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देश पर कुर्बान हो गया मथुरा का एक और लाल, 24 दिन पहले ही पंकज छुट्टी काटकर गए थे ड्यूटी पर

Wed, 27 Feb 2019 08:24 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 27 Feb 2019 08:24 PM IST
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Pankaj nauhwar of Mathura martyr in a plane crash in Badgaon
शहीद पंकज नौहवार - फोटो : अमर उजाला

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी का एक और लाल देश पर कुर्बान हो गया। श्रीनगर में एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात एयरमैन टेक्निकल (नायक) पंकज ने चॉपर से एक स्पेशल ऑपरेशन के लिए उड़ान भरी थी। अचानक चॉपर गिर गया है। कैसे गिरा यह साफ नहीं हो सका है। पंकज 24 दिन पहले ही छुट्टी काटकर ड्यूटी पर गए थे। जब सूचना परिवार में पहुंची तो कोहराम मच गया। परिवार वालों का कहना है कि 28 फरवरी को उनका पार्थिव शरीर पहुंचेगा।

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महानगर के बालाजीपुरम में रहने वाले रिटायर सूबेदार मेजर नौबत सिंह के पुत्र थे पंकज। पंकज 2012 में वायु सेना में एयरमैन तकनीकी के पद पर भर्ती हुए थे। मौजूदा समय में पंकज की तैनाती एयरफोर्स स्टेशन श्रीनगर में थी। पंकज की 26 फरवरी को रात करीब नौ बजे अपनी मां रेखा नौहवार और भाई अजय से बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि 27 फरवरी को स्पेशल ऑपरेशन के लिए रिहर्सल होना है। सुबह को उसमें व्यस्त रहेंगे। घर वालों ने बताया कि जब आज सुबह फोन किया तो बात नहीं हो पाई थी। फोन स्विच ऑफ जा रहा था। बुधवार की दोपहर को करीब ढाई बजे श्रीनगर यूनिट से फोन आया कि पंकज नहीं रहे। इतना सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया। हर किसी का रो-रोकर बुरा हाल था। घर वालों ने बताया कि 11 जनवरी को पंकज छुट्टी पर घर आए थे। 17 जनवरी को उन्होंने परिवार वालों के साथ अपना जन्मदिवस मनाया। तीन फरवरी को पंकज अपनी छुट्टी खत्म करके वापस गए थे। कहा था कि अप्रैल में दो साल पूरे हो जाएंगे तो वह घर आएंगे। लेकिन कौन जानता था कि पंकज कभी वापस नहीं लौटेंगे। पंकज के भाई अजय ने बताया कि स्पेशल ऑपरेशन के लिए वायुसेना की यूनिट का मूवमेंट होना था। उसी के लिए रिहर्सल किया जा रहा था। अब वहां क्या हुआ यह अभी जानकारी नहीं है।

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पंकज कहते थे कि देश से बड़ा कुछ नहीं

Pankaj nauhwar of Mathura martyr in a plane crash in Badgaon
शहीद पंकज नौहवार - फोटो : अमर उजाला
पंकज कहा करते थे कि देश से बड़ा कोई नहीं। जब भी वह उड़ान भरते हैं तब लगता है कि वह देश के लिए कुछ बड़ा करेंगे। जब भी घर आते तो उनके दोस्त और परिवार वाले अक्सर वायुसेना को लेकर चर्चा किया करते थे। पंकज दूसरे नौजवानों को भी आर्मी या वायुसेना के लिए प्रेरित किया करते थे। आज हर कोई उनकी बातों को याद करते रो रहा था।

बाजना के गांव जरेलिया के मूलत: निवासी थे पंकज। पंकज के पिता ने बालाजीपुरम में अपना मकान बना लिया था लिहाजा अब परिवार के लोग यहां रहने लगे हैं। आज जब पता चला कि उनके गांव का लाल देश पर कुर्बान हो गया तो गांव में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे। हर कोई उनके व्यवहार को लेकर चर्चा कर रहा था। घर वालों ने बताया कि वह हमेशा कहा करते थे कि देश से बड़ा कुछ नहीं होता। 

पति को याद करके बिलख रही मेघा
पंकज की पत्नी मेघा का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के लोग उसे शांत कराने की कोशिश करते मगर उसे आंसू थम नहीं रहे थे। बताया जाता है कि पंकज की शादी 2015 को बुलंदशहर के गांव रसूलपुर निवासी मेघा चौधरी से हुई थी। इन दोनों के एक 16 महीने का बेटा भी है। 

पुलिस और प्रशासनिक अफसर पहुंचे
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी पंकज के आवास पर पहुंचे और परिवार वालों को सांत्वना दी। सीडीओ रामनेवास, सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह और एसपी सिटी बालाजीपुरम में पहुंचे थे।
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