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लौटाने को दस लाख, दवा के लिए फूटी कौड़ी नहीं
अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 30 Mar 2016 01:05 AM IST
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कैंसर मरीज
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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अजब हाल, गरीब मरीजों की कतार है। एसएन मेडिकल कालेज के कोष में इनके लिए दस लाख रुपये भी हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित कई मरीज खुद को गरीब साबित नहीं कर पाए तो तमाम को कालेज ने 25 मार्च से दवा देना बंद कर दिया। कहा जा रहा, बजट नहीं है। हकीकत कुछ और है।
कैंसर और किडनी फेल जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीब मरीजों के इलाज-दवा के लिए सरकार ने एसएन मेडिकल कालेज को 50 लाख रुपये दिए थे। बीपीएल कार्डधारक, साढ़े तीन एकड़ जोत से कम वाले योजना के पात्र हैं। हालांकि रेडियोथेरेपी विभाग (जिसे मरीज कैंसर विभाग कहते हैं) ने इसी बजट से करीब 290 मरीजों पर 37 लाख रुपये खर्च भी किए। लेकिन मरीज लौटाए भी जाते रहे और करीब 13 लाख रुपये बच गए। वित्त वर्ष के अंतिम हफ्ते में तो पंजीकृत मरीजों को दवा भी देना बंद कर दिया गया। असाध्य रोग बजट प्रभारी डा. एससी जैन ने बताया कि तय गाइडलाइन के मुताबिक ही मरीजों को योजना का लाभ दिया गया। शेष रकम में से तीन लाख बिल भुगतान के लिए रखकर बाकी शासन को लौटाए जाएंगे।
गरीब हैं पर सबूत नहीं
फीरोजाबाद के रामगोपाल को मुंह का कैंसर है। पत्नी ही घरों में काम कर रोटी जुटाती है। कर्जा लेकर इलाज कराते रहे अब दो महीने से दवा नहीं खरीद पा रहे। यहां बीपीएल कार्ड मांगते हैं।
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तीन महीने लाभ, फिर बंद
धनौली के महाराज सिंह के पास बीपीएल कार्ड भी है। उनके परिजन ने बताया कि शुरूआत में दवा मुफ्त मिली। अब खरीदने के लिए कहा जा रहा है। बताया गया कि बजट खत्म हो गया।
गरीब हैं, प्रधान से भी लिखवाया
फीरोजाबाद की कमला का बेटों ने इलाज कराना बंद कर दिया तो वे एसएन आईं। यहां बीपीएल कार्ड मांगा गया। प्रधान का प्रमाणपत्र था पर माना नहीं। कार्ड बनवाने तहसील गईं तो वहां रुपये मांगे गए।
हुआ था 22 लाख का घपला
पिछले वित्त वर्ष में फर्जी बिल के जरिए किए गए 22 लाख रुपये के घपले का अमर उजाला ने पर्दाफाश किया था। मामला डीजीएमई तक पहुंचा। आरोप भी सिद्ध हुए, पर कार्रवाई किसी पर नहीं हुई।
अटक सकता है मेटरनिटी विंग का निर्माण
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में निर्माणाधीन 100 बेड के अत्याधुनिक मेटरनिटी विंग का निर्माण बीच में ही अटक सकता है। प्राचार्य डा. एसके गर्ग के अनुसार कार्यदायी संस्था ने अब तक हुए व्यय का जो उपयोगिता और गुणवत्ता प्रमाणपत्र जारी किया है उसमें तकनीकी गड़बड़ी हो गई है। निर्माण कर रही जल निगम की सीएनडीएस शाखा से संशोधित प्रमाणपत्र देने को कहा गया है। ताकि सीएमओ कार्यालय से निर्माण मद में शेष करीब 549.35 लाख रुपये रिलीज कराए जा सकें।
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कैंसर और किडनी फेल जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीब मरीजों के इलाज-दवा के लिए सरकार ने एसएन मेडिकल कालेज को 50 लाख रुपये दिए थे। बीपीएल कार्डधारक, साढ़े तीन एकड़ जोत से कम वाले योजना के पात्र हैं। हालांकि रेडियोथेरेपी विभाग (जिसे मरीज कैंसर विभाग कहते हैं) ने इसी बजट से करीब 290 मरीजों पर 37 लाख रुपये खर्च भी किए। लेकिन मरीज लौटाए भी जाते रहे और करीब 13 लाख रुपये बच गए। वित्त वर्ष के अंतिम हफ्ते में तो पंजीकृत मरीजों को दवा भी देना बंद कर दिया गया। असाध्य रोग बजट प्रभारी डा. एससी जैन ने बताया कि तय गाइडलाइन के मुताबिक ही मरीजों को योजना का लाभ दिया गया। शेष रकम में से तीन लाख बिल भुगतान के लिए रखकर बाकी शासन को लौटाए जाएंगे।
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गरीब हैं पर सबूत नहीं
फीरोजाबाद के रामगोपाल को मुंह का कैंसर है। पत्नी ही घरों में काम कर रोटी जुटाती है। कर्जा लेकर इलाज कराते रहे अब दो महीने से दवा नहीं खरीद पा रहे। यहां बीपीएल कार्ड मांगते हैं।
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तीन महीने लाभ, फिर बंद
धनौली के महाराज सिंह के पास बीपीएल कार्ड भी है। उनके परिजन ने बताया कि शुरूआत में दवा मुफ्त मिली। अब खरीदने के लिए कहा जा रहा है। बताया गया कि बजट खत्म हो गया।
गरीब हैं, प्रधान से भी लिखवाया
फीरोजाबाद की कमला का बेटों ने इलाज कराना बंद कर दिया तो वे एसएन आईं। यहां बीपीएल कार्ड मांगा गया। प्रधान का प्रमाणपत्र था पर माना नहीं। कार्ड बनवाने तहसील गईं तो वहां रुपये मांगे गए।
हुआ था 22 लाख का घपला
पिछले वित्त वर्ष में फर्जी बिल के जरिए किए गए 22 लाख रुपये के घपले का अमर उजाला ने पर्दाफाश किया था। मामला डीजीएमई तक पहुंचा। आरोप भी सिद्ध हुए, पर कार्रवाई किसी पर नहीं हुई।
अटक सकता है मेटरनिटी विंग का निर्माण
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में निर्माणाधीन 100 बेड के अत्याधुनिक मेटरनिटी विंग का निर्माण बीच में ही अटक सकता है। प्राचार्य डा. एसके गर्ग के अनुसार कार्यदायी संस्था ने अब तक हुए व्यय का जो उपयोगिता और गुणवत्ता प्रमाणपत्र जारी किया है उसमें तकनीकी गड़बड़ी हो गई है। निर्माण कर रही जल निगम की सीएनडीएस शाखा से संशोधित प्रमाणपत्र देने को कहा गया है। ताकि सीएमओ कार्यालय से निर्माण मद में शेष करीब 549.35 लाख रुपये रिलीज कराए जा सकें।