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नवीन मंडी में क्यों ध्वस्त किए जाएंगे 230 निर्माण
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1एमएनपी-12-मंडी में बिक्री न होने से अनाज से लदे खड़े किसानों के ट्रैक्टर
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। आखिरकार नवीन मंडी में किए गए अवैध कब्जों के खिलाफ मंडी प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। शुक्रवार को 230 कब्जों को चिह्नांकन कर निशान लगाए गए हैं। इन कब्जों को ध्वस्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
मंडी समिति की आवंटित पक्की दुकानों के अलावा लगातार निर्माण कार्य चलते रहे। पक्की दुकान से लेकर टिन शेड और टट्टर तक सैकड़ों कब्जे किए गए। मंडी समिति ने पूरी नवीन मंडी में 230 अवैध निर्माण को चिह्नित कर लिया है। अगर आढ़ती खुद इन्हें नहीं हटाते तो मंडी प्रशासन ध्वस्त करेगा।
कर्मचारियों से अभद्रता का आरोप
मंडी समिति ने आढ़तियों द्वारा अभद्रता करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वो अवैध रूप से बनाई गई दुकानों पर चिह्नांकन कर रहे थे तो आढ़तियों ने विरोध शुरू कर दिया। कर्मचारी के हाथ से पेंट का डिब्बा और ब्रश लेकर फेंक दिया और उन्हें भगा दिया। मामले की जानकारी मंडी सचिव प्रदीप कुमार ने एसडीएम सदर को भी दी है। हालांकि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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नवीन मंडी में जो भी अवैध कब्जे हैं उनका चिह्नांकन कर लिया है। आढ़तियों द्वारा गलत तरीके से दबाव बनाया जा रहा है। सरकार के आदेश पर अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं, इसमें कोई राहत मिलना संभव नहीं है।
प्रदीप कुमार, मंडी सचिव।
मंडी में आढ़तियों ने की हड़ताल, परेशान रहे किसान
मैनपुरी। मंडी समिति की ओर से अवैध निर्माण पर कार्रवाई के आदेश के बाद आढ़तियों ने धरना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को व्यापारियों ने दुकानें बंद कर मंडी परिसर में ही धरना दिया। वो मंडी प्रशासन से आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
नवीन मंडी में व्यापारियों ने खुद ही अपने व्यापार करने के लिए दुकानों का निर्माण कर लिया था। अब मंडी प्रशासन इन दुकानों को ध्वस्त कराने जा रहा है। इससे व्यापारी आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि आढ़ती कई सालों से इनमें व्यापार कर रहे हैं तो पहले इन्हें ध्वस्त क्यों नहीं कराया गया। मंडी प्रशासन से लागत मूल्य पर दुकान निर्माण कर आवंटन करने की मांग कर रहे हैं। वहीं मंडी प्रशासन उनकी मांग को गलत बता रहा है। शुक्रवार को धरने में आढ़ती उपदेश यादव, बीनू बंसल, अनूप मिश्रा, रामबाबू कुशवाह, आदित्य राजपूत, अनिल कुमार, राघव यादव, भोले बाबा, राजू, ब्रजेश, कमलेश, रघुवीर सिंह, उदयवीर सिंह समेत एक सैकड़ा आढ़ती मौजूद रहे।
ये है नियम
नियमानुसार आढ़तियों को मंडी समिति द्वारा प्रस्ताव पास कर दुकानों का निर्माण कराना होता है। आवंटन के लिए खुली बैठक में बोली प्रक्रिया से नीलामी की जाती है जो व्यापारी सबसे अधिक बोली लगाता है उसे ही दुकान आवंटित की जाती है। औसतन एक दुकान की बोली 15 लाख तक जाती है। मंडी प्रशासन को अवैध निर्माण से करोड़ों का घाटा हो रहा है।
किसानों की बात
चाहे बात अवैध कब्जों की हो या फिर कुछ और लेकिन किसानों की क्या गलती है। प्रशासन को मंडी की हड़ताल को खत्म कराने के आदेश देने चाहिए।
संजीव कुमार, नगला नया
सुबह बिक्री के लिए धान मंडी लाए थे। अब पता चला कि मंडी में तो हड़ताल है। ऐसे में चार घंटे से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आढ़ती बिक्री के लिए तैयार नहीं हैं।
विनय कुमार, गोकुलपुर
अधिकांश किसान किराया खर्च कर फसल को बेचने के लिए मंडी तक आते हैं। हड़ताल में चलते अब किसानों को अनाज वापस ले जाने के लिए भी किराया देना पड़ेगा।
सुबोध कुमार, नगला दौलत
