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‘पुलिस ने किया मुन्नी गर्ग के शव का अपमान’
अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 07 May 2016 02:12 AM IST
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‘पुलिस ने किया मुन्नी गर्ग के शव का अपमान’
- फोटो : Amar Ujala
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पॉश कालोनी गंगेश्वर कैंपस में दिनदहाड़े हत्या और लूट की वारदात से कालोनी वाले गुस्से से भरे बैठे थे। भाजपाई भी तमतमाते हुए पहुंचे थे। व्यापारियों ने भी बाहें चढ़ा रखी थीं। देर से आई पुलिस सबके निशाने पर थी। तभी पुलिसवाले अचानक से घर से मुन्नी गर्ग का शव उठा लाए। न पंचनामा भरा, न शव को सील किया। सीधे जीप में लाकर रख दिया। वो भी सीट पर नहीं, पायदान पर। यह शर्मनाक हरकत विधायक जगन गर्ग के सामने की गई।
पुलिस की इस हरकत न आग में घी डालने का काम किया। लोग भड़क गए। एसएसपी के सामने ही पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। विधायक जगन गर्ग जीप के सामने खड़े हो गए। तब तक न डाग स्क्वैड पहुंचा था और न ही फील्ड यूनिट। पुलिस ने मुन्नी गर्ग के बेटों तक को नहीं बताया कि उनकी मां की लाश इस तरह क्यों ले जा रहे हैं। पुलिस की तैयारी लाश को जीप में रखकर मौके से भागने की थी। दरअसल, अफसरों को आशंका हो गई थी कि गुस्से से भरे लोग शव को रिंग रोड पर रखकर जाम लगा सकते हैं। लेकिन लोगों के गुस्से के आगे पुलिस की चाल चल नहीं पाई। शव को वापस घर में रखा गया। विनय गर्ग ने कहा कि यह शव की बेकदरी है। व्यापारी बोले, पुलिस अफसरों को माफी मांगनी चाहिए, शव जीप में रखने वाले पुलिसकर्मी सस्पेंड किए जाएं। इसके बाद करीब दो घंटे हंगामा चला। व्यापारियों और भाजपाइयों ने रिंग रोड पर जाम लगाने का प्रयास भी किया।
10 बार कॉल, तब उठा कंट्रोल रूम का फोन, पुलिस ने किए उल्टे-सीधे सवाल
मुन्नी गर्ग की हत्या कर घर में लूटपाट की सूचना पुलिस को ठीक पौने चार बजे दी गई। विनय गर्ग के सामने रहने वाले धर्मेंद्र उर्फ बाबी ने कंट्रोल रूम के नंबर 100 पर डायल किया। फोन नहीं उठा। और भी कई लोग 100 नंबर मिलाने लगे। 10 बार काल के बाद फोन उठा। इसके बाद फोन रिसीव करने वाले पुलिसकर्मी ने मौके पर पुलिस भेजने के बजाय उल्टे-सीधे सवाल करने शुरू कर दिए। बॉबी का कहना है कि उससे पूछा गया कि हत्या कैसे की गई है? गला दबाया गया है या चाकू मारा गया है? दम निकल चुका है या सांस चल रही है? और बदमाश घर में कैसे घुसे? यह सुन बॉबी को गुस्सा आ गया। उसने और लोगों को बताया तो वे भी भड़क गए। बता दें, इससे पहले भी कई वारदात में 100 नंबर सेवा धोखा दे चुकी है। यह वही कंट्रोल रूम है जिसे अफसर मार्डर बताते हैं। यहां एसी और कंप्यूटर लगे हैं। इसमें 32 पुलिसकर्मी तैनात हैं।
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डीएम के न आने से भड़का गुस्सा, हंगामे के बाद भी नहीं पहुंचे जिलाधिकारी
