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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   National Epilepsy Day 2023 Do not ignore symptoms treatment of epilepsy is possible

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस 2023: इन लक्षणों के न करें नजर अंदाज, मिर्गी का इलाज संभव; इनके चक्कर में भी न पड़ें

Fri, 17 Nov 2023 07:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 17 Nov 2023 07:00 AM IST
सार

National Epilepsy Day 2023: मिर्गी का इलाज यदि समय से किया जाए तो ये बीमारी ठीक हो सकती है। जो लोग झाडफूंक और अंधविश्वास के चलते देरी करते हैं, उनके लिए ये बीमारी गंभीर हो जाती है। 
 

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National Epilepsy Day 2023 Do not ignore symptoms treatment of epilepsy is possible
मिर्गी आने के कारण और इलाज - फोटो : istock

विस्तार

National Epilepsy Day 2023:  मिर्गी रोग लाइलाज नहीं रहा। इसे अंधविश्वास से नहीं, बल्कि इलाज से हराया जा सकता है। यह रोग नशीले पदार्थों के सेवन करने, मस्तिष्क में गहरी चोट लगने, ब्रेन ट्यूमर और मानसिक सदमे से भी हो सकता है। मरीज को झटके आने पर उसे जूता, मोजा सुंघाने से बचें, इससे और नुकसान होता है। इसका इलाज संभव है। समय रहते अगर इलाज शुरू कर दिया जाए तो मरीज ठीक हो सकता है। इस रोग के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है।
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मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल (मस्तिष्क संबंधित समस्या) है। सुहागनगरी के अस्तपालों हर राेज 10 से 12 मरीज इस बीमारी से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टर बीमारी से बचाव के लिए न सिर्फ इलाज कर रहे हैं बल्कि काउंसलिंग कर उनको जागरूक भी कर रहे हैं। अंधविश्वास से दूर रहने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं।
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झटके आने की समस्या हल्के में न लें
मेडिकल कॉलेज की डा. अरुशिखा सिंह ने बताया कि किसी भी इंसान को झटके आने को हल्के में न लें। क्योंकि बार-बार झटका आने से बीमारी गम्भीर हो सकती है। झटके आने के बाद बेहोश हो जाना, मुंह से झाग आने लगना ये मिर्गी के लक्षण हैं। जागरूकता का ही असर है कि लोग अब नीम हकीमों और अंधविश्वास को छोड़ अस्पताल पहुंचने लगे हैं। मिर्गी के लक्षण पाए जाने के बाद इसका तुरंत इलाज शुरू करा देना चाहिए। बार बार झटके आने से बीमारी गंभीर हो जाएगी।

क्या है मिर्गी?
मेडिकल कॉलेज की डा. अरुशिखा सिंह बताया कि मिर्गी में रोगी को बार बार दौरे पड़ने लगते हैं। दौरे के समय मरीज का दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है और वो लड़खड़ा कर गिर जाता है। बेहोश हो जाता है और करीब चार-पांच मिनट तक बेहोश रहता है। इसमें शरीर अकड़ जाता है। ऐसे मरीजों को बाइक चलाने , कुएं, नदी, नहर और आग के पास जाने से बचाना चाहिये।
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दौरा पांच मिनट से ज़्यादा हो तो मरीज़ को ले जाएं अस्पताल
चिकित्सकों के मुताबिक, 90 फीसदी दौरे दो मिनट के होते हैं। दौरा पांच मिनट से ज्यादा का है तो नाक के जरिये दवा दी जाती है। मुंह के जरिए कुछ भी नहीं देना चाहिए। पांच मिनट से ज्यादा के दौरे की स्थिति में मरीज को अस्पताल ले जाना चाहिए। मिर्गी का रोगी महज आधे घंटे में ठीक हो जाता है। इन रोगियों को नौकरी से निकालना या समाज में भेदभाव करना गलत है।

मिर्गी आने पर यह करें
मिर्गी आने पर मरीज को जमीन पर या समतल स्थान पर करवट से लिटा दें या उसकी गर्दन एक ओर मोड़ दें, ताकि मुंह में जमा लार और झाग बाहर निकल जाएं। मरीज के पास से फर्नीचर, तेज, नुकीली, चुभने वाली या धारदार वस्तुएं हटा दें।
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