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हैरतअंगेज करतब दिखाएंगे नागा साधु, आज निकलेगी शोभायात्रा
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सोरों में मार्गशीर्ष मेले में आए साधु दामोदर गिरि।
- फोटो : KASGANJ
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सोरों (कासगंज)। हाथों में चिमटा, तलवार, भाला, त्रिशूल, बाहों में रुद्राक्ष की माला पहले नागा साधुओं की शोभायात्रा मंगलवार को आकर्षण का केंद्र रहेगी। देशभर के साधू-संत कस्बे की सड़कों पर करतब दिखाएंगे। साधु-संतों के साथ पुलिस-प्रशासन ने भी तैयारियां की हैं। सुरक्षा के मद्देनजर शोभायात्रा के साथ पीएसी भी रहेगी।
कस्बे के नागालैंड में इन दिनों रौनक छाई हुई है। पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, सरकार गणपति अखाड़ा बनारस, गणेशगिरीअखाड़ा, जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार, अटल अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अग्रि अखाड़ा, पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, खड़गदर्शन संप्रदाय, वैष्णव चतुर्थ संप्रदाय सहित विभिन्न अखाड़ों के नागा साधू मंगलवार सुबह शोभायात्रा निकालेंगे। उनका रथ भी साथ चलेगा। पैदल चलते साधु त्रिशूल, तलवार, फरसा और वाद्ययंत्र आदि से तरह-तरह के करतब दिखाएंगे।
अखाड़ों का महत्व
देश में 16 अखाड़े बताए गए हैं। जिनमें सभी अखाड़ों का अलग-अलग महत्व है। इनमें प्रमुख कुछ अखाड़े विशेष महत्व रखते हैं।
निरंजनी अखाड़ा: यह अखाड़ा गुजरात के मांडवी में स्थापित हुआ था। इनके ईष्ट देव भगवान शंकर के पुत्र कार्तिक स्वामी हैं। इनमें दिगंबर स्वामी और महामंडलेश्वर होते हैं। इनकी शाखाएं, इलाहाबाद, उज्जैन, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर व उदयपुर में हैं।
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महानिर्वाणी अखाड़ा: इस अखाड़े की स्थापना हरिद्वार में नीलधारा के पास हुई थी। इनके ईष्टदेव कपिल मुनि हैं। इसके अलावा इस अखाड़े से पंचाग्री अखाड़ा, नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा पंचायती बढ़ा अखाड़ा भी इस अखाड़े से ताल्लुक रखते हैं।
जूना अखाड़ा: यह अखाड़ा वर्ष 1945 में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में स्थापित हुआ था। इसे भैरव अखाड़ा भी कहते हैं। इनके इष्टदेव रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं। इनका केंद्र वाराणसी के हनुमान घाट पर भी है। हर साल इस अखाड़े के साधू सोरों की शोभायात्रा की अगुवाई करते हैं।
कर ली हैं तैयारियां
- शोभायात्रा के निर्धारित मार्गों का निरीक्षण कर लिया है। शोभायात्रा के साथ साथ पीएसी के जवान भ्रमण करेंगे। निर्धारित मार्गों पर जाम खुलवाने के लिए पुलिस के जवान तैनात रहेंगे। नागालैंड अखाड़े के महंत सीताराम तिवारी ने बताया कि शोभायात्रा की तैयारियां पूर्ण हैं।
- रिपुदमन सिंह, कोतवाली प्रभारी, सोरों।
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कस्बे के नागालैंड में इन दिनों रौनक छाई हुई है। पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा, सरकार गणपति अखाड़ा बनारस, गणेशगिरीअखाड़ा, जूना अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार, अटल अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, अग्रि अखाड़ा, पंचायती बड़ा उदासीन अखाड़ा, खड़गदर्शन संप्रदाय, वैष्णव चतुर्थ संप्रदाय सहित विभिन्न अखाड़ों के नागा साधू मंगलवार सुबह शोभायात्रा निकालेंगे। उनका रथ भी साथ चलेगा। पैदल चलते साधु त्रिशूल, तलवार, फरसा और वाद्ययंत्र आदि से तरह-तरह के करतब दिखाएंगे।
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अखाड़ों का महत्व
देश में 16 अखाड़े बताए गए हैं। जिनमें सभी अखाड़ों का अलग-अलग महत्व है। इनमें प्रमुख कुछ अखाड़े विशेष महत्व रखते हैं।
निरंजनी अखाड़ा: यह अखाड़ा गुजरात के मांडवी में स्थापित हुआ था। इनके ईष्ट देव भगवान शंकर के पुत्र कार्तिक स्वामी हैं। इनमें दिगंबर स्वामी और महामंडलेश्वर होते हैं। इनकी शाखाएं, इलाहाबाद, उज्जैन, हरिद्वार, त्र्यंबकेश्वर व उदयपुर में हैं।
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महानिर्वाणी अखाड़ा: इस अखाड़े की स्थापना हरिद्वार में नीलधारा के पास हुई थी। इनके ईष्टदेव कपिल मुनि हैं। इसके अलावा इस अखाड़े से पंचाग्री अखाड़ा, नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा पंचायती बढ़ा अखाड़ा भी इस अखाड़े से ताल्लुक रखते हैं।
जूना अखाड़ा: यह अखाड़ा वर्ष 1945 में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में स्थापित हुआ था। इसे भैरव अखाड़ा भी कहते हैं। इनके इष्टदेव रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं। इनका केंद्र वाराणसी के हनुमान घाट पर भी है। हर साल इस अखाड़े के साधू सोरों की शोभायात्रा की अगुवाई करते हैं।
कर ली हैं तैयारियां
- शोभायात्रा के निर्धारित मार्गों का निरीक्षण कर लिया है। शोभायात्रा के साथ साथ पीएसी के जवान भ्रमण करेंगे। निर्धारित मार्गों पर जाम खुलवाने के लिए पुलिस के जवान तैनात रहेंगे। नागालैंड अखाड़े के महंत सीताराम तिवारी ने बताया कि शोभायात्रा की तैयारियां पूर्ण हैं।
- रिपुदमन सिंह, कोतवाली प्रभारी, सोरों।