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कोरोना का ग्रहण: संक्रमण के चलते निरस्त हुआ विश्व प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिमा मेला, डीएम ने दिए आदेश
Fri, 09 Jul 2021 12:07 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 09 Jul 2021 12:07 AM IST
सार
डीएम ने बताया कि चूंकि इस समय प्रदेश सरकार की कोरोना गाइड लाइन के हिसाब से ही बाजार व अन्य जगह खोली गई हैं, जिनमें एक स्थान पर 50 लोगों से अधिक लोग एकत्र नहीं हो सकते। ऐसे में लाखों लोगों से गाइड लाइन का पालन कराना संभव नहीं है। इसलिए मुड़िया पूर्णिमा मेले को लोक स्वास्थ्य व जनहित में निरस्त किया जाता है।
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मथुरा: गोवर्धन में परिक्रमा के लिए आए श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोवर्धन का विश्व प्रसिद्ध मुड़िया पूर्णिया मेला निरस्त कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण के चलते जिलाधिकारी नवनीत सिंह ने देर रात आदेश जारी कर दिए। डीएम द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट पर यह फैसला लिया गया। डीएम ने बताया कि राजकीय मुड़िया पूर्णिमा मेला गोवर्धन में आषाढ़ माह की एकादशी पर लगता है। जिसमें देश विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इस बार यह यह मेला 20 से 24 जुलाई तक लगना था। चूंकि वर्तमान में कोरोना महामारी का प्रकोप है।
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महामारी अधिनियम के प्रावधान वर्तमान समय में लागू हैं। मेला लगे या नहीं, इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक गोवर्धन, सीओ गोवर्धन, एसडीएम गोवर्धन व एडीएम प्रशासन की संयुक्त समिति गठित की गई थी। समिति ने दानघाटी, मानसी गंगा, मुखारबिंद व जतीपुरा के सेवायतों, संत-धर्माचायों से वार्ता की गई। सभी ने मेला निरस्त किए जाने का अनुरोध किया। समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
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डीएम ने बताया कि चूंकि इस समय प्रदेश सरकार की कोरोना गाइड लाइन के हिसाब से ही बाजार व अन्य जगह खोली गई हैं, जिनमें एक स्थान पर 50 लोगों से अधिक लोग एकत्र नहीं हो सकते। ऐसे में लाखों लोगों से गाइड लाइन का पालन करना संभव नहीं है। इसलिए मुड़िया पूर्णिमा मेला को लोक स्वास्थ्य व जनहित में निरस्त किया जाता है।
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परिक्रमा में नहीं होगी भीड़, 463 वर्ष पुरानी है परंपरा
आगामी 24 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा यानी मुड़िया पूर्णिमा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सनातन गोस्वामी का आविर्भाव वर्ष 1488 में पश्चिम बंगाल के रामकेली गांव, जिला मालदा के भारद्वाज गोत्रीय यजुर्वेदीय कर्णाट विप्र परिवार में हुआ था। वे पश्चिम बंगाल के राजा हुसैन शाह के यहां मंत्री थे। चैतन्य महाप्रभु की भक्ति से प्रभावित होकर सनातन गोस्वामी उनसे मिलने बनारस आ गए।
उनकी प्रेरणा से ब्रजवास कर भगवान कृष्ण की भक्ति करने लगे। मुड़िया संतों के अनुसार 1558 में सनातन गोस्वामी के गोलोक गमन हो जाने के बाद गौड़ीय संत एवं ब्रजजनों ने सिर मुंडवा कर उनके पार्थिव शरीर के साथ सात कोसीय गिरिराज परिक्रमा लगाई। तभी से गुरु पूर्णिमा को मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाने लगा। आज भी सनातन गोस्वामी के तिरोभाव महोत्सव पर गौड़ीय संत एवं भक्त सिर मुड़वा कर मानसी गंगा की परिक्रमा कर परंपरा का निर्वहन करते हैं।
24 जुलाई को सनातन गोस्वामी के अनुयाई संत श्रीराधा श्याम सुंदर मंदिर चकलेश्वर गोवर्धन से 463वीं बार मुड़िया शोभा यात्रा भजन संकीर्तन के साथ निकालेंगे। मुड़िया पूर्णिमा के दिन 21 किमी परिक्रमा मार्ग में पांच दिनों तक अटूट मानव श्रृंखला मिनी विश्व का नजारा पेश करती आई है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण मेला नहीं लगेगा। इस वर्ष 463वां मुड़िया महोत्सव मनाया जाएगा। अनुयायी मुड़िया संत रामकिशन दास ने बताया कि इस बार कोरोना के चलते प्रमुख संत मंदिर में एकत्र होकर सिर मुड़वाएंगे, उसके बाद मानसी गंगा में स्नान कर सनातन गोस्वामी के चित्र के साथ हरिनाम संकीर्तन करते हुए मानसीगंगा की परिक्रमा लगाएंगे।
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आगामी 24 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा यानी मुड़िया पूर्णिमा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सनातन गोस्वामी का आविर्भाव वर्ष 1488 में पश्चिम बंगाल के रामकेली गांव, जिला मालदा के भारद्वाज गोत्रीय यजुर्वेदीय कर्णाट विप्र परिवार में हुआ था। वे पश्चिम बंगाल के राजा हुसैन शाह के यहां मंत्री थे। चैतन्य महाप्रभु की भक्ति से प्रभावित होकर सनातन गोस्वामी उनसे मिलने बनारस आ गए।
उनकी प्रेरणा से ब्रजवास कर भगवान कृष्ण की भक्ति करने लगे। मुड़िया संतों के अनुसार 1558 में सनातन गोस्वामी के गोलोक गमन हो जाने के बाद गौड़ीय संत एवं ब्रजजनों ने सिर मुंडवा कर उनके पार्थिव शरीर के साथ सात कोसीय गिरिराज परिक्रमा लगाई। तभी से गुरु पूर्णिमा को मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाने लगा। आज भी सनातन गोस्वामी के तिरोभाव महोत्सव पर गौड़ीय संत एवं भक्त सिर मुड़वा कर मानसी गंगा की परिक्रमा कर परंपरा का निर्वहन करते हैं।
24 जुलाई को सनातन गोस्वामी के अनुयाई संत श्रीराधा श्याम सुंदर मंदिर चकलेश्वर गोवर्धन से 463वीं बार मुड़िया शोभा यात्रा भजन संकीर्तन के साथ निकालेंगे। मुड़िया पूर्णिमा के दिन 21 किमी परिक्रमा मार्ग में पांच दिनों तक अटूट मानव श्रृंखला मिनी विश्व का नजारा पेश करती आई है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण मेला नहीं लगेगा। इस वर्ष 463वां मुड़िया महोत्सव मनाया जाएगा। अनुयायी मुड़िया संत रामकिशन दास ने बताया कि इस बार कोरोना के चलते प्रमुख संत मंदिर में एकत्र होकर सिर मुड़वाएंगे, उसके बाद मानसी गंगा में स्नान कर सनातन गोस्वामी के चित्र के साथ हरिनाम संकीर्तन करते हुए मानसीगंगा की परिक्रमा लगाएंगे।
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