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राष्ट्रीय शिक्षा निधि लागू करने के लिए अभी अध्यादेश नहीं बना
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आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2021-22 में स्नातक पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू किया जाना है। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन निर्णय ले चुका है। कॉलेज प्रशासन उसी के अनुरूप प्रवेश लेने की तैयारी भी कर रहे हैं। जबकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने और उसके अनुरूप पढ़ाई कराए जाने के संबंध में अभी तक अध्यादेश नहीं बना है।
विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय का कहना है कि अध्यादेश का निर्माण जरूरी है। उसकी व्यवस्थाओं के अनुरूप ही पढ़ाई कराई जाएगी। छात्र-छात्राओं को क्रेडिंग अंक आदि प्रदान किए जाएंगे।
अध्यादेश बनाने के संबंध में विश्वविद्यालय की ओर से शासन से मार्गदर्शन मांगा जा रहा है। इसमें यह पूछा जाएगा कि अध्यादेश शासन स्तर से या फिर विश्वविद्यालय स्तर से बनाया जाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किए जाने के संबंध में अभी शासन स्तर से दिशा-निर्देश ही जारी किए गए हैं। जबकि व्यवस्थाओं का संचालन अध्यादेश के अनुरूप ही किया जाता है।
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सतत मूल्यांकन की भी व्यवस्था बनाई जानी है
प्रभारी कुलपति ने बताया कि शासन की ओर से छात्र-छात्राओं के सतत मूल्यांकन पर भी जोर दिया जा रहा है। सतत मूल्यांकन कैसे किया जाएगा, अभी इसकी भी रूपरेखा तय होनी है। इसके लिए विश्वविद्यालय में भी बैठकें की जाएंगी और शासन से भी मार्गदर्शन प्राप्त करके उसके अनुरूप कदम उठाया जाएगा।
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विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय का कहना है कि अध्यादेश का निर्माण जरूरी है। उसकी व्यवस्थाओं के अनुरूप ही पढ़ाई कराई जाएगी। छात्र-छात्राओं को क्रेडिंग अंक आदि प्रदान किए जाएंगे।
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अध्यादेश बनाने के संबंध में विश्वविद्यालय की ओर से शासन से मार्गदर्शन मांगा जा रहा है। इसमें यह पूछा जाएगा कि अध्यादेश शासन स्तर से या फिर विश्वविद्यालय स्तर से बनाया जाना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू किए जाने के संबंध में अभी शासन स्तर से दिशा-निर्देश ही जारी किए गए हैं। जबकि व्यवस्थाओं का संचालन अध्यादेश के अनुरूप ही किया जाता है।
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सतत मूल्यांकन की भी व्यवस्था बनाई जानी है
प्रभारी कुलपति ने बताया कि शासन की ओर से छात्र-छात्राओं के सतत मूल्यांकन पर भी जोर दिया जा रहा है। सतत मूल्यांकन कैसे किया जाएगा, अभी इसकी भी रूपरेखा तय होनी है। इसके लिए विश्वविद्यालय में भी बैठकें की जाएंगी और शासन से भी मार्गदर्शन प्राप्त करके उसके अनुरूप कदम उठाया जाएगा।