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एटा हादसाः बरात के सपने सजाए बैठा था गांव, शव आए तो मचा कोहराम

Fri, 05 May 2017 09:21 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला डौकी ( आगरा )
ब्यूरो/ अमर उजाला डौकी ( आगरा ) Updated Fri, 05 May 2017 09:21 PM IST
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people mourning in the village of agra after death of 14 men
विलाप करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
आगरा के पावसर नगला में कल तक बेटी की बरात आने के सपने सजाए जा थे। आज उस गांव में कोहराम मचा है।  जिस घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, खुशी के गीत गाए जा रहे थे, वहां मातम ही मातम पसरा है। महिलाएं बिलख रही हैं। पुरुषों की आंखों से भी आंसू थम नहीं रहे। 
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गांव के प्रेम सिंह के परिवार पर हादसे का कहर बरपा है। उनकी बेटी कल्पना की लग्न चढ़ाने के लिए परिवार और गांव के लोग गए थे। हादसे में कल्पना के भाई विजय ( 22) की जान चली गई। उसका दादा ( पिता के ताऊ ) गिरंद सिंह ( 70) की भी मौत हो गई। मौत एक साथ दो पीढ़ियों को ले गई। हादसे में दादा और पौते की एक साथ मौत हो गई। कल्पना रो रोकर बेहोश हो गई है। पड़ोस की महिलाएं पानी के छींटे देकर उसे होश में लाती हैं, मगर थोड़ी देर में वह फिर बेहोश हो जाती है। विजय के शव को दफनाया गया जबकि गिरंद सिंह के शव का दाह संस्कार किया गया।
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हादसे में किसान बच्चू सिंह का बेटा ओमवीर भी दुनिया छोड़ गया। उसकी 18 फरवरी को ही शिकोहाबाद के गोविंदपुर की भूरी देवी से शादी हुई थी। 29 अप्रैल को गौना हुआ। भूरी के हाथों से सुहाग की मेहंदी भी अभी छूटी नहीं है। उसे जैसे ही पता चला कि उसका सुहाग उजड़ गया है, वैसे ही उसे तेज चक्कर आया और वह बेहोश हो गई। होश आते ही बोली, वह ( पति ) कहां हैं। अभी तक नहीं आए। ओमवीर ने पिछले साल 12 वीं की थी। इसके बाद खेती कर रहे थे। उसकी दो बहन और एक भाई हैं। सभी का रो रोकर बुरा हाल है।
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ग्राम नगरिया का एक व्यक्ति ऐसा भी था जिसके यहां अभी 15 दिन पहले ही पुत्र का जन्म हुआ था। नेत्रपाल पुत्र सुल्तान सिंह की पत्नी को दो पुत्रियों के बाद अभी 15 दिन पहले ही एक लड़का हुआ था। बच्चे का नाम रखा गया योगेश। उसने अभी तक ठीक से आंख भी नहीं खोली हैं।  उसके सिर से पिता का साया उठ गया। 3 बच्चों में तीन साल की आस्था, 18 महीने की पल्लवी तथा 15 दिन का योगेश है। इस घर में हर आने जाने वाले की आंखें नम थीं तथा एक ही सवाल था कि अब इन तीन बच्चों का पालन पोषण कैसे होगा। परिवारीजनों का रो रो कर बुरा हाल था।

हादसे ने बुझा दिया महेंद्र के घर का आखिरी चिराग

people mourning in the village of agra after death of 14 men
विलाप करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
डौकी की 2500 आबादी वाली यादव बहुल ग्राम पंचायत कोलारा कलां के दो मजरों पोखरा नगरिया और पावसर नगरिया में मातम पसरा है। पोखरा के दो और पावसर के 11 लोगों की जान गई है। पूरा गांव बिलख रहा है। महेंद्र का गम पहाड़ जैसा है। उसके चार बेटे थे। चारों की अकाल मौत हुई। तीन पहले चल बसे थे।

