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मुहर्रम 2021: आगरा में ऐतिहासिक फूलों के ताजिये की जगह चौकी पर जियारत, चलता रहा मजलिसों का दौर
Fri, 20 Aug 2021 10:44 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 20 Aug 2021 10:44 AM IST
सार
कोरोना संक्रमण के कारण इस बार भी ताजियेदारी कम स्थानों पर ही की गई है। मोहर्रम के जुलूस दसवीं पर निकाले जाने थे, लेकिन इस बार ज्यादातर वही ताजिये रखे गए हैं, जिन्हें दफनाया नहीं जाता है। कुछेक स्थानों पर मोहर्रम की सातवीं को ताजिये रखे गए हैं, जिन्हें कोविड प्रोटोकॉल के तहत दफनाया जाएगा।
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मुहर्रम 2021: आगरा के शाहगंज में रखा धातु का ताजिया
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मोहर्रम की नौवीं तारीख पर गुरुवार को पाय चौकी स्थित 322 साल पुराना फूलों के ताजिया नहीं रखा गया। इस ताजिये को रखने की चौकी की ही जियारत की गई और फातिहा ख्वानी हुई। सुबह से शाम तक जायरीन के आने का सिलसिला चलता रहा। वहीं बेगम ड्यौढ़ी, पाय चौकी में घरों में भी ताजिये सजाए गए।
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कोरोना संक्रमण के कारण इस बार भी ताजियेदारी कम स्थानों पर ही की गई है। मोहर्रम के जुलूस दसवीं पर निकाले जाने थे, लेकिन इस बार ज्यादातर वही ताजिये रखे गए हैं, जिन्हें दफनाया नहीं जाता है। कुछेक स्थानों पर मोहर्रम की सातवीं को ताजिये रखे गए हैं, जिन्हें कोविड प्रोटोकॉल के तहत दफनाया जाएगा।
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अबुल उलाई शेख कमेटी के सूफी बुंदन मियां ने बताया कि बेगम ड्योढ़ी में हजरत इमाम हुसैन का रोजा लगाया गया है। इसकी जियारत करने लोग पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर, शिया इमामबाड़ों में नौवीं को मजलिसों का दौर चलता रहा। मुस्लिम विद्वानों ने कर्बला की जंग का जिक्र किया और हजरत इमाम हुसैन को याद किया।
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सन 47 के बाद रखी गई ऐतिहासिक स्थल पर चौकी
ऐतिहासिक फूलों के ताजिये के चौधरी हाजी सरफराज खान ने बताया कि वर्ष 1947 के बाद दूसरी बार फूलों के ताजिये के जगह चौकी रखी गई है। ताजियेदारों की दसवीं पीढ़ी के चौधरी सरफराज ने बताया कि उनके बुजुर्गों ने बताया कि 1947 में बंटवारे के बाद देश में हालात अच्छे नहीं थे, तब पहली बार यहां ताजिया नहीं रखा गया था, इसकी जगह चौकी रखी गई थी। पिछले साल कोरोना संक्रमण के दौरान न चौकी रखी गई और न ही ताजिया ही रखा गया था। इस बार चौकी रखी गई है।