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मथुराः 176 वर्ष पुराना है इतिहास, गऊघाट में बाग्भट्ट ने कराई थी पहली रामलीला

Wed, 23 Sep 2020 12:24 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 23 Sep 2020 12:24 AM IST
सार

गोलोकवासी रामनारायण अग्रवाल भैयाजी (पूर्व लीला मंत्री) के लेख के अनुसार मथुरा की रामलीला लगभग 176 वर्ष पुरानी मानी गई है। गऊघाट निवासी वाग्भट्ट जी के बाद मनिया भट्ट एवं उनके शिष्य वैद्य पंडित राधाकृष्ण ने रामलीला को नया स्वरूप दिया।

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Mathura Ramleela Mahotsav Is 176 Years Old Know History
मथुरा की रामलीला का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा में हर वर्ष होने वाली रामलीला 176 वर्ष पुरानी है। इसका पहला मंचन गऊघाट में यहीं के निवासी वाग्भट्ट जी ने विक्रम संवत 1893 यानी सन् 1836 में कराया। तब से यह प्रतिवर्ष निरंतर होती रही। समय के साथ भव्य स्वरूप धारण कर चुकी लीला पौने दो सौ साल के इतिहास में कोरोना महामारी के चलते पहली बार नहीं पा हो रही है। 
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गोलोकवासी रामनारायण अग्रवाल भैयाजी (पूर्व लीला मंत्री) के लेख के अनुसार मथुरा की रामलीला लगभग 176 वर्ष पुरानी मानी गई है। गऊघाट निवासी वाग्भट्ट जी के बाद मनिया भट्ट एवं उनके शिष्य वैद्य पंडित राधाकृष्ण ने रामलीला को नया स्वरूप दिया। वैद्य राधाकृष्ण कवि भी थे। बताते हैं, उनके रामलीला की कमान संभालने के बाद इसे मंत्रों से सिद्ध किया गया। पहली बार वह रामलीला के स्वामी पद पर भी आसीन हुए।
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पंडित राधाकृष्ण ने मथुरावासियों के सहयोग से रामलीला कमेटी की स्थापना की, जो आज रामलीला सभा के रूप में है। वैद्य जी ने वृद्धावस्था में लीला स्वामी पद पंडित रामचंद (लल्लो जी) को सौंप दिया। इसके बाद उनके मंझले पुत्र पंडित रामेश्वर दयाल और वर्तमान में पंडित रामेश्वर दयाल शर्मा के मंझले पुत्र पंडित अनिल स्वामी रामलीला स्वामी पद पर आसीन हैं।
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Mathura Ramleela Mahotsav Is 176 Years Old Know History
मथुरा की रामलीला में किरदार निभाने वाले कलाकार आदि - फोटो : अमर उजाला
अटल जी ने किया सभागार का उद्घाटन
रामलीला मंचन में आए बदलाव के बाद मथुरा के चित्रकूट धाम का भी वर्ष 1975-76 में जीर्णोद्घार शुरू कराया गया। यह काम 1990 में पूरा हुआ। 1992 में चित्रकूट परिसर में बने सभागार का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किया गया। 

रामलीला का समय-समय पर स्थान भी बदला। गऊघाट से शुरूआत के बाद रामलीला कटरा कसेरठ, चित्रकूट, जन्मस्थान व महाविद्या मैदान में होने लगी। सिद्ध लीला होने के कारण ही मंडली के स्वामी मुकुट पूजन के बाद यहां अभिमंत्रित किए हुए वर्णों को बंधवाने के बाद ही देश के विभिन्न क्षेत्रों में रामलीला कराने जाते हैं।  - पंडित अमित भारद्वाज, प्रचार संयोजक, श्री रामलीला सभा

रामलीला में बड़ा बदलाव 1970 में आया जब श्रीरामलीला सभा के तत्कालीन अध्यक्ष बांकेलाल बजाज, प्रधान मंत्री गौरीलाल, उपमंत्री बांकेबिहारी सराफ, प्रबंध मंत्री रविकांत गर्ग और बाड़ा मंत्री रमेशचंद्र आढ़तिया ने पदभार संभाला। इससे पूर्व रामलीला का मंचन गैस के हंडों (गैस लालटेन) की रोशनी में हुआ करता था। नए पदाधिकारियों की पहल पर वृंदावन से विद्युत लाइन मथुरा तक लाई गई और पहली बार बिजली की रोशनी में मंचन हुआ। - रविकांत गर्ग, संरक्षक, श्रीरामलीला सभा

मथुरा की रामलीला का अपने आप में सर्वोच्च है। देश और विदेशों में इसके कलाकारों को सम्मान मिलता है। इस वर्ष रामलीला का न होना कष्टदायक है, लेकिन महामारी को देखते हुए सरकार के नियमों का भी पालन करना बेहद जरूरी है। - बालकृष्ण चतुर्वेदी, हनुमान बनने वाले कलाकार।

भगवान राम का पात्र निभाना सौभाग्य की बात है। वर्ष 2014 से 2017 तक राम बना। इसके बाद शहर के लोग मुझे रामजी के नाम से जानने लगे। पड़ोस के लोग तो अब तक रामजी ही कहते हैं। कई तो पैर छूकर आशीर्वाद भी मांगते हैं।  - अनिकेत शर्मा, राम बनने वाले कलाकार।
 
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