तीन साल पहले सड़क हादसे में बरौली के पास रामबृज की जान गई थी। वह बाइक से जा रहा था। एक साल पहले मदन की बीमारी से मौत हुई थी। वह एकसाल का था। इससे पहले दस साल का एक बेटा घर में लगी आग में झुलस गया था। बाद में उसकी मौत हो गई। अब महेंद्र की सिर्फ एक बेटी बची है मलूकी देवी। वह 18 साल की है। उसका रो रोकर बुरा हाल है। पूरा गांव कह रहा कि महेंद्र के परिवार को न जाने कैसी नजर लगी है। एक एक कर चार बेटों की अकाल मौत हो गई।
 

हवा में उछला डीसीएम और पलटकर नाले में जा गिरा

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विलाप करता युवक - फोटो : अमर उजाला
हम सब डीसीएम में पीछे खड़े थे। सबको नींद की झपकी आ रही थी। रात के तीन जो बच चुके थे लेकिन कोई सोता कैसे,   बार-बार झटके जो लग रहे थे, क्योंकि सड़क खराब थी। ड्राइवर ने गाड़ी को तूफान बना रखा था। बहुत तेज रफ्तार थी। तभी और खराब सड़क आ गई। पूरा डीसीएम जोर से हिलने लगा। डर के मारे सबने एक दूसरे को पकड़ लिया। तभी अचानक जोर से टक्कर सी लगी।

डीसीएम हवा में उछला और नाले में जा गिरा। उसके पहिये आसमान की ओर हो गए। एक पल में कयामत आ गई।  दो लोग बाहर जाकर गिरे, कुछ नाले में दूर जाकर पड़े, ज्यादातर डीसीएम के नीचे दब गए। यह बताते बताते सुरेंद्र की आंखों में आंसू आ जाते हैं, जुबां लड़खड़ाने लगती हैं। वह भी दर्दनाक हादसे में घायल हुए हैं। कहते हैं, बहुत बुरा हुआ, इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। सुरेंद्र पावसर नगरिया के हैं। इसी गांव के 13 लोग मारे गए हैं।

सुरेंद्र ने बताया, ड्राइवर ने बड़ी गलती की। वह गुस्से में था। शराब पी रखी थी। पहले तो रात में जाने के लिए मना कर रहा था। बाद में चल दिया। सौ से ऊपर की स्पीड पर डीसीएम चला रहा था । सराय नीम की जिस पुलिया पर हादसा हुआ, वह खूनी पुलिया बन चुकी है। वहां मोड़ है, बहुत ही खतरनाक। रेलिंग बहुत कमजोर लगी थी साइड    में ।

एक फोन कॉल! डीसीएम पलट गई, सब कुछ खत्म

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‌‌विलाप करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार सुबह 4:00 बजे मोबाइल की घंटी बजी और दूसरी ओर से आवाज आई कि डीसीएम पलट गई और सब खत्म। बस हंसी, ठिठोली और मंगल गीत एक पल में मातमी शोर में बदल गए। दो सेकेंड पहले तक जिस घर में शहनाई की धुन गूंज रही थी, वहां सब मातम में बदल गया। पूरा माहौल चीत्कार, करुण क्रंदन से भर गया। हर आंख नम नजर आई। 

आगरा थाना डौकी के गांव नगरिया अहीर निवासी प्रेम सिंह के दो बेटे और एक बेटी कल्पना है। जिला अस्पताल पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि प्रेम सिंह के घर में पहली शादी लड़की की थी और आठ मई को बरात आनी थी। घर में पहली शादी होने के कारण हर कोई खुश था तो वही नाते-रिश्तेदार आए हुए थे।

घर में मंगल-गीत गाए जा रहे थे मगर हादसे में 14 लोगों की मौत से गांव नगरिया के लोगों को लगी तो पूरा गांव गमगीन हो गया। बताते हैं कि कल्पना का बड़ा भाई जितेंद्र उर्फ जीतू है मगर पिता पहले बेटी की शादी करना चाहते थे। मगर अचानक मौत के झपट्टे ने सारी खुशियां मातम में बदल दीं। रोती-बिलखती महिलाएं भी बार-बार अपनों से एटा ले जाने की गुहार लगाती रही।
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