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UP: जहां शहंशाह अकबर करते थे शिकार, उस शिकारगाह की अब ऐसी है हालत; ये तस्वीर कर देगी हैरान
Tue, 07 Apr 2026 09:34 AM IST
Dhirendra Singh
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 07 Apr 2026 09:34 AM IST
सार
अकबर की शिकारगाह रही यह ऐतिहासिक इमारत अब उपेक्षा के कारण खंडहर में बदलती जा रही है। संरक्षण के अभाव में दीवारें गिर रही हैं और स्मारक का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर है।
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अकबर की शिकारगाह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जहां कभी शाही ठाठ-बाट था। शहंशाह अकबर शिकार के लिए आते थे, वह शिकारगाह बेरुखी के कारण खंडहर में तब्दील हो रही है। देखरेख के अभाव में इस ऐतिहासिक स्मारक का वजूद धीरे-धीरे मिटता जा रहा है।
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आगरा-फतेहपुर सीकरी मार्ग पर शहर से करीब 25 किमी दूर किरावली तहसील स्थित इस शिकारगाह की सोमवार को अमर उजाला टीम ने पड़ताल की, तो बदहाली सामने आई। 16वीं शताब्दी में बना यह स्मारक कागजों में तो राज्य पुरातत्व विभाग ने संरक्षित कर रखा है, लेकिन यह खंडहर में बदल गया है। स्मारक की दीवारें अब गिरासू हैं। नक्काशीदार छज्जे गिर चुके हैं और मुख्य द्वार पर गहरी दरारें आ गई हैं। बारिश के पानी से आई सीलन ने दीवारों को कमजोर कर दिया है। प्लास्टर गिर रहा है। जिम्मेदार अधिकारी इस ओर से पूरी तरह आंखें मूंदे हुए हैं।
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विभाग ने यहां संरक्षण का बोर्ड तो टांग दिया, लेकिन किया नहीं। स्थानीय निवासी रामवीर इंदौलिया का कहना है कि संरक्षण के नाम पर यहां दशकों से एक ईंट भी नहीं लगाई गई। विभाग की फाइलों में स्मारक भले ही सुरक्षित हो, लेकिन इसकी ईंटें और पत्थर एक-एक कर गायब किए जा रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार, यह शिकारगाह मुगलकालीन वास्तुकला और तत्कालीन सामरिक जीवन का नमूना है। यदि जल्द ही इसके जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह धरोहर हमेशा के लिए मिट्टी में दफन हो जाएगी।
राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी ने बताया कि अकबर की शिकारगाह के संरक्षण के लिए वृहद स्तर पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलने पर काम शुरू कराएंगे। स्मारक का संरक्षण किया जाएगा।