व्यापारियों और भाजपाइयों का गुस्सा भड़कने की एक वजह डीएम पंकज कुमार का मौका ए वारदात पर न आना भी रही। मुन्नी गर्ग का परिवार मांग कर रहा था कि डीएम आकर उनकी बात सुनें। उन्होंने ऐलान कर दिया था कि डीएम के आने पर ही शव को उठने देंगे। लोग पुलिस की शिकायत डीएम से करना चाहते थे, लेकिन डीएम नहीं आए। इस पर काफी देर हंगामा किया। व्यापारियों का कहना था कि वे लोग टैक्स देते हैं, इसी के पैसे से अफसरों को सैलरी मिलती है। अगर किसी वारदात के बाद लोग बवाल करें तो डीएम क्या कमिश्नर तक जाते हैं। यहां लोग शांत हैं तो आईजी, डीआईजी, कमिश्नर, डीएम कोई नहीं आया। पीड़ित परिवार का कहना था कि डीएम आकर उनकी शिकायत सुनें। पुलिसकर्मियों ने शव को जबरन उठाकर जो गलती की है, उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए। उनके साथ व्यापारी और भाजपाई काफी देर तक यही कहते रहे लेकिन डीएम नहीं पहुंचे। उनकी ओर से कोई संदेश भी नहीं भिजवाया गया कि वे क्यों नहीं आ पा रहे हैं? हालांकि पुलिस से एसपी सिटी और एससपी के अलावा प्रशासन से एसडीएम पहुंच गए थे।
वारदात में किसी परिचित का हाथ, घर और दुकान के नौकरों से शुरू हुई पूछताछ
गंगेश्वर कालोनी में कारोबारी तीन भाइयों की मां मुन्नी गर्ग की हत्या कर घर में लूट की वारदात में किसी परिचित का हाथ माना जा रहा है। यह शक सिर्फ पुलिस को नहीं, बल्कि मुन्नी गर्ग के परिवार और कालोनी के लोगों का भी है। वजह यह है कि मुन्नी किसी अजबनी के लिए गेट नहीं खोलती थीं। घर में लोहे के एक के बाद एक दो मजबूत गेट हैं। कातिल ने मेन गेट से ही प्रवेश किया है।
विनय गर्ग जब पहुंचे तो गेट खुले पड़े थे। साफ है, कातिल मेन गेट से आए और यहीं से बाहर गए। पुलिस के शक की सुई घूमी है घर और फर्म पर काम करने वाले नौकरों पर। विनय गर्ग के परिवार से जुड़े लोगों ने बताया कि घर में एक ही नौकरानी है। इसके अलावा तीनों भाइयों की दुकानों पर सात आठ नौकर हैं। नौकरानी शुक्रवार को नहीं आई थी।
पुलिस ने रात में सभी को एक -एक कर हरीपर्वत थाना बुलवा लिया। इनसे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा गंगेश्वर कालोनी में तीन घरों में मरम्मत का काम चल रहा है। मजदूरोें के बारे में भी डिटेल तैयार की जा रही है।
कोई सुराग न दे पाई सोनी
डाग स्क्वैड की ट्रैकर डॉग सोनी इस वारदात में कोई सुराग न दे पाई। आठ साल की इसी लैबराडार के सुराग पर कमला नगर की 30 लाख की लूट खुली थी। गंगेश्वर कैंपस में विनय गर्ग के घर पर गंध लेकर वह बाहर की ओर गई। वहां भीड़ जमा थी। इसके बाद वह कहीं नहीं गई। दरअसल, उसे देर से बुलाया गया था। पुलिस को चाहिए था कि सबसे पहले क्राइम सीन को येलो टेप से संरक्षित किया जाए। घर के अंदर किसी को न घुसने दिया जाए। लेकिन डाग स्क्वैड पहुंचने से पहले लोगों के अलावा 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी अंदर जा चुके थे।
कातिलों के अंगुलियों के निशान मिले
