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यमुना में प्रदूषण: एनजीटी ने 66 करोड़ के जुर्माने पर नगर निगम से मांगा जवाब, 22 दिसंबर को सुनवाई
Fri, 10 Oct 2025 08:45 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 10 Oct 2025 08:45 AM IST
सार
आगरा और मथुरा-वृंदावन नगर निगम से पर्यावरण मुआवजा (ईसी) जमा करने और अनुपालन पर हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 22 दिसंबर तय की है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यमुना नदी में प्रदूषण के मामले में आगरा और मथुरा नगर निगम से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जवाब मांगा है। दोनों नगर निगमों पर करीब 66 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था, जिसमें 58.39 करोड़ रुपये का जुर्माना आगरा नगर निगम पर है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 22 दिसंबर तय की है।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई की। पर्यावरणविद डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका को स्वीकार करते हुए एनजीटी ने कहा कि मथुरा-वृंदावन नगर निगम को 8 दिसंबर 2023 से 6 नवंबर 2024 की अवधि के लिए 93,59,900 रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
ये भी पढ़ें - UP: दिव्यांग पति और उसकी मजबूरी...महिला के साथ कांग्रेस नेता ने किया इतना गंदा काम, पुलिस भी रह गई सन्न
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आगरा नगर निगम को इसी अवधि के लिए 67,92,12,500 रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। आगरा नगर निगम ने अब तक 58.39 करोड़ रुपये और मथुरा वृंदावन निगम ने 7.20 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा जमा नहीं किया है। सुनवाई के दौरान यूपीपीसीबी के वकील ने बताया कि वे शीघ्र ही बकाया पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगली सुनवाई में आगामी अवधि के लिए पर्यावरण मुआवजे की गणना का विवरण तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के मानकों के अनुपालन और नालों की स्थिति पर एक हलफनामा दाखिल किया जाएगा।
दाखिल करना होगा जवाब
पीठ ने आगरा और मथुरा-वृंदावन नगर निगमों के आयुक्तों को नोटिस जारी किया। दोनों को एनजीटी के आदेशों के अनुपालन पर हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले में अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।
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एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई की। पर्यावरणविद डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की याचिका को स्वीकार करते हुए एनजीटी ने कहा कि मथुरा-वृंदावन नगर निगम को 8 दिसंबर 2023 से 6 नवंबर 2024 की अवधि के लिए 93,59,900 रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
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आगरा नगर निगम को इसी अवधि के लिए 67,92,12,500 रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। आगरा नगर निगम ने अब तक 58.39 करोड़ रुपये और मथुरा वृंदावन निगम ने 7.20 करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा जमा नहीं किया है। सुनवाई के दौरान यूपीपीसीबी के वकील ने बताया कि वे शीघ्र ही बकाया पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगली सुनवाई में आगामी अवधि के लिए पर्यावरण मुआवजे की गणना का विवरण तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के मानकों के अनुपालन और नालों की स्थिति पर एक हलफनामा दाखिल किया जाएगा।
दाखिल करना होगा जवाब
पीठ ने आगरा और मथुरा-वृंदावन नगर निगमों के आयुक्तों को नोटिस जारी किया। दोनों को एनजीटी के आदेशों के अनुपालन पर हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है। मामले में अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी।