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बोदला जमीन प्रकरण के परिवार का दर्द: बेगुनाही में काटी जेल, बच्चों की पढ़ाई छूटी, घर बसाना भी मुश्किल

Sat, 09 Mar 2024 09:26 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 09 Mar 2024 09:26 AM IST
सार

आगरा के बोदला में करोड़ों की जमीन पर कब्जा करने के लिए एक बेगुनाह परिवार पर पुलिस का सितम टूटा। पूरे परिवार को जेल काटनी पड़ी। इस वजह से बच्चों की पढ़ाई तक छूट गई। मामला डीजीपी तक पहुंचा, तब  न्याय मिला। 
 

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pain of the family of Bodla land case: Spent in jail in innocence children missed their education
थाने में रखे सामान को देखता पीड़ित - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा में निर्दोष होते हुए भी परिवार के पांच सदस्यों ने जेल में दिन बिताए। जमानत मिलने पर बाहर आए तो भी राहत नहीं मिल सकी। दो महीने में पुलिस तीन आरोपियों को ही जेल भेज सकी। बाकी आरोपी या तो गिरफ्तारी पर स्टे ले आए, या पुलिस उन्हें पकड़ नहीं सकी। बच्चों की पढ़ाई छूट गई। फिर से घर बसाना भी मुश्किल हो रहा है। शुक्रवार दोपहर को पुलिस ने रवि कुशवाह को थाने बुलाया तो घर के बरामद सामान देखकर उनकी आंखों में आंसू छलक आए। बेटे के स्कूल बैग, बर्तन और कपड़े वापस मिल गए। उन्होंने कहा, किसी का क्या बिगाड़ा था, जो इतना दर्द दिया।
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चार महीने पहले बोदला में 10 हजार वर्ग गज जमीन पर कब्जा किया गया था। इस दौरान आरोपी रवि कुशवाह के परिवार के 5 सदस्यों को जेल भेजा गया था। कब्जे के बाद घर से सामान भी आरोपी लूटकर ले गए थे। दो महीने से पुलिस मुकदमे की विवेचना कर रही है। परिवार बार-बार सामान बरामदगी की गुहार लगा रहा था।
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शुक्रवार को पुलिस जब सामान बरामद कर थाना जगदीशपुरा में लेकर आई तो रवि कुशवाह सामान की पहचान के लिए पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले टेंपो और लोडर में रखा सामान एक-एक करके उतारा। बच्चों का स्कूल बैग, काॅपी, किताबों के साथ बेटे का आईडी कार्ड मिला तो रवि की आंखों में आंसू आ गए। उन्हें अन्य लोगों ने संभाला। इतना ही नहीं सामान में भाई का टूटा बेड, संदूक, कूलर, अटैची, बर्तन, चारपाई, कपड़े भी थे। उन्होंने यह सामान देखकर सुकून महसूस किया। मगर, अलमारी, फ्रिज और टीवी नहीं मिली हैं।
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सामान मिलने के बाद रवि कुशवाह का कहना था कि आरोपियों की वजह से वह पूरी तरह बर्बाद हो गए। बेटा राज पहली तो बेटी तमन्ना तीसरी कक्षा में पढ़ती थी। उनके जेल जाने से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो सकी। कुल्फी का व्यापार करते थे। वह भी बंद हो गया। अब पाई-पाई के लिए मोहताज हैं। कुल्फी का व्यापार दोबारा से करना बहुत मुश्किल है क्योंकि आइस बॉक्स खराब है। खरीदने के लिए रकम नहीं है। सारा सामान थाने में जमा रहेगा। इसे पाने के लिए भी चक्कर काटने होंगे। अब वह आरोपियों को सजा दिलाना चाहते हैं, जो दर्द उन्होंने महसूस किया। वहीं दर्द वो उन्हें भी देना चाहते हैं।
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