फील्ड यूनिट की इंचार्ज गीता ने अपनी टीम के साथ मौका ए वारदात से फिंगर प्रिंट लिए। जिन अलमारियों से कैश और जेवरात लूटे गए, वहां अंगुलियों के निशान मिले। इसके अलावा भी कई जगह के फिंगर प्रिंट मिले हैं। लेकिन इनका फायदा तभी है जब एक तो संदिग्धों के फिंगर प्रिंट लिए जाएं। दूसरा फोरेंसिक लैब में परीक्षण फटाफट हो। 14 नवंबर 2015 को हुए ग्रोवर दंपति हत्याकांड में फिंगर प्रिंट रिपोर्ट अभी तक लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला से नहीं आई है। मौके से मिले फिंगर प्रिंट का संदिग्धों के साथ मिलान कराने के लिए भेजा गया था।
दिल्ली में रहती हैं विनय की पत्नी
विनय गर्ग की पत्नी छह महीने से दिल्ली में बेटी के साथ रहती हैं। बेटी आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग कर रही है। उन्हें फोन से सूचना दी गई। उनके आने पर ही पता चलेगा कि बदमाश क्या-क्या सामान लूटकर ले गए है। घर में पुश्तैनी गहने भी रखे थे।
‘वसूली का अड्डा है पुलिस चौकी’, व्यापारियों ने चंदा कर बनवाई थी रिंग रोड पुलिस चौकी
रिंग रोड पर सराफा कारोबारी रिंकू बंसल के साथ 1.65 करोड़ के सोने की लूट के बाद व्यापारियों ने चौकी खोले जाने की मांग उठाई। इसके बाद खुद चंदा कर चौकी का शानदार भवन बनवाया। इसमें विनय गर्ग ने भी चंदा दिया था। लेकिन इसका कुछ फायदा नहीं हुआ। पुलिस चौकी पर दिन भर ताला लटका रहता है। शुक्रवार को हुई वारदात के समय भी यही दृश्य था। रात को व्यापारियों के घर लौटने के समय पुलिस चेकिंग करने लगती है। व्यापारियों ने एसएसपी को बताया कि चौकी पर वसूली के सिवाय कोई दूसरा काम नहीं हो रहा है। रात को व्यापारी घर लौटते हैं तो पुलिस उन्हें रोक लेती है। हेलमेट, सीट बेल्ट के चालान रात में काटे जाते हैं। इस बहाने व्यापारियों को रोककर रखा जाता है। यहां चेन स्नेचिंग की कई वारदात हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस सक्रिय नहीं हुई। इस पर एसएसपी ने भरोसा दिया कि वे जांच कराएंगे। अगर पुलिस की लापरवाही मिली तो एक्शन लिया जाएगा।
हमारे साथ इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। बदमाशों ने हमारी दुनिया उजाड़ दी है। पुलिस जल्द से जल्द मेरी मां के हत्यारों को गिरफ्तार करे - विनय गर्ग ( मुन्नी गर्ग के बेटे )
सपा की सरकार में अपराध चरम है। व्यापारियों के साथ सबसे ज्यादा वारदात हो रही हैं। पुलिस ने मेरे सामने ही शव को उठाकर जबरन जीप में रखा - जगन गर्ग ( विधायक )
गेटबंद कालोनी में दिन दहाड़े इतनी संगीन वारदात पुलिस के लिए चुनौती है, अपराध इस समय चरम पर है, पुलिस कुछ कर नहीं रही - विजय शिवहरे ( भाजपा शहर अध्यक्ष)
पांच टीमें बनाई
एसएसपी ने बताया कि खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच की तीन, एक हरीपर्वत और एक न्यू आगरा की टीम लगाई गई है। पांचों टीम एसपी सिटी सुशील घुले की निगरानी में काम करेंगी। पांच संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है।
चौकी पर गिरेगी गाज
एसएसपी ने एसपी सिटी और सीओ छत्ता से रिंग रोड पुलिस चौकी के स्टाफ के बारे में रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा शव को जबरन ले जाने के आरोप पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
