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एनजीटी : 65 करोड़ का जुर्माना वसूलने के लिए जारी करें आरसी
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यमुना नदी
आगरा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने यमुना नदी में बिना शोधित सीवेज गिराने और 65 करोड़ रुपये का जुर्माना न भरने पर आगरा और मथुरा-वृंदावन नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। सोमवार को चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिला प्रशासन के माध्यम से जुर्माने की वसूली की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया।
एनजीटी बेंच ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई की थी, जिनमें दो आवेदन स्वतः संज्ञान लिए गए थे, जबकि तीसरी एग्जीक्यूटिव एप्लीकेशन पर्यावरणविद डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की थी। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि अपनी याचिका में मांग की है कि आगरा और मथुरा नगर निगम ने 65 करोड़ का जुर्माना जमा नहीं कराया, वहीं यमुना की स्थिति में भी कोई सुधार नहीं हुआ है और नाले अभी भी सीधे नदी में गिर रहे हैं। उन्होंने आदेश के बाद से सितंबर जुर्माना लगाने की मांग की, जिसमें 120 करोड़ रुपये और जुर्माना देना पड़ सकता है। बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।
प्रदूषण बोर्ड को लिया आड़े हाथों
डाॅ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बेंच ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आड़े हाथों लिया। अप्रैल 2024 के फैसले के बावजूद बोर्ड वसूली का कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। चेयरपर्सन ने कहा कि बोर्ड ने केवल डॉ. कुलश्रेष्ठ की आरटीआई के जवाब में पत्र लिखे, लेकिन अपनी तरफ से वसूली के लिए कोई कानूनी कदम नहीं उठाया। मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने बेंच की फटकार पर अगले 8 हफ्तों के भीतर जुर्माना जमा करने की सहमति जताई है।
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नगर निगम के तर्क पर बेंच नाराज
सुनवाई में आगरा निगम की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने सुधारात्मक कमेटी बनाने का तर्क देकर समय मांगा, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अधिकारियों को केवल मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत राहत दी है, लेकिन हर्जाना भरने और पर्यावरण सुधार के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है।
चार सप्ताह में आरसी जारी कराएगा बोर्ड
पुराना 65 करोड़ जुर्माना जमा न करने पर फटकार के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी से कहा है कि वे आगामी 4 हफ्तों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करवाएंगे ताकि नगर निगमों से पैसा वसूला जा सके। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च, 2026 को होगी
185 करोड़ का जुर्माना वसूलने की मांग
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने याचिका में 185 करोड़ से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की मांग की है। 24 अप्रैल 2024 को एनजीटी ने आगरा नगर निगम को यमुना नदी में अनुपचारित सीवेज छोड़ने के लिए 58.39 करोड़ और मथुरा नगर निगम पर 6 करोड़ का जुर्माना लगाया था। 4 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भी नगर निगम को कोई राहत देने से इन्कार कर दिया और जुर्माने के आदेश को बरकरार रखा। डॉ कुलश्रेष्ठ ने कहा कि 91 नाले अभी भी सीधे यमुना में गिर रहे हैं। इसके चलते 625 अतिरिक्त दिन के लिए 126.71 करोड़ का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाए।
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एनजीटी बेंच ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई की थी, जिनमें दो आवेदन स्वतः संज्ञान लिए गए थे, जबकि तीसरी एग्जीक्यूटिव एप्लीकेशन पर्यावरणविद डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ की थी। डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि अपनी याचिका में मांग की है कि आगरा और मथुरा नगर निगम ने 65 करोड़ का जुर्माना जमा नहीं कराया, वहीं यमुना की स्थिति में भी कोई सुधार नहीं हुआ है और नाले अभी भी सीधे नदी में गिर रहे हैं। उन्होंने आदेश के बाद से सितंबर जुर्माना लगाने की मांग की, जिसमें 120 करोड़ रुपये और जुर्माना देना पड़ सकता है। बेंच ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।
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प्रदूषण बोर्ड को लिया आड़े हाथों
डाॅ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बेंच ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आड़े हाथों लिया। अप्रैल 2024 के फैसले के बावजूद बोर्ड वसूली का कोई भी ठोस सबूत पेश नहीं कर सका। चेयरपर्सन ने कहा कि बोर्ड ने केवल डॉ. कुलश्रेष्ठ की आरटीआई के जवाब में पत्र लिखे, लेकिन अपनी तरफ से वसूली के लिए कोई कानूनी कदम नहीं उठाया। मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने बेंच की फटकार पर अगले 8 हफ्तों के भीतर जुर्माना जमा करने की सहमति जताई है।
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नगर निगम के तर्क पर बेंच नाराज
सुनवाई में आगरा निगम की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने सुधारात्मक कमेटी बनाने का तर्क देकर समय मांगा, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। बेंच ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अधिकारियों को केवल मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत राहत दी है, लेकिन हर्जाना भरने और पर्यावरण सुधार के आदेश पर कोई रोक नहीं लगाई है।
चार सप्ताह में आरसी जारी कराएगा बोर्ड
पुराना 65 करोड़ जुर्माना जमा न करने पर फटकार के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी से कहा है कि वे आगामी 4 हफ्तों के भीतर जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी करवाएंगे ताकि नगर निगमों से पैसा वसूला जा सके। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च, 2026 को होगी
185 करोड़ का जुर्माना वसूलने की मांग
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने याचिका में 185 करोड़ से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की मांग की है। 24 अप्रैल 2024 को एनजीटी ने आगरा नगर निगम को यमुना नदी में अनुपचारित सीवेज छोड़ने के लिए 58.39 करोड़ और मथुरा नगर निगम पर 6 करोड़ का जुर्माना लगाया था। 4 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने भी नगर निगम को कोई राहत देने से इन्कार कर दिया और जुर्माने के आदेश को बरकरार रखा। डॉ कुलश्रेष्ठ ने कहा कि 91 नाले अभी भी सीधे यमुना में गिर रहे हैं। इसके चलते 625 अतिरिक्त दिन के लिए 126.71 करोड़ का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाए।