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यूपी: रातों-रात ढहाए पांच मकान, अब नगर निगम पहुंचे पीड़ित; पूछा- बिना नोटिस किसके आदेश पर चलाया बुलडोजर?
Sat, 17 Oct 2026 12:21 PM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 17 Oct 2026 12:21 PM IST
सार
आगरा के गरीब नगर रतनपुरा में पांच मकान ढहाए जाने के बाद पीड़ित परिवार नगर निगम पहुंचे और अधिकारियों से कार्रवाई का आधार पूछा। उनका आरोप है कि बिना नोटिस और सामान निकालने का मौका दिए मकान तोड़े गए।
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गरीब नगर रतनपुरा के लोग पहुंचे नगर निगम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा के गरीब नगर रतनपुरा क्षेत्र में नगर निगम की बुलडोजर कार्रवाई को लेकर पीड़ितों में भारी आक्रोश फैल गया है। हाल ही में निगम प्रशासन द्वारा रातों-रात ढहाए गए पांच मकानों के पीड़ित शनिवार को अपनी फरियाद और सवाल लेकर नगर निगम पहुंचे। बेघर हुए परिवारों ने अधिकारियों से सीधे सवाल दागे कि आखिर किस आदेश और किस नियम के तहत उनके आशियानों पर बुलडोजर चलाया गया?
"न नोटिस दिया, न सामान निकालने का मौका"
नगर निगम मुख्यालय पहुंचे पीड़ितों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि रातों-रात अचानक हुई इस दंडात्मक कार्रवाई से उनका पूरा सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया। पीड़ितों ने सवाल उठाया कि यह जमीन आखिरकार किसकी है और किसके लिखित आदेश पर इतने परिवारों को बेघर करने का कदम उठाया गया?
पक्षपातपूर्ण कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
प्रदर्शन और शिकायत के दौरान पीड़ितों ने शहर भर में हो रहे अवैध निर्माणों की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि आगरा शहर में जगह-जगह सरकारी जमीनों और नालियों पर पक्के अवैध कब्जे फैले हुए हैं, जिन पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ती। ऐसे में सिर्फ गरीब नगर रतनपुरा के ही इन 4-5 गरीब परिवारों के मकानों को ही निशाना बनाकर क्यों तोड़ा गया? पीड़ितों ने नगर निगम की इस कार्रवाई को पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण करार दिया।
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अधिकारियों से दिया जवाब मांगने का हुक्म
नगर निगम परिसर में अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंचे बेघर परिवारों ने वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और मुआवजा देने की मांग की है। पीड़ितों का कहना है कि जब तक उन्हें इस कार्रवाई का न्यायसंगत और लिखित जवाब नहीं मिलता, वे अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे।
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"न नोटिस दिया, न सामान निकालने का मौका"
नगर निगम मुख्यालय पहुंचे पीड़ितों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि रातों-रात अचानक हुई इस दंडात्मक कार्रवाई से उनका पूरा सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया। पीड़ितों ने सवाल उठाया कि यह जमीन आखिरकार किसकी है और किसके लिखित आदेश पर इतने परिवारों को बेघर करने का कदम उठाया गया?
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पक्षपातपूर्ण कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
प्रदर्शन और शिकायत के दौरान पीड़ितों ने शहर भर में हो रहे अवैध निर्माणों की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि आगरा शहर में जगह-जगह सरकारी जमीनों और नालियों पर पक्के अवैध कब्जे फैले हुए हैं, जिन पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ती। ऐसे में सिर्फ गरीब नगर रतनपुरा के ही इन 4-5 गरीब परिवारों के मकानों को ही निशाना बनाकर क्यों तोड़ा गया? पीड़ितों ने नगर निगम की इस कार्रवाई को पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और अन्यायपूर्ण करार दिया।
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अधिकारियों से दिया जवाब मांगने का हुक्म
नगर निगम परिसर में अपनी शिकायत दर्ज कराने पहुंचे बेघर परिवारों ने वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और मुआवजा देने की मांग की है। पीड़ितों का कहना है कि जब तक उन्हें इस कार्रवाई का न्यायसंगत और लिखित जवाब नहीं मिलता, वे अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे।