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प्रधानाध्यापकों ने एमडीएम में किया फर्जीवाड़ा
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स्काउट गाइड भवन में एमडीएम के अभिलेखों की जांच करते अधिकारी
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों पर एक बार फिर मिड-डे मील (एमडीएम) में फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। इस फर्जीवाड़े की पोल स्कूलों के निरीक्षण के दौरान अभिलेखों की चूक से खुल गई। मामले में डीएम में डीएम ने जांच बैठा दी है। इससे खलबली मची हुई है। जिले में आठ साल पहले भी एमडीएम घोटाला हुआ था। के घोटाले में ही आईएएस और पीसीएस अफसरों को जेल जाना पड़ा था।
अप्रैल और मई में जिलाधिकारी और बीएसए के निरीक्षण में स्कूलों में गड़बड़ी मिली। इसमें छात्र उपस्थिति रजिस्टर में बच्चों की संख्या और मिड डे मील रजिस्टर में बच्चों की संख्या अलग-अलग दर्शाई गई थी। अधिकांश स्कूलों में मिड डे मील रजिस्टर में बच्चों की संख्या अधिक थी। इस बारे में स्पष्टीकरण मांगे गए, लेकिन शिक्षकों के जवाब संतोषजनक नहीं मिले। इसके बाद जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने बीएसए को एमडीएम की जांच करने के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर एमडीएम की जांच शुरू हो गई है।
प्रथम चरण में ऐसे स्कूलों की जांच की जा रही है, जिनमें पंजीकृत छात्र संख्या के सापेक्ष 80 प्रतिशत से अधिक और 30 प्रतिशत से कम एमडीएम वितरण अप्रैल माह में हुआ है। इससे पहले चरण की जांच में कुल 167 स्कूल आए हैं। बीएसए ने जांच के लिए सह समन्वयकों और संकुल प्रभारियों की संयुक्त रूप से पांच टीमें गठित की हैं, जो स्कूलों के एमडीएम रजिस्टर और छात्र उपस्थित रजिस्टर की जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
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अप्रैल और मई में जिलाधिकारी और बीएसए के निरीक्षण में स्कूलों में गड़बड़ी मिली। इसमें छात्र उपस्थिति रजिस्टर में बच्चों की संख्या और मिड डे मील रजिस्टर में बच्चों की संख्या अलग-अलग दर्शाई गई थी। अधिकांश स्कूलों में मिड डे मील रजिस्टर में बच्चों की संख्या अधिक थी। इस बारे में स्पष्टीकरण मांगे गए, लेकिन शिक्षकों के जवाब संतोषजनक नहीं मिले। इसके बाद जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने बीएसए को एमडीएम की जांच करने के आदेश दिए। डीएम के आदेश पर एमडीएम की जांच शुरू हो गई है।
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प्रथम चरण में ऐसे स्कूलों की जांच की जा रही है, जिनमें पंजीकृत छात्र संख्या के सापेक्ष 80 प्रतिशत से अधिक और 30 प्रतिशत से कम एमडीएम वितरण अप्रैल माह में हुआ है। इससे पहले चरण की जांच में कुल 167 स्कूल आए हैं। बीएसए ने जांच के लिए सह समन्वयकों और संकुल प्रभारियों की संयुक्त रूप से पांच टीमें गठित की हैं, जो स्कूलों के एमडीएम रजिस्टर और छात्र उपस्थित रजिस्टर की जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगे।
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