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फर्जी बैनामा कांड: निबंधन कर्मियों पर अफसर मेहरबान, एसआईटी जांच भी बेनतीजा; चार महीने बाद भी नहीं कार्रवाई
Sun, 13 Jul 2025 01:03 PM IST
अरुन पाराशर
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: अरुन पाराशर
Updated Sun, 13 Jul 2025 01:03 PM IST
सार
फर्जी बैनामे के मामलों में पुलिस ने आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज किए हैं। जबकि, निबंधन विभाग में हुए इस फर्जीवाड़े के लिए विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तक तय नहीं की गई है।
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आगरा सदर तहसील निबन्धन भवन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
आगरा में फर्जी बैनामा कांड में निबंधन कर्मियों पर आला अफसर मेहरबान हैं। उप निबंधक, लिपिक और आउटसोर्स कर्मियों की संलिप्तता जाहिर होने के बाद भी कार्रवाई नहीं की गई। सहायक महानिरीक्षक के विरुद्ध भी कार्रवाई के लिए फाइल शासन में लंबित है।
सदर तहसील में निबंधन भवन है। जहां पांच उप निबंधक कार्यालय और केंद्रीय अभिलेखागार है। अभिलेखागार में फर्जी बैनामा गैंग ने सेंध लगाई। फरवरी में मामला उजागर होने के बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की गई। चार महीने बाद भी एसआईटी की जांच बेनतीजा है।
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सदर तहसील में निबंधन भवन है। जहां पांच उप निबंधक कार्यालय और केंद्रीय अभिलेखागार है। अभिलेखागार में फर्जी बैनामा गैंग ने सेंध लगाई। फरवरी में मामला उजागर होने के बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की गई। चार महीने बाद भी एसआईटी की जांच बेनतीजा है।
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उधर, जिन निबंधनकर्मियों पर संलिप्तता के आरोप लगे, उन पर अफसर मेहरबान हैं। इस मामले में एक तरफ पुलिस ने आधा दर्जन से अधिक केस दर्ज किए हैं। जबकि, निबंधन विभाग में हुए इस फर्जीवाड़े के लिए विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तक तय नहीं की गई है।
जिला निबंधक व एडीएम वित्त ने रिकाॅर्ड रूम का निरीक्षण नहीं किया। उनकी जिम्मेदारी थी कि नियमित रूप से अभिलेखागार का निरीक्षण करें और दस्तावेजों का रखरखाव सत्यापित करें।
तीन साल तक सहायक महानिरीक्षक के पद पर तैनात रहे एसके सिंह का स्थानांतरण हो गया। इनके विरुद्ध तत्कालीन मंडलायुक्त व डीएम ने शासन में कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी थी। उन्हीं के कार्यकाल में अभिलेखागार में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां होने की आशंका है। वहीं, इस संबंध में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट में दोषी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
जिला निबंधक व एडीएम वित्त ने रिकाॅर्ड रूम का निरीक्षण नहीं किया। उनकी जिम्मेदारी थी कि नियमित रूप से अभिलेखागार का निरीक्षण करें और दस्तावेजों का रखरखाव सत्यापित करें।
तीन साल तक सहायक महानिरीक्षक के पद पर तैनात रहे एसके सिंह का स्थानांतरण हो गया। इनके विरुद्ध तत्कालीन मंडलायुक्त व डीएम ने शासन में कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी थी। उन्हीं के कार्यकाल में अभिलेखागार में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां होने की आशंका है। वहीं, इस संबंध में जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी का कहना है कि मामले की जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट में दोषी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।