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चार साल बाद मिला बेटा तो छलके आंसू
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औंछा के गांव अंतपुर में चार बाद मिला किशोर अपने पिता के साथ।
- फोटो : MAINPURI
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औंछा। चार साल बाद जब बेटा अचानक सामने आया तो माता-पिता का खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके आंसू छलक पड़े। वह बेटे को गले से लगाकर दुलारते रहे। परिवार में खुशी का माहौल है।
गांव अंतपुर निवासी हरमुख सिंह का 11 वर्षीय पुत्र विकास चार वर्ष पूर्व पड़ोस के गांव बल्लमपुर में भागवत सुनने गया था। इसके बाद से ही वह घर नहीं लौटा। 15 जून 2015 को थाने में गुमशुदगी लिखाई गई थी। लगातार तलाश के बाद भी बालक का कोई पता नहीं लग पा रहा था।
मां-बाप बेटे का पल पल इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब चार साल बीत चुके थे। फिर भी माता-पिता ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। मंगलवार दोपहर हरमुख सिंह के बहनोई सुरेश चंद्र निवासी जमालीपुर थाना नगला खंगर फिरोजाबाद शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन पर एक रिश्तेदार को छोड़ने गए थे। तभी वहां उन्हें विकास सीढ़ियों पर बैठा दिखाई दिया।
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इसकी जानकारी उन्होंने तुरंत फोन पर हरमुख को दी। जब वह शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो बेटे को देख आंखें भर आईं। उन्होंने बेटे को गले लगा लिया। पिता को देख बेटे की आंखें भी नम हो गईं।
दिल्ली में व्यापारी को बेचा गया था विकास
घर पहुंचे विकास ने परिजनों को अपने लापता होने की कहानी सुनाई। उसने बताया कि भागवत सुनने के बाद वह पिकअप से मैनपुरी आ गया था। वहां से एक व्यक्ति उसे दिल्ली ले गया और एक व्यापारी को बेच दिया। व्यापारी ने उसे मेरठ में बंधक बनाकर रखा और अपने पशुओं को चारा डलवाता था। चार दिन पूर्व व्यापारी ने उसे दवा लेने के लिए भेजा तो वह भाग निकला। ट्रेन में बैठकर शिकोहाबाद आ पहुंचा, लेकिन उसे घर का रास्ता नहीं पता था।
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गांव अंतपुर निवासी हरमुख सिंह का 11 वर्षीय पुत्र विकास चार वर्ष पूर्व पड़ोस के गांव बल्लमपुर में भागवत सुनने गया था। इसके बाद से ही वह घर नहीं लौटा। 15 जून 2015 को थाने में गुमशुदगी लिखाई गई थी। लगातार तलाश के बाद भी बालक का कोई पता नहीं लग पा रहा था।
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मां-बाप बेटे का पल पल इंतजार कर रहे थे, लेकिन अब चार साल बीत चुके थे। फिर भी माता-पिता ने उम्मीद नहीं छोड़ी थी। मंगलवार दोपहर हरमुख सिंह के बहनोई सुरेश चंद्र निवासी जमालीपुर थाना नगला खंगर फिरोजाबाद शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन पर एक रिश्तेदार को छोड़ने गए थे। तभी वहां उन्हें विकास सीढ़ियों पर बैठा दिखाई दिया।
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इसकी जानकारी उन्होंने तुरंत फोन पर हरमुख को दी। जब वह शिकोहाबाद रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो बेटे को देख आंखें भर आईं। उन्होंने बेटे को गले लगा लिया। पिता को देख बेटे की आंखें भी नम हो गईं।
दिल्ली में व्यापारी को बेचा गया था विकास
घर पहुंचे विकास ने परिजनों को अपने लापता होने की कहानी सुनाई। उसने बताया कि भागवत सुनने के बाद वह पिकअप से मैनपुरी आ गया था। वहां से एक व्यक्ति उसे दिल्ली ले गया और एक व्यापारी को बेच दिया। व्यापारी ने उसे मेरठ में बंधक बनाकर रखा और अपने पशुओं को चारा डलवाता था। चार दिन पूर्व व्यापारी ने उसे दवा लेने के लिए भेजा तो वह भाग निकला। ट्रेन में बैठकर शिकोहाबाद आ पहुंचा, लेकिन उसे घर का रास्ता नहीं पता था।