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11 माह बाद भी नहीं टूटा तीर्थनगरी के रेलवे स्टेशन का सन्नाटा
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कासगंज सोरों की ट्रेन संचालन की खबर से संबंधित फोटो सोरों का रेलवे स्टेशन
- फोटो : KASGANJ
कोरोना लॉकडाउन के बाद से बंद हुई ट्रेनों के बाद अभी तक ट्रेनों का संचालन शुरू नहीं हुआ है। 11 माह बाद भी रेलवे स्टेशन का सन्नाटा नहीं टूट सकता है। तीर्थनगरी के लोगों ने नियमित ट्रेनों के संचालन की मांग डीआरएम से की है।
कासगंज-बरेली मार्ग पर कोरोना महामारी के चलते रेलवे प्रशासन ने बीते वर्ष 21 मार्च से ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया था। देश भर में अब स्थिति सामान्य हो चली है सभी प्रकार की बंद सेवाएं बस, टैक्सी, हवाई जहाज, मेट्रो ट्रेनें, लंबी दूरी की ट्रेनें आदि शुरू हुई हैं। लेकिन तीर्थनगरी का क्षेत्र रेल यातायात से कटा हुआ है। कोरोना महामारी से पूर्व कासगंज बरेली मार्ग पर पांच जोड़ी पैसेंजर व एक जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन होता था। इनमें बड़ी संख्या में राजस्थान, एमपी से तीर्थनगरी आने वाले श्रद्धालु सोरों तीर्थनगरी में आते थे।
इससे रेलवे स्टेशन के आसपास कैंटीन व होटल चलाने वाले दुकानदारों को रोजगार मिलता था। वहीं श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने से अन्य व्यापारियों को भी लाभ होता था। क्यों कि ट्रेनें सस्ती और सुविधाजनक रहती हैं। लेकिन ट्रेनों के बंद हो जाने से तीर्थनगरी के छोटे व बड़े व्यापारी सभी पर असर पड़ा है। श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई। रोडवेज व निजी वाहनों से ही सुदूर स्थानों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। तीर्थपुरोहित व व्यापारियों ने ट्रेनों के परिचालन की मांग डीआरएम से की है। मांग करने वालों में प्रमोद त्रिगुनायत, हरिओम शर्मा, नितिन पाथरे, श्याम बड़गैयां, सुमित दीक्षित आदि शामिल हैं।
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वर्जन
सभी ट्रेनों का शीघ्र संचालन किया जाए। इससे श्रद्धालुओं की संख्या तीर्थनगरी में बढ़े। वहीं बरेली, अजमेर, उज्जैन, जयपुर आदि स्थानों के लिए ट्रेनों का संचालन कर ठहराव सोरों किया जाए। - अंकुर पाराशर, तीर्थ पुरोहित।
इस रूट पर पूर्व में चलने वाली रामनगर बांद्रा ट्रेन का शीघ्र संचालन प्रारंभ करके सोरों रेलवे स्टेशन पर ठहराव किया। इससे व्यापारियों को अन्य प्रांतों में व्यापार संबंधी कार्य के लिए जाने में सुगमता रहे। - विनोद गुप्ता, व्यापारी।
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कासगंज-बरेली मार्ग पर कोरोना महामारी के चलते रेलवे प्रशासन ने बीते वर्ष 21 मार्च से ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया था। देश भर में अब स्थिति सामान्य हो चली है सभी प्रकार की बंद सेवाएं बस, टैक्सी, हवाई जहाज, मेट्रो ट्रेनें, लंबी दूरी की ट्रेनें आदि शुरू हुई हैं। लेकिन तीर्थनगरी का क्षेत्र रेल यातायात से कटा हुआ है। कोरोना महामारी से पूर्व कासगंज बरेली मार्ग पर पांच जोड़ी पैसेंजर व एक जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन होता था। इनमें बड़ी संख्या में राजस्थान, एमपी से तीर्थनगरी आने वाले श्रद्धालु सोरों तीर्थनगरी में आते थे।
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इससे रेलवे स्टेशन के आसपास कैंटीन व होटल चलाने वाले दुकानदारों को रोजगार मिलता था। वहीं श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रहने से अन्य व्यापारियों को भी लाभ होता था। क्यों कि ट्रेनें सस्ती और सुविधाजनक रहती हैं। लेकिन ट्रेनों के बंद हो जाने से तीर्थनगरी के छोटे व बड़े व्यापारी सभी पर असर पड़ा है। श्रद्धालुओं की संख्या कम हुई। रोडवेज व निजी वाहनों से ही सुदूर स्थानों से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। तीर्थपुरोहित व व्यापारियों ने ट्रेनों के परिचालन की मांग डीआरएम से की है। मांग करने वालों में प्रमोद त्रिगुनायत, हरिओम शर्मा, नितिन पाथरे, श्याम बड़गैयां, सुमित दीक्षित आदि शामिल हैं।
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सभी ट्रेनों का शीघ्र संचालन किया जाए। इससे श्रद्धालुओं की संख्या तीर्थनगरी में बढ़े। वहीं बरेली, अजमेर, उज्जैन, जयपुर आदि स्थानों के लिए ट्रेनों का संचालन कर ठहराव सोरों किया जाए। - अंकुर पाराशर, तीर्थ पुरोहित।
इस रूट पर पूर्व में चलने वाली रामनगर बांद्रा ट्रेन का शीघ्र संचालन प्रारंभ करके सोरों रेलवे स्टेशन पर ठहराव किया। इससे व्यापारियों को अन्य प्रांतों में व्यापार संबंधी कार्य के लिए जाने में सुगमता रहे। - विनोद गुप्ता, व्यापारी।