पॉश कालोनियों में भी सुरक्षित नहीं जिंदगी
पॉश कालोनियों में सर्किल रेट भले ही 40 से 50 हजार वर्ग मीटर तक हो, लेकिन जिंदगी इनमें भी महफूज नहीं। एक के बाद एक हो रही घटनाएं बता रही हैं कि खतरा हर जगह है। ऐसी घटनाओं से सबसे ज्यादा टेंशन उन सीनियर सिटीजन को होती है, जो घर में अकेले रहते हैं। शहर में लगभग एक लाख सीनियर सिटीजन हैं। इनमें 40 हजार दंपति है।
एक लाख में 15 हजार हाईप्रोफाइल परिवारों से हैं। मुन्नी गर्ग घर में अकेली थीं। उनकी हत्या कर दी गई। ऐसे ही 15 नवंबर 2015 को खंदारी में कारोबारी अवनीश ग्रोवर (69) और उनकी पत्नी ऊषा ग्रोवर (65) की हत्या कर दी गई थी। दोनों के सिवाय उस समय घर में कोई नहीं था। यह केस आज तक खुला भी नहीं है। न्यू आगरा में पिछले साल इंद्रपुरी में बीएसएफ के 77 वर्षीय रिटायर्ड डीआईजी अब्दुल कादिर को घर के अंदर मार दिया गया था। वे अकेले रहते थे। 12 मई 2014 को दयालबाग के टैगोर नगर में दिनदहाड़े बदमाशों ने घर में अकेली वृद्धा की गला दबाकर हत्या की और घर से जेवरात और नकदी लूट ले गए थे। तमाम घटनाएं पाश कालोनियों में हुई है।
कालोनी में एक भी कैमरा नहीं
जिस गंगेश्वर कालोनी में वारदात हुई, वह गेटबंद है, लेकिन दिन में चौकीदार नहीं रहता। पूरी कालोनी में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं मिला। 30 साल पहले बनी कालोनी के दो गेट हैं, दोनों पर चौकीदार रात में रहता है। कुल 12 कोठियां हैं, और सात फैक्ट्री।
सीनियर सिटीजन का ध्यान रखे पुलिस
घटना के बाद हुई क्राइम मीटिंग में एसएसपी ने सभी थानेदारों से कहा कि वे अपने अपने क्षेत्र में सीनियर सिटीजन की लिस्ट बनाएं। इनका ध्यान रखा जाए। गश्त के दौरान यह चेक किया जाए कि घरों में अकेले रहने वाले सीनियर सिटीजन को कोई खतरा तो नहीं है।
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पुलिस की इस हरकत न आग में घी डालने का काम किया। लोग भड़क गए। एसएसपी के सामने ही पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे। विधायक जगन गर्ग जीप के सामने खड़े हो गए। तब तक न डाग स्क्वैड पहुंचा था और न ही फील्ड यूनिट। पुलिस ने मुन्नी गर्ग के बेटों तक को नहीं बताया कि उनकी मां की लाश इस तरह क्यों ले जा रहे हैं। पुलिस की तैयारी लाश को जीप में रखकर मौके से भागने की थी। दरअसल, अफसरों को आशंका हो गई थी कि गुस्से से भरे लोग शव को रिंग रोड पर रखकर जाम लगा सकते हैं। लेकिन लोगों के गुस्से के आगे पुलिस की चाल चल नहीं पाई। शव को वापस घर में रखा गया। विनय गर्ग ने कहा कि यह शव की बेकदरी है। व्यापारी बोले, पुलिस अफसरों को माफी मांगनी चाहिए, शव जीप में रखने वाले पुलिसकर्मी सस्पेंड किए जाएं। इसके बाद करीब दो घंटे हंगामा चला। व्यापारियों और भाजपाइयों ने रिंग रोड पर जाम लगाने का प्रयास भी किया।
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10 बार कॉल, तब उठा कंट्रोल रूम का फोन, पुलिस ने किए उल्टे-सीधे सवाल
मुन्नी गर्ग की हत्या कर घर में लूटपाट की सूचना पुलिस को ठीक पौने चार बजे दी गई। विनय गर्ग के सामने रहने वाले धर्मेंद्र उर्फ बाबी ने कंट्रोल रूम के नंबर 100 पर डायल किया। फोन नहीं उठा। और भी कई लोग 100 नंबर मिलाने लगे। 10 बार काल के बाद फोन उठा। इसके बाद फोन रिसीव करने वाले पुलिसकर्मी ने मौके पर पुलिस भेजने के बजाय उल्टे-सीधे सवाल करने शुरू कर दिए। बॉबी का कहना है कि उससे पूछा गया कि हत्या कैसे की गई है? गला दबाया गया है या चाकू मारा गया है? दम निकल चुका है या सांस चल रही है? और बदमाश घर में कैसे घुसे? यह सुन बॉबी को गुस्सा आ गया। उसने और लोगों को बताया तो वे भी भड़क गए। बता दें, इससे पहले भी कई वारदात में 100 नंबर सेवा धोखा दे चुकी है। यह वही कंट्रोल रूम है जिसे अफसर मार्डर बताते हैं। यहां एसी और कंप्यूटर लगे हैं। इसमें 32 पुलिसकर्मी तैनात हैं।
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डीएम के न आने से भड़का गुस्सा, हंगामे के बाद भी नहीं पहुंचे जिलाधिकारी
व्यापारियों और भाजपाइयों का गुस्सा भड़कने की एक वजह डीएम पंकज कुमार का मौका ए वारदात पर न आना भी रही। मुन्नी गर्ग का परिवार मांग कर रहा था कि डीएम आकर उनकी बात सुनें। उन्होंने ऐलान कर दिया था कि डीएम के आने पर ही शव को उठने देंगे। लोग पुलिस की शिकायत डीएम से करना चाहते थे, लेकिन डीएम नहीं आए। इस पर काफी देर हंगामा किया। व्यापारियों का कहना था कि वे लोग टैक्स देते हैं, इसी के पैसे से अफसरों को सैलरी मिलती है। अगर किसी वारदात के बाद लोग बवाल करें तो डीएम क्या कमिश्नर तक जाते हैं। यहां लोग शांत हैं तो आईजी, डीआईजी, कमिश्नर, डीएम कोई नहीं आया। पीड़ित परिवार का कहना था कि डीएम आकर उनकी शिकायत सुनें। पुलिसकर्मियों ने शव को जबरन उठाकर जो गलती की है, उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए। उनके साथ व्यापारी और भाजपाई काफी देर तक यही कहते रहे लेकिन डीएम नहीं पहुंचे। उनकी ओर से कोई संदेश भी नहीं भिजवाया गया कि वे क्यों नहीं आ पा रहे हैं? हालांकि पुलिस से एसपी सिटी और एससपी के अलावा प्रशासन से एसडीएम पहुंच गए थे।
वारदात में किसी परिचित का हाथ, घर और दुकान के नौकरों से शुरू हुई पूछताछ
गंगेश्वर कालोनी में कारोबारी तीन भाइयों की मां मुन्नी गर्ग की हत्या कर घर में लूट की वारदात में किसी परिचित का हाथ माना जा रहा है। यह शक सिर्फ पुलिस को नहीं, बल्कि मुन्नी गर्ग के परिवार और कालोनी के लोगों का भी है। वजह यह है कि मुन्नी किसी अजबनी के लिए गेट नहीं खोलती थीं। घर में लोहे के एक के बाद एक दो मजबूत गेट हैं। कातिल ने मेन गेट से ही प्रवेश किया है।
विनय गर्ग जब पहुंचे तो गेट खुले पड़े थे। साफ है, कातिल मेन गेट से आए और यहीं से बाहर गए। पुलिस के शक की सुई घूमी है घर और फर्म पर काम करने वाले नौकरों पर। विनय गर्ग के परिवार से जुड़े लोगों ने बताया कि घर में एक ही नौकरानी है। इसके अलावा तीनों भाइयों की दुकानों पर सात आठ नौकर हैं। नौकरानी शुक्रवार को नहीं आई थी।
