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मथुरा जिला पंचायत: 'कुर्सी' के लिए बसपा-भाजपा और रालोद में जंग, मायावती के निर्णय का इंतजार
Sat, 08 May 2021 12:22 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 08 May 2021 12:22 AM IST
सार
जिला पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बसपा के सभी सदस्यों पूर्व मंत्री विधायक श्यामसुंदर शर्मा के आवास पर एकत्रित हुए। सभी ने एकजुटता दिखाई।
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जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने के बाद एकत्रित हुए बसपा के नवनिर्वाचित सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मथुरा जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के लिए भाजपा, बसपा और रालोद में जंग शुरू हो चुकी है। भाजपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए चार नामों का पैनल तैयार कर जल्द ही इसे प्रदेश नेतृत्व को भेजा जाएगा, यहां से एक पर मुहर लगने के बाद भाजपा जोड़तोड़ में जुटेगी। जिला पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बसपा के सभी सदस्यों पूर्व मंत्री विधायक श्यामसुंदर शर्मा के आवास पर एकत्रित हुए। सभी ने एकजुटता दिखाई। चार सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए बसपा नेता जुट गए हैं। उधर, रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह के निधन के चलते दो दिन बाद रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी अध्यक्ष उम्मीदवार पर मुहर लगा सकते हैं।
जिला पंचायत सदस्य की 33 सीटों में से भाजपा की झोली में आठ आई हैं। वहीं बसपा के 13 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए हैं। रालोद को आठ सदस्य जीतकर ही संतोष करना पड़ा। भाजपा जिलाध्यक्ष मधु शर्मा ने बताया कि अध्यक्ष के लिए चार नाम तय किए हैं। इनमें किशन चौधरी, देववती (कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण की लघु भ्राता की धर्मपत्नी), महादेव शर्मा की धर्मपत्नी गुड्डी शर्मा और संजय प्रधान हैं। प्रदेश नेतृत्व ही इन नामों से एक पर अपनी मुहर लगाएगा।
बसपा नेता और पूर्वमंत्री श्यामसुंदर शर्मा ने बताया कि बसपा पदाधिकारियों और जिला पंचायत सदस्यों की परिचायात्मक मीटिंग उनके आवास पर हुई। सभी ने एकजुटता से बसपा का अध्यक्ष बनाने की हुंकार भरी है। बसपा सुप्रीमो मायावती की हरी झंडी मिलते ही सभी जी-जान से जुट जाएंगे। फिलहाल बसपा के पास 13 सदस्य हैं, उसे केवल चार सदस्यों की जरूरत है। रालोद जिलाध्यक्ष रामरसपाल सिंह पौनियां का कहना है कि फिलहाल चौ. अजित सिंह के निधन के चलते देरी हो गई। दो दिन बाद रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी अध्यक्ष उम्मीदवार पर मुहर लगा सकते हैं।
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जिला पंचायत सदस्य की 33 सीटों में से भाजपा की झोली में आठ आई हैं। वहीं बसपा के 13 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए हैं। रालोद को आठ सदस्य जीतकर ही संतोष करना पड़ा। भाजपा जिलाध्यक्ष मधु शर्मा ने बताया कि अध्यक्ष के लिए चार नाम तय किए हैं। इनमें किशन चौधरी, देववती (कैबिनेट मंत्री लक्ष्मीनारायण की लघु भ्राता की धर्मपत्नी), महादेव शर्मा की धर्मपत्नी गुड्डी शर्मा और संजय प्रधान हैं। प्रदेश नेतृत्व ही इन नामों से एक पर अपनी मुहर लगाएगा।
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बसपा नेता और पूर्वमंत्री श्यामसुंदर शर्मा ने बताया कि बसपा पदाधिकारियों और जिला पंचायत सदस्यों की परिचायात्मक मीटिंग उनके आवास पर हुई। सभी ने एकजुटता से बसपा का अध्यक्ष बनाने की हुंकार भरी है। बसपा सुप्रीमो मायावती की हरी झंडी मिलते ही सभी जी-जान से जुट जाएंगे। फिलहाल बसपा के पास 13 सदस्य हैं, उसे केवल चार सदस्यों की जरूरत है। रालोद जिलाध्यक्ष रामरसपाल सिंह पौनियां का कहना है कि फिलहाल चौ. अजित सिंह के निधन के चलते देरी हो गई। दो दिन बाद रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी अध्यक्ष उम्मीदवार पर मुहर लगा सकते हैं।
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किलेबंदी नहीं भेद सके मंत्री व विधायक
जिले में भाजपा के दो-दो कैबिनेट मंत्री और दो विधायक होने के बाद भी मांट विधायक श्यामसुंदर शर्मा को पटखनी देने में नाकाम रहे। उन्होंने जिला पंचायत में 13 सदस्य जिताकर बसपा का झंडा फहरा दिया।
1995 में भाजपा के जीते थे 12 सदस्य
साल 1995 में भाजपा के 12 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए थे। हालांकि जिला पंचायत की अध्यक्ष रालोद नेता पूर्व मंत्री ठा. तेजपाल सिंह की धर्मपत्नी सुधा सिंह बनी थीं। उस समय भाजपा नेता जिला पंचायत के उपाध्यक्ष रामपाल सिंह थे। वर्ष 1999 में जिला पंचायत अध्यक्ष को सत्ताच्युत करके त्रिस्तरीय कमेटी के चेयरमैन की कमान रामपाल सिंह के हाथों में आ गई। उनके साथ कमेटी में पूर्व विधायक श्याम सिंह अहेरिया और किशोरी लाल सदस्य बनाए गए है। एक साल तक जिला पंचायत की यह सरकार चली।
लापरवाही: सीएमओ दफ्तर में उड़ी नियमों की धज्जियां, पॉजिटिव होने के बाद भी ऑफिस आए कार्यक्रम प्रबंधक
जिले में भाजपा के दो-दो कैबिनेट मंत्री और दो विधायक होने के बाद भी मांट विधायक श्यामसुंदर शर्मा को पटखनी देने में नाकाम रहे। उन्होंने जिला पंचायत में 13 सदस्य जिताकर बसपा का झंडा फहरा दिया।
1995 में भाजपा के जीते थे 12 सदस्य
साल 1995 में भाजपा के 12 जिला पंचायत सदस्य जीतकर आए थे। हालांकि जिला पंचायत की अध्यक्ष रालोद नेता पूर्व मंत्री ठा. तेजपाल सिंह की धर्मपत्नी सुधा सिंह बनी थीं। उस समय भाजपा नेता जिला पंचायत के उपाध्यक्ष रामपाल सिंह थे। वर्ष 1999 में जिला पंचायत अध्यक्ष को सत्ताच्युत करके त्रिस्तरीय कमेटी के चेयरमैन की कमान रामपाल सिंह के हाथों में आ गई। उनके साथ कमेटी में पूर्व विधायक श्याम सिंह अहेरिया और किशोरी लाल सदस्य बनाए गए है। एक साल तक जिला पंचायत की यह सरकार चली।
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