जन आंदोलनों के बाद भी नहीं जागी सरकार, अटल के पैतृक क्षेत्र को नहीं मिला जिले का दर्जा
- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती इस बार भी गुजर गई। बाह-बटेश्वर को जिला बनाए जाने की उम्मीद लगाए लोगों के हाथ खाली रहे। चार दशक से लोग यह मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जिला बनने के बाद ही बाह-बटेश्वर का विकास संभव होगा। जन आंदोलन के बाद भी सरकार नहीं जागी है।
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यमुना, चंबल, उटंगन के बीहड़ के बीच ऊंट की शक्ल में बसी बाह तहसील को जिला बनाने की मांग 40 साल पुरानी है। तीन साल पहले दहेज निवारण एवं समाज कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष हर नारायण यादव के नेतृत्व में 100 दिन चले धरना प्रदर्शन के बाद जिले की उम्मीद तब जगी थी, जब पिछले साल जनवरी में राजस्व परिषद द्वारा मांगे जाने पर प्रशासन ने अटल नगर जिले का प्रस्ताव तैयार किया था। यहां के हर आदमी की सोच है कि जिला बनने से ही बाह के पिछडे़पन को दूर किया जा सकता है।
प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत और 1957 के तत्कालीन राज्यपाल ने बाह की भौगोलिक स्थिति को देखकर जिले का दर्जा मिलने की बात कही थी। 1976 में नारायण दत्त तिवारी द्वारा गठित आर्यन आयोग ने बाह, गाजियाबाद, ललितपुर, भदोही को जिला बनाने की संस्तुति की थी। अफसोस बाह को अब तक जिले का दर्जा नहीं मिल सका है।
अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद राजस्व परिषद के मांगे जाने पर प्रशासन ने अटल नगर जिले का प्रस्ताव तैयार किया। पिछले साल अगस्त में बाबा हर नारायण यादव के नेतृत्व में बटेश्वर से लखनऊ तक साइकिल रैली निकाली गयी। एनजीओ एंग्री यूथ और टीम भारतीय ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। अटल जी जयंती पर भी विभिन्न संगठनों ने जिले की मांग को लेकर बाह बंद का आयोजन किया। आम आदमी पार्टी ने भी धरना प्रदर्शन किया।
बाह-बटेश्वर में क्या है खास
- आगरा और इटावा जिला मुख्यालय से 75 और 60 किमी दूर मध्य प्रदेश, राजस्थान, फिरोजाबाद, इटावा के मध्य बसा बाह अब तक पिछड़ेपन का दंश झेल रहा है।
- बटेश्वर तीर्थ स्थल, जैन तीर्थ स्थल , चंबल सेंचुरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
- बाह के जरार स्थित गल्ला मंडी में राजस्थान मध्यप्रदेश तक के कारोबारी पहुंचते थे, जो अब उजड़ी पड़ी है।
- अटल जी की पैतृक भूमि बटेश्वर वीरान पड़ी है।
- बटेश्वर का उत्तर भारत का प्रमुख मेला क्षेत्रीय दायरे में सिमटता जा रहा है।
- यहां की आबादी को न्याय पाने के लिए 75-100 किमी तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
- औद्योगिक विकास से बाह क्षेत्र अछूता है।
- कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए संसाधन और तकनीक नहीं मिल पा रही।
- इलाज के लिए अच्छे अस्पताल का अभाव है।
- पौराणिक स्थल, किले और हवेलियां पर्यटन विकास से अछूती हैं।
बाबा हर नारायण यादव ने कहा कि बाह के पिछड़ेपन के कलंक को मिटाने और जनता तक मूलभूत सुविधा पहुंचने के लिए जिले की मांग जायज है। मनोज दीक्षित ने कहा कि बाह को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए इसे जिला बनाया जाना चाहिए। उपेक्षा सहन नहीं होगी।
बाह निवासी राजेश यादव ने कहा कि जन आंदोलन की अनदेखी सरकार को भारी पडे़गी। जिला बनने पर लोगों को न्याय के लिए नहीं भटकना पडे़गा। रामसिंह आजाद ने कहा कि बटेश्वर की विरासत के विकास और मेले के अस्तित्व के लिए जिला बनाया जाना जरूरी है।
राकेश वाजपेयी ने कहा कि अटल जी ने दुनिया में देश का मान बढ़ाया है। उनकी पहचान से जिला बनने से बटेश्वर का विकास होगा। स्थानीय निवासी अमित ओझा ने कहा कि अटल की स्मृति में जिला बनने से बाह का चहुमुखी विकास होगा। क्षेत्र में संसाधन बढेंगे।
इस बार भी अधूरी रह गई बटेश्वर के जिला बनने की ख्वाहिश
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर हर कोई बाह-बटेश्वर को जिला बनाए जाने की उम्मीद लगाए बैठा था। देश के लिए लंबी कूद के 40 अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके ओलंपियन अंकित शर्मा ने अपनी बटेश्वर के घाट की तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि इस बार भी बटेश्वर के जिला बनने की ख्वाहिश अधूरी रह गई।