नवीन मंडी में कोई भी बात होती है तो हड़ताल पहले शुरू हो जाती है। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। पूर्व में ही अगर जानकारी दी जाए तो किसान परेशान न हों।
संतोष यादव, नगला बरी
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मंडी समिति की आवंटित पक्की दुकानों के अलावा लगातार निर्माण कार्य चलते रहे। पक्की दुकान से लेकर टिन शेड और टट्टर तक सैकड़ों कब्जे किए गए। मंडी समिति ने पूरी नवीन मंडी में 230 अवैध निर्माण को चिह्नित कर लिया है। अगर आढ़ती खुद इन्हें नहीं हटाते तो मंडी प्रशासन ध्वस्त करेगा।
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कर्मचारियों से अभद्रता का आरोप
मंडी समिति ने आढ़तियों द्वारा अभद्रता करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को वो अवैध रूप से बनाई गई दुकानों पर चिह्नांकन कर रहे थे तो आढ़तियों ने विरोध शुरू कर दिया। कर्मचारी के हाथ से पेंट का डिब्बा और ब्रश लेकर फेंक दिया और उन्हें भगा दिया। मामले की जानकारी मंडी सचिव प्रदीप कुमार ने एसडीएम सदर को भी दी है। हालांकि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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नवीन मंडी में जो भी अवैध कब्जे हैं उनका चिह्नांकन कर लिया है। आढ़तियों द्वारा गलत तरीके से दबाव बनाया जा रहा है। सरकार के आदेश पर अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं, इसमें कोई राहत मिलना संभव नहीं है।
प्रदीप कुमार, मंडी सचिव।
मंडी में आढ़तियों ने की हड़ताल, परेशान रहे किसान
मैनपुरी। मंडी समिति की ओर से अवैध निर्माण पर कार्रवाई के आदेश के बाद आढ़तियों ने धरना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को व्यापारियों ने दुकानें बंद कर मंडी परिसर में ही धरना दिया। वो मंडी प्रशासन से आदेश वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
नवीन मंडी में व्यापारियों ने खुद ही अपने व्यापार करने के लिए दुकानों का निर्माण कर लिया था। अब मंडी प्रशासन इन दुकानों को ध्वस्त कराने जा रहा है। इससे व्यापारी आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि आढ़ती कई सालों से इनमें व्यापार कर रहे हैं तो पहले इन्हें ध्वस्त क्यों नहीं कराया गया। मंडी प्रशासन से लागत मूल्य पर दुकान निर्माण कर आवंटन करने की मांग कर रहे हैं। वहीं मंडी प्रशासन उनकी मांग को गलत बता रहा है। शुक्रवार को धरने में आढ़ती उपदेश यादव, बीनू बंसल, अनूप मिश्रा, रामबाबू कुशवाह, आदित्य राजपूत, अनिल कुमार, राघव यादव, भोले बाबा, राजू, ब्रजेश, कमलेश, रघुवीर सिंह, उदयवीर सिंह समेत एक सैकड़ा आढ़ती मौजूद रहे।
ये है नियम
नियमानुसार आढ़तियों को मंडी समिति द्वारा प्रस्ताव पास कर दुकानों का निर्माण कराना होता है। आवंटन के लिए खुली बैठक में बोली प्रक्रिया से नीलामी की जाती है जो व्यापारी सबसे अधिक बोली लगाता है उसे ही दुकान आवंटित की जाती है। औसतन एक दुकान की बोली 15 लाख तक जाती है। मंडी प्रशासन को अवैध निर्माण से करोड़ों का घाटा हो रहा है।
किसानों की बात
चाहे बात अवैध कब्जों की हो या फिर कुछ और लेकिन किसानों की क्या गलती है। प्रशासन को मंडी की हड़ताल को खत्म कराने के आदेश देने चाहिए।
संजीव कुमार, नगला नया
सुबह बिक्री के लिए धान मंडी लाए थे। अब पता चला कि मंडी में तो हड़ताल है। ऐसे में चार घंटे से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन आढ़ती बिक्री के लिए तैयार नहीं हैं।
विनय कुमार, गोकुलपुर
अधिकांश किसान किराया खर्च कर फसल को बेचने के लिए मंडी तक आते हैं। हड़ताल में चलते अब किसानों को अनाज वापस ले जाने के लिए भी किराया देना पड़ेगा।
सुबोध कुमार, नगला दौलत
नवीन मंडी में कोई भी बात होती है तो हड़ताल पहले शुरू हो जाती है। इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। पूर्व में ही अगर जानकारी दी जाए तो किसान परेशान न हों।
संतोष यादव, नगला बरी