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UP: हैरान रह जाएंगे ये जानकर...दवा एक और दाम में 10 गुना अंतर, एनपीपीए में दर्ज कराईं आपत्तियां

Wed, 25 Dec 2024 09:27 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Wed, 25 Dec 2024 09:27 AM IST
सार

दवा एक और दाम में 10 गुने अंतर को लेकर आगरा के चिकित्सक डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने एनपीपीए में आपत्तियां दर्ज कराईं। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
 

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One medicine and 10 times difference in price objections lodged with NPPA
दवाएं - फोटो : संवाद

विस्तार

दवाओं में एक ही सॉल्ट, लेकिन कीमत में अंतर 10 गुना तक है। 90 फीसदी तक का मुनाफा रिटेलर को दिया जा रहा है। शेड्यूल ड्रग में भी 5 से 10 गुना तक का मुनाफा लिया जा रहा है। यह मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए उत्पीड़न की तरह है। इस पर नेशनल ड्रग प्राइसिंग कंट्रोल अथॉरिटी कार्रवाई करे।
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आगरा के चिकित्सक और एक्टिविस्ट डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने मंगलवार को नई दिल्ली में हुई नेशनल फार्मा प्राइसिंग अथॉरिटी की बैठक में मंत्रालय के सामने ये आपत्तियां दर्ज कराईं। डॉ. कुलश्रेष्ठ ने दिल्ली हाईकोर्ट में जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं के दामों और गुणवत्ता में अंतर को लेकर जनहित याचिका दायर की हुई है, जिसमें हाईकोर्ट ने मंत्रालय के साथ बैठक के आदेश दिए थे। इसी मामले में मंगलवार को एनपीपीए के सदस्यों महावीर सैनी, अपर्णालाल और दीपक कुमार के साथ उन्होंने बैठक में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने दवाओं की कीमतों में अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस पर आपत्तियां दर्ज कराई और सबूत मुहैया कराए।
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16 फीसदी से ज्यादा मुनाफे की इजाजत नहीं
डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने प्राइस फिक्सिंग कमेटी के सामने बताया कि ड्रग प्राइसिंग कंट्रोल ऑर्डर 2013 कानून में साफ है कि रिटेलर को 16 फीसदी से ज्यादा मुनाफा लेने की इजाजत नहीं है। शेड्यूल ड्रग में भी गंभीर उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने सबूत के साथ कहा कि 5000 रुपये के एमआरपी वाली दवा रिटेलर 500 रुपये दे रहे हैं। कई जगह मोनोपॉली अपनाई जा रही है। चिकित्सक की लिखी दवा पूरे शहर में सिर्फ एक दुकान पर ही मिल रही है, जिसके मनमाने दाम लिए जा रहे हैं, जबकि जेनेरिक ड्रग की कीमत उससे 90 फीसदी तक कम होती है।
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एक ही कंपनी की दवा के दो नाम
कमेटी के सामने डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि एक ही कंपनी की एक दवा दो अलग अलग नाम से बेची जा रही है। एक की कीमत 600 रुपये है तो दूसरी की 3000 रुपये है। हेल्थ इंश्योरेंस वाले मरीजों के मामले में इस्तेमाल होने वाली दवाएं अलग फार्मेसी से बेची जा रही है, जो गुणवत्ता में कम हैं, पर उनकी कीमत ज्यादा वसूली जा रही है। यह प्रैक्टिस तत्काल बंद होनी चाहिए। इस मामले में कार्रवाई न होने पर वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे।
 
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