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मिर्गी दिवस: जूता-मोजा सुंघाने से नहीं, दवाओं से ठीक होगी यह बीमारी, भ्रांतियों से बचें

Wed, 17 Nov 2021 10:55 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 17 Nov 2021 10:55 AM IST
सार

विशेषज्ञ चिकित्सक का कहना है कि भ्रांतियों के कारण ज्यादातर मरीज इलाज कराने चिकित्सक के पास नहीं पहुंचते हैं। भ्रांतियों बचना चाहिए। मर्गी के 75 फीसदी मरीज दवाओं से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। 

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Medicines cure seventy five percent of epilepsy patients completely
epilepsy (सांकेतिक तस्वीर)

विस्तार

मिर्गी का दौरा पड़ा है तो उसे जूता-मोजा सुंघाने से ठीक नहीं होगा। न ही इसका इलाज किसी तंत्रमंत्र वाले पर है। इससे मर्ज और बिगड़ जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक बताते हैं ऐसे 75 फीसदी मरीज दवाओं से पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। लेकिन भ्रांतियों के कारण मरीज चिकित्सकों पर देर से पहुंचते हैं।

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आगरा एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी अध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि शहर में 10 न्यूरो फिजीशियन हैं। इन पर औसतन रोजाना 500 मरीज आते हैं जिसमें से 45 से 50 मरीज मिर्गी के हैं। इनकी उम्र 15 से 35 साल की रहती है। 
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इनमें से 90 फीसदी मरीज पहले तंत्र-मंत्र या फिर भ्रांतियों से जुड़े देशी नुस्खा अपनाने के बाद चिकित्सक के पास आए। कई ने तो यह बताया कि दौरा पड़ने पर जूता-मोजा सुंघाने से ठीक हो गया, फिर कुछ दिन तक सही रहा। लेकिन यह भ्रांति है, इससे मर्ज ठीक नहीं होता। 

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दो से तीन मिनट का पड़ता है दौरा: डॉ. सर्वेश 
आगरा स्ट्रोक एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ न्यूरो फिजीशियन डॉ. सर्वेश अग्रवाल ने बताया कि 10 से 15 तरह के दौरे होते हैं, जिसमें से हाथ-पैरों में ऐंठन, मुंह से झाग आना, चलते-चलते धड़ाम से गिर जाना, किसी को देखकर चौंक जाना, किसी दीवार या अन्य को देखते ही रहने के मरीज अधिक हैं। इनका उपचार तीन से पांच साल तक चलता है। लगातार इलाज कराने से ऐसे 98 फीसदी मरीज ठीक हो जाते हैं। 

इन बातों का रखें ख्याल:  
- मिर्गी का दौरा आने पर मरीज को एक करवट से लिटा दें। 
- आसपास मरीज को घेरकर जमा न हों, हवा आने दें। 
- दांत कटकटाने पर अंगुली-चम्मच न डालें, रुमाल या कपड़ा लगा दें। 
- जूता-मोजा कतई न सुघाएं, मरीज के हाथ-पैरों को न पकड़ें। 
- मरीज खाली पेट न रहे, व्रत करने से बचें। 
- आठ घंटे नींद लें, तनाव से बचें। 

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