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Israel-Iran War: ईरान-इस्राइल संघर्ष से आगरा को बड़ा झटका, करोड़ों के ऑर्डर फंसे; बंदरगाहों पर रुका माल
Mon, 02 Mar 2026 10:09 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 10:09 AM IST
सार
ईरान-इस्राइल संघर्ष के चलते खाड़ी देशों के लिए आगरा से भेजा जाने वाला जूता, मार्बल और हस्तशिल्प निर्यात रुक गया है। बंदरगाहों पर करोड़ों का माल फंसा है, बढ़ते भाड़े और स्टोरेज लागत से निर्यातक संकट में हैं।
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इस्राइल-ईरान संघर्ष
- फोटो : PTI
विस्तार
ईरान-इस्राइल संघर्ष की सीधी मार अब शहर के जूता और हस्तशिल्प निर्यात पर रही है। मार्बल, हस्तशिल्प और जूता के खाड़ी देशों में निर्यात बंद हो गया है। करोड़ों के ऑर्डर फंस गए हैं। बंदरगाहों और फैक्टरियों में माल रुका पड़ा है।
खाड़ी देशों में जंग के हालात और हालिया सरकारी दिशा-निर्देशों के चलते बंदरगाहों (पोर्ट) पर सभी शिपमेंट होल्ड कर दिए गए हैं, जिससे स्थानीय निर्यातकों में भारी चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। हस्तशिल्प निर्यातक शीनू के मुताबिक, रमजान में गल्फ देशों से बड़े ऑर्डर मिले थे। माल तैयार होकर पोर्ट तक पहुंच चुका था और कुछ फैक्टरियों से निकलने को तैयार था, लेकिन युद्ध ने सब रोक दिया है।
शिपमेंट रुकने से न केवल पूंजी फंस गई है, बल्कि पोर्ट पर खड़े माल के लिए निर्यातकों को अतिरिक्त स्टोरेज चार्ज और लॉजिस्टिक्स लागत का भारी बोझ भी झेलना पड़ रहा है। यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो मार्बल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है।
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हवाई और जल मार्ग में भी युद्ध का खतरा
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजेश खुराना ने कहा कि यूरोप और खाड़ी देशों की हवाई सेवाएं प्रभावित होने से बायर्स के साथ होने वाली मीटिंग्स और मार्केटिंग गतिविधियां ठप हो गई हैं। समुद्री मार्ग में बदलाव हुआ है। लाल सागर भी युद्ध क्षेत्र होने के कारण जहाजों को घूमकर जाना पड़ रहा है। इससे माल पहुंचने के समय में वृद्धि हुई है और समुद्री भाड़ा भी कई गुना बढ़ गया है।
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खाड़ी देशों में जंग के हालात और हालिया सरकारी दिशा-निर्देशों के चलते बंदरगाहों (पोर्ट) पर सभी शिपमेंट होल्ड कर दिए गए हैं, जिससे स्थानीय निर्यातकों में भारी चिंता और अनिश्चितता का माहौल है। हस्तशिल्प निर्यातक शीनू के मुताबिक, रमजान में गल्फ देशों से बड़े ऑर्डर मिले थे। माल तैयार होकर पोर्ट तक पहुंच चुका था और कुछ फैक्टरियों से निकलने को तैयार था, लेकिन युद्ध ने सब रोक दिया है।
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शिपमेंट रुकने से न केवल पूंजी फंस गई है, बल्कि पोर्ट पर खड़े माल के लिए निर्यातकों को अतिरिक्त स्टोरेज चार्ज और लॉजिस्टिक्स लागत का भारी बोझ भी झेलना पड़ रहा है। यदि यह स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो मार्बल और हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को भारी नुकसान हो सकता है।
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हवाई और जल मार्ग में भी युद्ध का खतरा
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राजेश खुराना ने कहा कि यूरोप और खाड़ी देशों की हवाई सेवाएं प्रभावित होने से बायर्स के साथ होने वाली मीटिंग्स और मार्केटिंग गतिविधियां ठप हो गई हैं। समुद्री मार्ग में बदलाव हुआ है। लाल सागर भी युद्ध क्षेत्र होने के कारण जहाजों को घूमकर जाना पड़ रहा है। इससे माल पहुंचने के समय में वृद्धि हुई है और समुद्री भाड़ा भी कई गुना बढ़ गया है।