पुलिस ने रात में सभी को एक -एक कर हरीपर्वत थाना बुलवा लिया। इनसे पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा गंगेश्वर कालोनी में तीन घरों में मरम्मत का काम चल रहा है। मजदूरोें के बारे में भी डिटेल तैयार की जा रही है।
कोई सुराग न दे पाई सोनी
डाग स्क्वैड की ट्रैकर डॉग सोनी इस वारदात में कोई सुराग न दे पाई। आठ साल की इसी लैबराडार के सुराग पर कमला नगर की 30 लाख की लूट खुली थी। गंगेश्वर कैंपस में विनय गर्ग के घर पर गंध लेकर वह बाहर की ओर गई। वहां भीड़ जमा थी। इसके बाद वह कहीं नहीं गई। दरअसल, उसे देर से बुलाया गया था। पुलिस को चाहिए था कि सबसे पहले क्राइम सीन को येलो टेप से संरक्षित किया जाए। घर के अंदर किसी को न घुसने दिया जाए। लेकिन डाग स्क्वैड पहुंचने से पहले लोगों के अलावा 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी अंदर जा चुके थे।
कातिलों के अंगुलियों के निशान मिले
फील्ड यूनिट की इंचार्ज गीता ने अपनी टीम के साथ मौका ए वारदात से फिंगर प्रिंट लिए। जिन अलमारियों से कैश और जेवरात लूटे गए, वहां अंगुलियों के निशान मिले। इसके अलावा भी कई जगह के फिंगर प्रिंट मिले हैं। लेकिन इनका फायदा तभी है जब एक तो संदिग्धों के फिंगर प्रिंट लिए जाएं। दूसरा फोरेंसिक लैब में परीक्षण फटाफट हो। 14 नवंबर 2015 को हुए ग्रोवर दंपति हत्याकांड में फिंगर प्रिंट रिपोर्ट अभी तक लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला से नहीं आई है। मौके से मिले फिंगर प्रिंट का संदिग्धों के साथ मिलान कराने के लिए भेजा गया था।
दिल्ली में रहती हैं विनय की पत्नी
विनय गर्ग की पत्नी छह महीने से दिल्ली में बेटी के साथ रहती हैं। बेटी आईआईटी प्रवेश परीक्षा के लिए कोचिंग कर रही है। उन्हें फोन से सूचना दी गई। उनके आने पर ही पता चलेगा कि बदमाश क्या-क्या सामान लूटकर ले गए है। घर में पुश्तैनी गहने भी रखे थे।
‘वसूली का अड्डा है पुलिस चौकी’, व्यापारियों ने चंदा कर बनवाई थी रिंग रोड पुलिस चौकी
रिंग रोड पर सराफा कारोबारी रिंकू बंसल के साथ 1.65 करोड़ के सोने की लूट के बाद व्यापारियों ने चौकी खोले जाने की मांग उठाई। इसके बाद खुद चंदा कर चौकी का शानदार भवन बनवाया। इसमें विनय गर्ग ने भी चंदा दिया था। लेकिन इसका कुछ फायदा नहीं हुआ। पुलिस चौकी पर दिन भर ताला लटका रहता है। शुक्रवार को हुई वारदात के समय भी यही दृश्य था। रात को व्यापारियों के घर लौटने के समय पुलिस चेकिंग करने लगती है। व्यापारियों ने एसएसपी को बताया कि चौकी पर वसूली के सिवाय कोई दूसरा काम नहीं हो रहा है। रात को व्यापारी घर लौटते हैं तो पुलिस उन्हें रोक लेती है। हेलमेट, सीट बेल्ट के चालान रात में काटे जाते हैं। इस बहाने व्यापारियों को रोककर रखा जाता है। यहां चेन स्नेचिंग की कई वारदात हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस सक्रिय नहीं हुई। इस पर एसएसपी ने भरोसा दिया कि वे जांच कराएंगे। अगर पुलिस की लापरवाही मिली तो एक्शन लिया जाएगा।
