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किडनी देकर भी नहीं बचा सकी अपने जिगर के टुकड़े की जान, पढ़ें एक मां की दर्दभरी कहानी
Fri, 10 Apr 2020 12:07 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नौहझील (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नौहझील (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 10 Apr 2020 12:07 AM IST
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बेटे अनिल के साथ मां बीना देवी
- फोटो : अमर उजाला
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मां तो आखिर मां होती है। उसकी जगह कोई नहीं ले सकता है। अपने जिगर के टुकड़े को बचाने की खातिर वो मौत से भी लड़ जाती है। मथुरा जिले में एक मां जिंदगी की इस जद्दोजहद में किडनी देकर भी अपने लाडले की जान नहीं बचा सकी। ऐसी मां की ममता का किस्सा नौहझील के गांव बरौठ का है।
गांव बरौठ निवासी बीना देवी के पुत्र अनिल चौधरी (27) का बुधवार को निधन हो गया। वर्ष 2013 में अनिल की दोनों किडनी खराब हो गई थीं। इससे वो कमजोर होता जा रहा था। डॉक्टरों ने कहा कि जल्दी ही अनिल की किडनी का ट्रांसप्लांट नहीं किया गया तो उसके लिए बहुत मुश्किल हो सकती है।
वर्ष 2014 में परिवार वालों ने किसी तरह रुपयों का इंतजाम किया। अनिल की मां बीना देवी ने एक किडनी देकर अपने जिगर के टुकड़े की जान बचाई। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद अनिल ठीक रहने लगा।
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गांव बरौठ निवासी बीना देवी के पुत्र अनिल चौधरी (27) का बुधवार को निधन हो गया। वर्ष 2013 में अनिल की दोनों किडनी खराब हो गई थीं। इससे वो कमजोर होता जा रहा था। डॉक्टरों ने कहा कि जल्दी ही अनिल की किडनी का ट्रांसप्लांट नहीं किया गया तो उसके लिए बहुत मुश्किल हो सकती है।
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वर्ष 2014 में परिवार वालों ने किसी तरह रुपयों का इंतजाम किया। अनिल की मां बीना देवी ने एक किडनी देकर अपने जिगर के टुकड़े की जान बचाई। किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद अनिल ठीक रहने लगा।
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किडनी ट्रांसप्लांट के पांच वर्ष बाद अनिल की तबियत फिर से बिगड़ने लगी। बुधवार को अनिल की मौत हो गई। अनिल की मौत के बाद बरौठ एवं आसपास के गांवों में शोक का माहौल है। बेटे की मौत से मां को रो-रोकर बुरा हाल है।
हनुमानजी का भक्त था अनिल
अनिल हनुमान जी का भक्त था। प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को वो सिद्ध स्थली श्री झाड़ी वाले हनुमान जी के दर्शन करने जाता था। बुधवार को हनुमान जयंती को उसका निधन हुआ है, जो गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।
हनुमानजी का भक्त था अनिल
अनिल हनुमान जी का भक्त था। प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को वो सिद्ध स्थली श्री झाड़ी वाले हनुमान जी के दर्शन करने जाता था। बुधवार को हनुमान जयंती को उसका निधन हुआ है, जो गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है।