एनएचएआई को महंगी पड़ सकती है हाईवे पर उड़ती धूल, पांच करोड़ जुर्माना लगाने की तैयारी
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धूल उड़ने पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) पर पांच करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से गठित की गई मानीटरिंग कमेटी के चेयरमैन के आगरा दौरे के समय हाईवे निर्माण में धूल उड़ती मिली थी।
इसके बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने संयुक्त रूप से अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। दिल्ली स्थित सीपीसीबी मुख्यालय से एनएचएआई पर जुर्माना तय करने के लिए कहा गया है।
पांच साल से नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के नाम पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी के अफसरों ने शहर के लोगों को अस्थमा का मरीज बना दिया है। खोदाई और बेतरतीब आधे-अधूरे निर्माण कार्य के कारण चौड़ीकरण प्रोजेक्ट के पास रहने वालों के लिए धूल मुसीबत का सबब बन गई है।
एनजीटी ने कसा शिकंजा
अब ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने एनएचएआई पर शिकंजा कसा है। टीटीजेड अथॉरिटी तो पूर्व में ही नोटिस जारी कर चुकी है, वहीं एनजीटी मानीटरिंग कमेटी चेयरमैन ने भी हाईवे के अफसरों पर जुर्माना ठोकने के आदेश दिए हैं।
एनजीटी के ही आदेश पर प्रदूषण संबंधी मामले में जुर्माना ठोकने के लिए तय फार्मूला बनाया गया था। उसी आधार पर हाईवे के प्रदूषण का आकलन किया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो पांच करोड़ रुपये का जुर्माना हाईवे अथॉरिटी पर लगाया जा सकता है।
इस आधार पर लगेगा जुर्माना
- धूल उड़ाने से एयर क्वालिटी पर कितना असर
- हाईवे निर्माण में कितने समय तक चली खोदाई
- एक किमी चौड़ीकरण में कितनी मिट्टी निकाली
- धूल उड़ने से क्षेत्र की कितनी आबादी पर दुष्प्रभाव
- पांच साल में धूल रोकने के उपाय किए या नहीं
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश यादव ने कहा कि टीटीजेड अथॉरिटी ने पहले ही जांच कराकर नोटिस भेजा है। संयुक्त जांच रिपोर्ट में भी धूल नियंत्रित करने के उपाय नहीं मिले थे। जुर्माने की रकम तय करने के लिए तय फार्मूला है, इसलिए इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजा गया है।