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Agra News: होला मोहल्ला पर गुरुद्वारों में गुरुमत विचारों से सराबोर हुआ समागम

Fri, 06 Mar 2026 02:43 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 02:43 AM IST
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On the occasion of Hola Mohalla, the gathering in the Gurudwaras was filled with Gurumat thoughts.
अजीतनगर में होला मोहल्ला 
आगरा। सिख धर्म के पावन पर्व होला मोहल्ला पर शहर के गुरुद्वारों में बुधवार को कीर्तन समागम हुआ। सिख धर्म के दसवें पातशाही गुरु गोबिंद सिंह की ओर से शुरू की गई इस परंपरा के तहत सुबह गुरुद्वारा साहिबजादा बाबा अजीत सिंह अजीत नगर में समागम हुआ। शाम को गुरुद्वारा हाथी घाट पर भी विशेष दीवान सजाया गया, जिसमें संगत ने सहभागिता कर गुरमत विचारों को आत्मसात किया।
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अजीत नगर गुरुद्वारे में भाई जसपाल सिंह ने आसा दी वार का कीर्तन प्रस्तुत किया। भाई करनैल सिंह और बीबी परमिंदर कौर ने गुरबाणी का गायन किया। फरीदाबाद से आए रागी मनकरण सिंह ने गायन कर संगत को निहाल किया। अमृतसर से आए भाई डिंपल सिंह ने गुरुमत विचार रखे। सचिव कुलविंदर सिंह अरोड़ा ने बताया कि पिछले कई दशकों से गुरुद्वारा अजीत नगर में होला मोहल्ला पर कीर्तन समागम पंरपरा चली आ रही है। समागम में सांसद राजकुमार चाहर परिवार का विशेष सहयोग रहा। समापन पर सांसद पुत्र पमरवीर चाहर, सरदार कुलदीप सिंह कांड्रा और जसवीर सिंह को सरदार सरबजीत सिंह कोचर ने सरोपा देकर सम्मानित किया। संचालन हरनेक सिंह ने किया। इस मौके पर उपप्रधान बृजेंद्र सिंह, जसपाल कोचर, राणा रणजीत सिंह, दलजीत सिंह, सुरेंद्र पाल सिंह, रवींद्र सिंह, इकबाल सिंह, कुलविंदर सिंह आदि मौजूद रहे।
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गुरुद्वारा हाथीघाट में सजा दीवान
शाम का दीवान गुरुद्वारा हाथी घाट पर गुरुद्वारा माईथान की ओर से आयोजित किया गया। गुरुद्वारा माईथान के प्रधान कंवलदीप सिंह और ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह ने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह ने मुगल काल में होला मोहल्ला की शुुरुआत की थी। इसका उद्देश्य युद्ध कला में अपने सिखों को पारंगत करते हुए युद्ध का रिहर्सल कराना होता था। तभी से ये परंपरा चली आरही है। कीर्तन समागम के समापन पर सभी के भले की अरदास की गई। इस मौके पर सुखमनी सेवा सभा के वीर महेंद्र पाल सिंह, वीरेंद्र सिंह, प्रवीण अरोड़ा, रौनक वाधवा, श्याम भोजवानी और रक्षपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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