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मां की ममता: आग की लपटों में घिरे 'कलेजे के टुकड़े' तो जान जोखिम में डालकर दो बेटों की जान बचाई
Wed, 29 Jan 2020 02:32 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 29 Jan 2020 02:32 PM IST
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आग से बच्चों को बचाने की वाली महिला
- फोटो : अमर उजाला
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बाह क्षेत्र के चौरंगाहार गांव में सोमवार की रात लपटों से घिरे घर में फंसी महिला ने अपनी जान जोखिम में डालकर दो बेटों की जान बचाई। बाहर निकालते समय दोनों बच्चे मामूली रूप से झुलस गए। वहीं आग से दो गायें जल मरीं। घर का सारा सामान भी राख हो गया। चीख-पुकार और लपटें देख जुटे गांववालों ने आग बुझाई।
चौरंगाहार के मोहर सिंह पुत्र गोविंद सिंह अपने खेत पर ईटों की चाहर दीवारी पर झोपड़ी डालकर परिवार समेत रहता है। सोमवार की रात मोहर सिंह की पत्नी गीता अपने दो बेटों किशन (4) और डालचंद्र (2) के साथ सो रही थी। मां सुनैना बाहर सोई थी। रात झोपड़ी में अचानक आग लग गई।
आग की लपटों में फंसी उनकी दो गाय जल मरीं। वहीं झोपडी के अंदर सो रही गीता लपटें देख घबरा गई। उसने अपनी जान जोखिम में डालकर दोनों बेटों को उठाया। गेट में लात मारी और बाहर निकल भागी। इस दौरान उसने दोनों बेटे हल्के से झुलस गए।
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चीख पुकार पर आस पास मौजूद किसान पहुंचे और आग पर काबू पाया। तब तक घर के अंदर रखा सारा सामान, कपड़े, अनाज, बर्तन आदि जल चुके थे। मौके पर पहुंचे राजस्व निरीक्षक राम किशन ने नुकसान का आकलन किया। वहीं लोग गीता की हिम्मत की दाद देते रहे।
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चौरंगाहार के मोहर सिंह पुत्र गोविंद सिंह अपने खेत पर ईटों की चाहर दीवारी पर झोपड़ी डालकर परिवार समेत रहता है। सोमवार की रात मोहर सिंह की पत्नी गीता अपने दो बेटों किशन (4) और डालचंद्र (2) के साथ सो रही थी। मां सुनैना बाहर सोई थी। रात झोपड़ी में अचानक आग लग गई।
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आग की लपटों में फंसी उनकी दो गाय जल मरीं। वहीं झोपडी के अंदर सो रही गीता लपटें देख घबरा गई। उसने अपनी जान जोखिम में डालकर दोनों बेटों को उठाया। गेट में लात मारी और बाहर निकल भागी। इस दौरान उसने दोनों बेटे हल्के से झुलस गए।
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चीख पुकार पर आस पास मौजूद किसान पहुंचे और आग पर काबू पाया। तब तक घर के अंदर रखा सारा सामान, कपड़े, अनाज, बर्तन आदि जल चुके थे। मौके पर पहुंचे राजस्व निरीक्षक राम किशन ने नुकसान का आकलन किया। वहीं लोग गीता की हिम्मत की दाद देते रहे।