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न मकान का किराया देने को धन न खाने का इंतजाम
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सोरों। कोरोना संक्रमण काल में कसबा के भी तीन बच्चे अनाथ हो गए, पर जिम्मेदार विभाग ने इनकी सुधि नहीं ली है। माता-पिता की मौत के बाद से उनके पास न तो मकान का किराया देने को पैसे हैं और न ही खाने पीने का कोई इंतजाम।
तीनों अनाथ बच्चे कस्बा के मोहल्ला कटरा मठ में रहते हैं। सबसे बड़ी मुस्कान (12 वर्ष), अरुण (7) एवं अर्जुन (6) के सिर पर न तो ममता भरा हाथ फिराने वाली मां है और न ही दुलार करने वाले पिता। बच्चों की मां मालती की 15 जनवरी 2020 को बीमारी के चलते मौत हो गई। इसके बाद पिता मदन लाल पर बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी आ गई।
मदन ईट भट्ठा पर मजदूरी करता था और किराए के मकान में रहता था। 6 अप्रैल को उसकी भी बीमारी के चलते मौत हो गई। पिता की मौत के बाद बच्चों पर मकान का किराया देने तक के पैसे हैं। खाने पीने के लिए रुपये नहीं हैं। बच्चे चाचा के रहमोकरम पर हैं।
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तीनों अनाथ बच्चे कस्बा के मोहल्ला कटरा मठ में रहते हैं। सबसे बड़ी मुस्कान (12 वर्ष), अरुण (7) एवं अर्जुन (6) के सिर पर न तो ममता भरा हाथ फिराने वाली मां है और न ही दुलार करने वाले पिता। बच्चों की मां मालती की 15 जनवरी 2020 को बीमारी के चलते मौत हो गई। इसके बाद पिता मदन लाल पर बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी आ गई।
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मदन ईट भट्ठा पर मजदूरी करता था और किराए के मकान में रहता था। 6 अप्रैल को उसकी भी बीमारी के चलते मौत हो गई। पिता की मौत के बाद बच्चों पर मकान का किराया देने तक के पैसे हैं। खाने पीने के लिए रुपये नहीं हैं। बच्चे चाचा के रहमोकरम पर हैं।
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