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आगरा में स्वास्थ्य व्यवस्था: 1919 लोगों पर एक कोविड बेड, 11658 पर सिर्फ एक वेंटिलेटर

Wed, 05 May 2021 12:18 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 05 May 2021 12:18 AM IST
सार

मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल 1011 पंजीकृत चिकित्सा प्रतिष्ठान हैं। जिनमें 265 पैथोलॉजी व डे-केयर क्लीनिक हैं। 746 छोटे-बड़े अस्पताल हैं। जिनमें कुल 6108 बेड और 586 वेंटिलेटर हैं। ये निजी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का ब्योरा है।

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only 386 ventilators available for covid patients in agra
वेंटिलेटर

विस्तार

आगरा में कोरोना महामारी में बेड, वेंटिलेटर और इलाज के लिए हंगामा यूं ही नहीं बरपा है। जिले में 25 निजी और 5 सरकारी कोविड अस्पतालों में 2345 बेड और 386 वेंटिलेटर हैं। इन्हीं पर शहर की 45 लाख लोगों की आबादी निर्भर हैं। ऐसे में 1919 लोगों के लिए एक बेड और 11658 लोगों पर एक वेंटिलेटर की उपलब्धता है।

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मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में कुल 1011 पंजीकृत चिकित्सा प्रतिष्ठान हैं। जिनमें 265 पैथोलॉजी व डे-केयर क्लीनिक हैं। 746 छोटे-बड़े अस्पताल हैं। जिनमें कुल 6108 बेड और 586 वेंटिलेटर हैं। ये निजी अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों का ब्योरा है। सरकारी अस्पताल इसमें शामिल नहीं हैं। आगरा शहर में 20 लाख और देहात में 25 लाख लोग रहते हैं। 
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मार्च 2020 में महामारी की आपदा आई। तब चुनिंदा अस्पताल ही कोविड उपचार के लिए मान्य हुए। वर्तमान में 25 निजी और 5 सरकारी अस्पताल हैं। जिनमें 1452 निजी और 893 सरकारी कोविड बेड हैं। इसी तरह 346 निजी और 40 सरकारी वेंटिलेटर हैं। निजी अस्पतालों में उपलब्ध 6108 बेड के सापेक्ष वर्तमान में कुल क्षमता के 24% बेड ही कोविड में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। 

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बेहतर प्रबंधन की जरूरत
पूर्व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं अस्पताल प्रभारी रहे डॉ. अजय कपूर का कहना है कोविड में सभी अस्पतालों का उपयोग होना चाहिए। सीमित संसाधनों के कारण ही मरीजों को बेड नहीं मिल रहे। पहले ही बेड कम थे। अब और कम होने से मरीज भटक रहे हैं। उनकी जान जा रही है। भर्ती नहीं हो पा रहे। क्योकि बेड फुल हैं। रोज 500 से 700 नए मरीज मिल रहे हैं। इसके लिए बेहतर प्रबंधन की जरूरत है।

एसएन में 930 बेड, 315 बेड की उपलब्धता
एसएन के पूर्व चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरएन गुप्ता ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में करीब 930 बेड हैं। कोविड में 315 ही इस्तेमाल हो रहे हैं। इसी तरह जिला अस्पताल में 150 बेड में से 78, सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर 300 बेड में 150 उपयोगी हैं। जबकि 100%  सरकारी संसाधनों का कोविड में इस्तेमाल होने से मरीजों को राहत मिल सकती है।

250 बेड और बढ़ाएंगे
शासन ने 2000 बेड के लिए कहा है। हमने 2345 बेड इंतजाम किया है। बाकी अन्य अस्पतालों में कोई रोक नहीं है। मरीज भर्ती कर सकते हैं। कोविड में 250 बेड और बढ़ाए जाएंगे। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी

नहीं मिला बेड, मौत
शास्त्रीपुरम निवासी 63 वर्षीय पर्यावरणविद् की रविवार को मौत हो गई। उनके भतीजे विवेक ने बताया कि तीन घंटे तक अस्पतालों में बेड व ऑक्सीजन के लिए गिड़गिड़ाते रहे। किसी ने भर्ती नहीं किया। सभी बेड फुल बता रहे थे। अस्पतालों के रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

24 घंटे बाद किया वार्ड में भर्ती
अर्जुन नगर के अस्पताल से रेफर होकर एसएन आईं 70 वर्षीय सरलादेवी को कोविड वार्ड में पहुंचने में 24 घंटे लग गए। उनके पुत्र रामेंद्र ने बताया कि निजी अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं होने की बात कह रविवार दोपहर में एसएन भेजा। यहां मां इमरजेंसी में रही। 24 घंटे बाद सोमवार को कोविड वार्ड में भर्ती किया गया।
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