कासगंज। हरिद्वार और बिजनौर बैराज से छोड़े जा रहे पानी के प्रवाह के दबाव के बाद नरौरा बैराज से भी शुक्रवार को प्रवाह बढ़ा दिया गया है। यह प्रवाह दो लाख क्यूसेक को पार कर गया है। इससे उफनती गंगा की धारा प्रभावित इलाकों में कहर बरपा रही है। ग्रामीण समझ नहीं पा रहे कि प्रत्येक नए दिन के साथ बढ़ती मुश्किलों से कैसे निपटें। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बाढ़ की विभीषिका एक माह से अधिक समय से लोगों को डरा और परेशान कर रही है। अब उनके उन्हें खाने-पीने के सामान की किल्लत सता रही है। इसके अलावा पशुओं के लिए भी चारे की व्यवस्था करना दुरूह साबित हो रहा है। गंगा के प्रवाह में वृद्धि के कारण लहरा वार्ड की सड़क तक पानी की दस्तक है। वहीं आसपास के गांव डिंगलेशन नगर, खड़ेरी, दतलाना, उढ़ेर व आस पास के ग्रामीण इलाकों की खादर और खेतों में पानी भरा हुआ है। सुन्नगढ़ी मार्ग के अजीतनगर, उलाई, नगला ढाव सहित अन्य इलाकों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। वहीं पटियाली इलाके के 26 गांव बाढ़ की विभीषिका की चपेट में हैं। कई गांव की आबादी के बीच कहीं घुटना तक पानी है तो कहीं उससे अधिक। पटियाली इलाके के मूंजखेड़ा, नगला हंसी, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला तरसी, नगला खंदारी, नेथरा, इंद्राजसनपुर, मेहोला, नवाबगंज नगरिया, टिकुरी गठौरा, कुसौल, जिझोल, पनसोती, अलीपुर भकुरी, रिकहरा, गठैरा, निरदौली पुख्ता सहित आस पास के ग्रामीण इलाकों में पानी भरा है। वहीं सहावर के अजीतनगर, उलाई, रफातपुर, शहवाजपुर, बमनपुरा, चकरा, नगला ढाव, नगला चोखे सहित आस पास के ग्रामीण इलाके बाढ़ के पानी से प्रभावित हैं। लोग इतने लंबे से बाढ़ की आपदा का सामना कर रहे हैं। अब ग्रामीणाें का धैर्य जवाब देने लगा है। खान-पान की सामग्री और दैनिक दिनचर्या को लेकर भी किसान परेशान हैं। नगला जयकिशन के प्रधान जगवीर सिंह का कहना है कि ग्रामीणों के सामने काफी दिक्कतें हैं। गांव की सड़क की ओर घुटनों से ऊपर पानी बह रहा है। जैसे-तैसे ग्रामीण जीवनयापन कर रहे हैं। खानपान की वस्तुओं का संकट है वहीं पशुओं को पालना भी दूभर हो गया है। लगातार पानी बढ़ने से ग्रामीण बेहद चिंतित हो रहे हैं और जैसे तैसे वक्त काटने को मजबूर हैं। खेतों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई हैं।