हमारे साथ इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। बदमाशों ने हमारी दुनिया उजाड़ दी है। पुलिस जल्द से जल्द मेरी मां के हत्यारों को गिरफ्तार करे - विनय गर्ग ( मुन्नी गर्ग के बेटे )
सपा की सरकार में अपराध चरम है। व्यापारियों के साथ सबसे ज्यादा वारदात हो रही हैं। पुलिस ने मेरे सामने ही शव को उठाकर जबरन जीप में रखा - जगन गर्ग ( विधायक )
गेटबंद कालोनी में दिन दहाड़े इतनी संगीन वारदात पुलिस के लिए चुनौती है, अपराध इस समय चरम पर है, पुलिस कुछ कर नहीं रही - विजय शिवहरे ( भाजपा शहर अध्यक्ष)
पांच टीमें बनाई
एसएसपी ने बताया कि खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच की तीन, एक हरीपर्वत और एक न्यू आगरा की टीम लगाई गई है। पांचों टीम एसपी सिटी सुशील घुले की निगरानी में काम करेंगी। पांच संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है।
चौकी पर गिरेगी गाज
एसएसपी ने एसपी सिटी और सीओ छत्ता से रिंग रोड पुलिस चौकी के स्टाफ के बारे में रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा शव को जबरन ले जाने के आरोप पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
पॉश कालोनियों में भी सुरक्षित नहीं जिंदगी
पॉश कालोनियों में सर्किल रेट भले ही 40 से 50 हजार वर्ग मीटर तक हो, लेकिन जिंदगी इनमें भी महफूज नहीं। एक के बाद एक हो रही घटनाएं बता रही हैं कि खतरा हर जगह है। ऐसी घटनाओं से सबसे ज्यादा टेंशन उन सीनियर सिटीजन को होती है, जो घर में अकेले रहते हैं। शहर में लगभग एक लाख सीनियर सिटीजन हैं। इनमें 40 हजार दंपति है।
एक लाख में 15 हजार हाईप्रोफाइल परिवारों से हैं। मुन्नी गर्ग घर में अकेली थीं। उनकी हत्या कर दी गई। ऐसे ही 15 नवंबर 2015 को खंदारी में कारोबारी अवनीश ग्रोवर (69) और उनकी पत्नी ऊषा ग्रोवर (65) की हत्या कर दी गई थी। दोनों के सिवाय उस समय घर में कोई नहीं था। यह केस आज तक खुला भी नहीं है। न्यू आगरा में पिछले साल इंद्रपुरी में बीएसएफ के 77 वर्षीय रिटायर्ड डीआईजी अब्दुल कादिर को घर के अंदर मार दिया गया था। वे अकेले रहते थे। 12 मई 2014 को दयालबाग के टैगोर नगर में दिनदहाड़े बदमाशों ने घर में अकेली वृद्धा की गला दबाकर हत्या की और घर से जेवरात और नकदी लूट ले गए थे। तमाम घटनाएं पाश कालोनियों में हुई है।
कालोनी में एक भी कैमरा नहीं
जिस गंगेश्वर कालोनी में वारदात हुई, वह गेटबंद है, लेकिन दिन में चौकीदार नहीं रहता। पूरी कालोनी में एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं मिला। 30 साल पहले बनी कालोनी के दो गेट हैं, दोनों पर चौकीदार रात में रहता है। कुल 12 कोठियां हैं, और सात फैक्ट्री।
सीनियर सिटीजन का ध्यान रखे पुलिस
घटना के बाद हुई क्राइम मीटिंग में एसएसपी ने सभी थानेदारों से कहा कि वे अपने अपने क्षेत्र में सीनियर सिटीजन की लिस्ट बनाएं। इनका ध्यान रखा जाए। गश्त के दौरान यह चेक किया जाए कि घरों में अकेले रहने वाले सीनियर सिटीजन को कोई खतरा तो नहीं है।