुंडल सजेंगे। यह जतन सावन माह के कृष्णपक्ष की हरियाली अमावस्या तक (चार माह) वृंदावन के मंदिरों में होने वाले विशेष आयोजन में किए जाएंगे।

विज्ञापन


श्रीबांकेबिहारी मंदिर के सेवायत प्रह्लाद गोस्वामी ने बताया कि फूलबंगले को सजाने का कार्य परस्पर सामंजस्य से अलग-अलग होता है। कारीगर ठाकुरजी के विराजने वाले स्थल फ्रेम ठाट को सजाते हैं तो कुछ लोग सिंहासन से नीचे लगने वाले बिछैया को बनाते हैं। इस प्रकार फूलबंगला में प्रयुक्त होने वाले अन्य फ्रेम जिन्हें बगली, पिछवाई, छप्पर, शिखर दरवाजा, तिदरी, झाड़ आदि कहा जाता है। 
विज्ञापन


फूलबंगले के निर्माण में रायबेल की कलियों का ही प्रयोग किया जाता है। इसके बाद जाल की डिजाइन छठमासा, अठमासा, वृंदावनी आदि होती है। ठाकुरजी के पीछे लगने वाले ठाठ जिसको पिछवाई कहा जाता है, इसको फूलबंगले के उस्ताद स्वयं तैयार करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के प्रकाशन अधिकारी गोपाल शरण शर्मा बताते हैं कि फूलबंगला का निर्माण जहां पहले साधकों की भाव साधना पर आधारित था, वहीं आज यह कला रोजगारोन्मुखी हो गई है, स्थानीय कलाकारों के साथ बाहर के अन्य कारीगर भी वृंदावन आकर फूल बंगले के निर्माण का कार्य करते हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed