{"_id":"56f83e704f1c1bde5cf14f33","slug":"pallavi-s-make-again-limca-book-award","type":"story","status":"publish","title_hn":"पल्लवी के नाम एक और लिम्का बुक अवार्ड ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पल्लवी के नाम एक और लिम्का बुक अवार्ड
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Updated Mon, 28 Mar 2016 01:41 AM IST
विज्ञापन
पल्लवी के नाम एक और लिम्का बुक अवार्ड
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनिया के सबसे ऊंची लेह लद्दाख के काक संगला की पहाड़ियों पर पताका फहराने वाली आगरा की पल्लवी फौजदार ने एक और उपलब्धि अपने नाम की है। सितंबर 2015 में उन्होंने 18774 फुट ऊंचाई पर स्थित माना पास (डुंगरीला) की बाइक से राइड पूरी की। इस कारनामे के लिए उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया है।
सिकंदरा के हरीश नगर की पल्लवी फौजदार (36) लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराने वाली आगरा की पहली महिला राइडर हैं। वह दिल्ली में अपने पति एयरफोर्स आफीसर परीक्षित और दो बच्चों के साथ रहती हैं। वह लखनऊ में स्टोन का बिजनेस भी संभालती हैं। पल्लवी ने बताया कि 20 सितंबर 2015 को दिल्ली के इंडिया गेट से उन्होंने एवंजर बाइक से राइड शुरू की थी। वहां से बद्रीनाथ से एक किलोमीटर आगे माना गांव पहुंचीं। यह देश का आखिरी गांव है। माना गांव से भी 55 किलोमीटर आगे माना पास पड़ता है, यह पूरा कच्चा रास्ता है, पल्लवी ने यह दूरी छह घंटे में तय की।
24 सितंबर को माना पास में दस्तक दी। 27 सितंबर को वापस दिल्ली लौटीं। 19 मार्च 2016 को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स का सर्टिफिकेट उनके घर पहुंचा। वर्ष 2015 जुलाई में ही पल्लवी ने दिल्ली के इंडिया गेट से बुलट बाइक से लेह लद्दाख का सफर शुरू किया था। करीब चार हजार किलोमीटर का सफर उन्हाेंने 18 दिन में पूरा किया था। रिकार्ड में रजिस्टर्ड स्थान लाचंगलुंग ला, तंगलांग ला, खार्दुंग ला, वारी ला, चांग्ला ला, मरसिमिक ला, सताथो ला, काकसंग ला तक गई थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिकंदरा के हरीश नगर की पल्लवी फौजदार (36) लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में नाम दर्ज कराने वाली आगरा की पहली महिला राइडर हैं। वह दिल्ली में अपने पति एयरफोर्स आफीसर परीक्षित और दो बच्चों के साथ रहती हैं। वह लखनऊ में स्टोन का बिजनेस भी संभालती हैं। पल्लवी ने बताया कि 20 सितंबर 2015 को दिल्ली के इंडिया गेट से उन्होंने एवंजर बाइक से राइड शुरू की थी। वहां से बद्रीनाथ से एक किलोमीटर आगे माना गांव पहुंचीं। यह देश का आखिरी गांव है। माना गांव से भी 55 किलोमीटर आगे माना पास पड़ता है, यह पूरा कच्चा रास्ता है, पल्लवी ने यह दूरी छह घंटे में तय की।
विज्ञापन
24 सितंबर को माना पास में दस्तक दी। 27 सितंबर को वापस दिल्ली लौटीं। 19 मार्च 2016 को लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड्स का सर्टिफिकेट उनके घर पहुंचा। वर्ष 2015 जुलाई में ही पल्लवी ने दिल्ली के इंडिया गेट से बुलट बाइक से लेह लद्दाख का सफर शुरू किया था। करीब चार हजार किलोमीटर का सफर उन्हाेंने 18 दिन में पूरा किया था। रिकार्ड में रजिस्टर्ड स्थान लाचंगलुंग ला, तंगलांग ला, खार्दुंग ला, वारी ला, चांग्ला ला, मरसिमिक ला, सताथो ला, काकसंग ला तक गई थीं।
विज्ञापन