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मेयर की ‘घर वापसी’ को नहीं पचा पा रहे भाजपाई
मेयर की ‘घर वापसी’ को नहीं पचा पा रहे भाजपाई
Updated Fri, 17 Feb 2017 11:34 PM IST
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मेयर की ‘घर वापसी’ को नहीं पचा पा रहे भाजपाई
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेयर इंद्रजीत आर्य ने भले ही ‘घर वापसी’ कर ली हो लेकिन इससे बहुत से भाजपाई खुश नहीं है। कुछ ने संघ के माध्यम से उनकी घेराबंदी शुरू कर दी है तो कुछ ने फेसबुक पर मोर्चा खोल दिया है। पार्टी में आने से उन्हीं के समाज के कुछ भाजपा नेता भी खिन्न हैं।
सूत्रों की मानें तो अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए भाजपा के एक प्रत्याशी चुनाव से पहले मेयर को पार्टी में शामिल कराना चाहते थे। कोशिशें तेज हुईं तो बात फैल गई। पार्टी में सक्रिय उन्हीं के समाज के नेता और मेयर के विरोधियों ने मोर्चा खोल दिया। चुनावी माहौल में विरोध की स्थिति के मद्देनजर मतदान तक उनकी एंट्री रोक दी गई मगर, मतदान के बाद चुपके से बरेली में उनकी ‘घर वापसी’ करा दी गई। इस पर पार्टी में उनसे पहले से नाराज चल रहे खेमे के तेवर और सख्त हो गए। इन सभी ने संघ में इंद्रजीत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इनमें कई कुछ महीनों बाद होने वाले नगर निगम चुनाव में मेयर पद के दावेदार भी हैं। ब्रज प्रांत के अलावा संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी यह लोग मिले और वर्ष 2014 के लोेकसभा चुनाव से पहले का पूरा मामला उनके समक्ष रखा। सांसद डा. रामशंकर कठेरिया उन्हें घर से बुलाने गए थे। एक बार को वह ब्रजक्षेत्र कार्यालय तक आ भी गए थे लेकिन फिर लौट गए। साथ ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के बारे में भी संघ को अवगत कराया है। ऐसे में इंद्रजीत आर्य के लिए भाजपा में लौटने के बाद भी आगे की राहें आसान नहीं है।
इधर, जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार पथिक ने फेसबुक के माध्यम से मेयर की घेराबंदी शुरू कर दी है। उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर इंद्रजीत सिंह आर्य के उस बोर्ड की तस्वीर अपलोड की है, जिस पर रंग तो सपा का है लेकिन निशान (कमल का फूल) भाजपा का है। साथ यह भी लिखा है कि मेयर इंद्रजीत आर्य, भले ही अब भाजपा में लौट आए हैं पर अब वह भाजपा के झंडे का रंग तक भूल चुके हैं।
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सूत्रों की मानें तो अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए भाजपा के एक प्रत्याशी चुनाव से पहले मेयर को पार्टी में शामिल कराना चाहते थे। कोशिशें तेज हुईं तो बात फैल गई। पार्टी में सक्रिय उन्हीं के समाज के नेता और मेयर के विरोधियों ने मोर्चा खोल दिया। चुनावी माहौल में विरोध की स्थिति के मद्देनजर मतदान तक उनकी एंट्री रोक दी गई मगर, मतदान के बाद चुपके से बरेली में उनकी ‘घर वापसी’ करा दी गई। इस पर पार्टी में उनसे पहले से नाराज चल रहे खेमे के तेवर और सख्त हो गए। इन सभी ने संघ में इंद्रजीत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इनमें कई कुछ महीनों बाद होने वाले नगर निगम चुनाव में मेयर पद के दावेदार भी हैं। ब्रज प्रांत के अलावा संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों से भी यह लोग मिले और वर्ष 2014 के लोेकसभा चुनाव से पहले का पूरा मामला उनके समक्ष रखा। सांसद डा. रामशंकर कठेरिया उन्हें घर से बुलाने गए थे। एक बार को वह ब्रजक्षेत्र कार्यालय तक आ भी गए थे लेकिन फिर लौट गए। साथ ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के बारे में भी संघ को अवगत कराया है। ऐसे में इंद्रजीत आर्य के लिए भाजपा में लौटने के बाद भी आगे की राहें आसान नहीं है।
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इधर, जिला मीडिया प्रभारी राजकुमार पथिक ने फेसबुक के माध्यम से मेयर की घेराबंदी शुरू कर दी है। उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर इंद्रजीत सिंह आर्य के उस बोर्ड की तस्वीर अपलोड की है, जिस पर रंग तो सपा का है लेकिन निशान (कमल का फूल) भाजपा का है। साथ यह भी लिखा है कि मेयर इंद्रजीत आर्य, भले ही अब भाजपा में लौट आए हैं पर अब वह भाजपा के झंडे का रंग तक भूल चुके हैं।
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