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आगराः एसएन इमरजेंसी से भगाया मरीज, दो दिन बाद तोड़ा दम, परिवार ने लगाए लापरवाही के आरोप

Sat, 16 May 2020 12:06 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Sat, 16 May 2020 12:06 AM IST
सार

लिवर में संक्रमण से ग्रस्त था मरीज

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Patient Died Due To Treatment On Time Family Charges Of Negligence
एसएन मेडिकल कालेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की एक और लापरवाही सामने आई है। इमरजेंसी से भर्ती मरीज को भगा दिया। घर पहुंचने के दो दिन बाद मरीज की मौत हो गई। परिजन पुलिस और कंट्रोल रूम में नंबर फोन लगाते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
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इंद्रापुरम दयालबाग निवासी भरत सिंह 45 को लिवर में संक्रमण था। यह जूता की फैक्ट्री में काम करते थे। इनके बेटे बबलू ने बताया कि पांच मार्च के एसएन में दिखाया था, जहां इनको जयपुर में इलाज कराने के लिए कहा था। जयपुर में इलाज से पिता की हालत में सुधार हो रहा था। लॉकडाउन के चलते वह पिता को जयपुर दिखाने नहीं जा पाए। यहीं के निजी अस्पताल में जैसे-तैसे इलाज करा रहे थे।
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बीते चार-पांच दिन में हालत खराब हुई, निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने कोरोना वायरस की जांच कराके रिपोर्ट मांगी। इस पर एसएन में ही इलाज कराने के लिए 11 मई को इमरजेंसी में भर्ती करा दिए। यहां नमूने लेने की बात कहते हुए चिकित्सकों ने कहा कि तीन दिन क्वारंटीन वार्ड में भर्ती रहेंगे। पूरा इलाज मिलेगा, तुम घर चले जाओ। कोई बात होगी तो फोन पर बताते रहेंगे। विगत 12 मई की शाम को छह बजे के करीब पिताजी बदहाल घर पहुंचे। पूछने पर बताया कि डॉक्टरों ने तीन बजे इमरजेंसी से निकाल दिया है।

बेटे का आरोप है कि पिता के पास सिर्फ एक सादा कागज में दवा लिखी थी, डॉक्टरों ने मुझे फोन भी नहीं किया। पिताजी अर्द्धमूर्छित हालत में थे। प्राइवेट अस्पताल में दिखाने गए तो एक बार फिर कोरोना वायरस की रिपोर्ट मांगी। इस पर एसएन इमरजेंसी के डॉक्टरों को फोन किया तो पांच मिनट में रिपोर्ट देने की बात कही। फिर फोन किया तो डॉक्टर अभद्रता करते हुए गाली देने लगे।

शुक्रवार की सुबह साढ़े चार बजे उनकी मौत हो गई। कंट्रोल रूम में फोन किया तो कहा कि डिस्चार्ज कर दिए होंगे। 112 नंबर पर पुलिस बुलाई तो वह भी देखकर लौट गई।

दोषी डॉक्टरों पर हो कार्रवाई, जिससे किसी और की न जाए जान: बबलू
मृतक का बेटा बबलू का कहना है कि बिना सूचना दिए गंभीर हाल में पिता को निकाल दिया, ऐसे चिकित्सकों पर कार्रवाई हो, जिससे किसी और मरीज के साथ ऐसा न हो और किसी की लापरवाही से  जान न जाए। 

लगातार लापरवाही, फिर भी नही हो रही कार्रवाई
एसएन मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में इलाज में देरी, लापरवाही से लगातार मौत हो रही हैं। इसके बाद भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लापरवाह स्टाफ पर कार्रवाई से बच रहा है।

परिजनों का आरोप इलाज मिल जाता तो बच जाती जान 
एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में इलाज न मिलने से गर्भवती की मौत हो गई। यहां इलाज कराने के लिए पहुंची गर्भवती महिला को भर्ती नहीं किया। पति डॉक्टरों से इलाज करने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

मंटोला के टीला नंदराम निवासी मनोज कुमार जूते की फैक्ट्री में काम करता है। इसकी 24 साल की पत्नी ममता नौ महीने की गर्भवती है। पति ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर सुबह करीब पांच बजे एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी लेकर गए, लेकिन यहां भर्ती नहीं किया। स्टाफ ने महिला जिला अस्पताल लेकर जाने के लिए कहा। सांस लेने में परेशानी होते देख भर्ती करने को कहा, लेकिन किसी ने इलाज नहीं किया। ऐसे में पत्नी को ले जाते वक्त इमरजेंसी के बाहर उनकी मौत हो गई। पति मनोज कुमार का आरोप है कि पत्नी को समय पर भर्ती कर इलाज शुरू हो जाता तो उसकी जान बच जाती।
 
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