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सीआईडी के शिकंजे से कोई नहीं बच सकता

Fri, 17 Jul 2015 01:41 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा Updated Fri, 17 Jul 2015 01:41 AM IST
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No one can escape from CID
‘दया दरवाजा तोड़ तो’ और ‘कुछ तो गड़बड़ है’ ऐसे चर्चित डायलाग हैं जो बच्चों और युवाओं की जुबान पर चढ़ चुके हैं। सोनी टेलीविजन पर आने वाले क्राइम बेस शो ‘सीआईडी’ में जो कलाकार इन डायलाग्स को बोलते हैं वे आजकल आगरा में सीरियल की शूटिंग कर रहे हैं। शहर कई इलाकों में शूटिंग के बाद गुरुवार को मिले फुर्सत के पलों को उन्होंने पत्रकारों के साथ साझा किया।
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फतेहाबाद रोड स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में एसीपी प्रद्युम्न (शिवाजी साटम) ने कहा कि क्राइम पर आधारित कई सीरियल अन्य चैनलों पर आ रहे हैं लेकिन सीआईडी का किसी से कंपटीशन नहीं है। हमने अपराध को दिखाया तो उस अपराध को करने पर मिलने वाली सजा को बारे में उतनी ही शिद्दत जानकारी दी। सबसे अहम बात है कि हमने कभी रेप जैसे सबजेक्ट को शो बनाने की कोशिश नहीं की। इसी का नतीजा है कि 18 वर्ष से हम उतने पापुलर हैं। सीधी सी बात है कि सीआईडी के चंगुल से कोई बच नहीं सकता है।
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एक सवाल के जवाब में दया (दयानंद शेट्टी) ने कहा कि सीआईडी में अपराध की जांच के तरीकों को प्रमुखता दी गई है। किसी सत्य घटना का सहारा नहीं लिया गया। फारेंसिक साइंस को बेस बनाया गया है जिससे लोगों को पता लग सके कि अपराध करने बाद अपराधी बच नहीं सकता है। दया ने कहा कि आज नार्को टेस्ट की बात होने लगी है लेकिन हमने 12 वर्ष पहले ही इस टेस्ट के बारे में जानकारी दी थी लेकिन तब लोग मजाक समझते थे।
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अभिजीत (आदित्य श्रीवास्तव) ने कहा कि सीआईडी ने हम कलाकारों को पहचान दी है। इसी की वजह से फिल्में भी मिली हैं दया ने कई फिल्म की हैं मैने भी कई फिल्मों में काम किया है लेकिन सीआईडी का अपना ही महत्व है। सीरियल की महिला कलाकार तान्या अवरोल और माया का कहना था कि इस सीरियल में काम करने बाद लगा कि महिलाएं सबकुछ करन में सक्षम हैं। महिला सुरक्षा के संबंध में उनका कहना था कि महिलाओं को सेल्फ प्रोटेक्शन के प्रयास करने ही चाहिए लेकिन सरकारों को भी इस ओर सोचना होगा कि महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों की सजा कठोर हो।


सदर बाजार में खाई पानी की टिकिया
आगरा। एसीपी प्रद्युम्न और उनकी टीम को आगरा की गलियां खूब भाईं। उन्होेंने कहा कि आगरा खूबसूरत शहर है। शूट के बाद समय मिला तो सदर बाजार में पानी की टिकिया भी खाई हैं। पेठा और दालमोठ भी खरीदी हैं। यहां शूटिंग करने में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। मौका मिला तो आगरा में शूट करने दोबारा भी आएंगे।
   
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