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मथुरा जवाहर बाग कांड: 24 नवंबर को हाईकोर्ट में CBI सौंपेगी जांच रिपोर्ट, खुल सकते हैं कई बड़े राज

Sat, 12 Nov 2022 10:22 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 12 Nov 2022 10:22 PM IST
सार

अभी तक इस केस में जेल गए 305 आरोपियों में से सिर्फ सात जेल में है। ये अभी भी अपनी जमानत का इंतजार रहे हैं। इस मामले में जांच कर रही सीबीआई 24 नवंबर को हाईकोर्ट में रिपोर्ट सौंपेगी।

 

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Mathura Jawahar Bagh case CBI will submit investigation report in High Court on 24 November
रामवृक्ष यादव का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मथुरा में 2 जून 2016 को हुए जवाहर बाग हत्याकांड की जांच रिपोर्ट सीबीआई 24 नवंबर को हाईकोर्ट में सौंपेगी। इससे जवाहर बाग कांड एक बार फिर चर्चाओं में आ जाएगा। इससे वारदात से पूर्व लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है। अभी तक इस केस में जेल गए 305 आरोपियों में से सिर्फ सात जेल में है। ये अभी भी अपनी जमानत का इंतजार रहे हैं। इस केस में तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष फरह संतोष यादव सहित 28 लोगों की मौत हो गई थी।

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 बाबा जय गुरुदेव के अनुयायी रामवृक्ष यादव के नेतृत्व में सशस्त्र अतिक्रमणकारियों के एक दल ने जवाहर बाग की भूमि पर 2014 से कब्जा कर रखा था। मूलरूप से गाजीपुर निवासी रामवृक्ष यादव अपने निजी प्रशासन, राजस्व व निजी सेना के साथ यहां से अपनी समानांतर सरकार चला रहा था। प्रशासन का मानना था कि रामवृक्ष कुछ राजनेताओं का नजदीकी था और इसके दम पर जवाहर बाग पर कब्जा करना चाहता था।
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2014 में आंदोलनकारियों ने पहले अपनी मांगों के समर्थन में सागर, मध्य प्रदेश से दिल्ली के लिए मार्च शुरू किया। अप्रैल में लगभग 500 सदस्यों ने मथुरा में प्रदर्शन किया। प्रशासन ने उन्हें दो दिनों के लिए जवाहर बाग सार्वजनिक पार्क में प्रदर्शन की अनुमति दी थी। इसके बाद यह पार्क वारदात के बाद ही खाली हो सका। 2015 में जब उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एके जैन को जवाहर बाग में अपराधियों की आवाजाही और अवैध रूप से हथियार व गोला बारूद के अंदर होने की रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। 
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जवाहर बाग को खाली कराने को लेकर रामवृक्ष यादव हाईकोर्ट चला गया और मई 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रामवृक्ष यादव की अपील को खारिज कर दिया और सार्वजनिक पार्क पर जबरन काबिज अतिक्रमणकारियों बेदखल करने के लिए पुलिस को आदेश दिया। इसके बाद अतिक्रमणकारियों की बिजली और पानी की आपूर्ति काट दी गई। 2 जून 2016 को तकरीबन शाम 5 बजे पुलिस की एक टीम पार्क में पहुंची। इन अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। गोलियां चलाईं। शुरूआत में पुलिस ने आंसू गैस और रबर की गोलियों के साथ जवाबी कार्रवाई। दो वरिष्ठ अधिकारी की मौत हो जाने के बाद पुलिस ने इन लोगों पर गोलियां चलाईं। एक बड़ा पुलिस बल मौके पर भेजा गया। संघर्ष समाप्त होने तक इन अतिक्रमणकारियों के दल के 22 लोगों की जान जा चुकी थी। बाद में मृतकों की संख्या 26 बताई गई। अभियुक्तगण के अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि जवाहर बाग हिंसा में हाईकोर्ट के आदेश पर एसपी सिटी व थानाध्यक्ष संतोष यादव की हत्या वाले केस में अभी स्टे के कारण सुनवाई नहीं हो रही है।


 जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार सिंह ने बताया कि जवाहर बाग के मामले में अदालत ने कुल 305 अभियुक्तों को जेल भेजा गया था। जिनमें से 204 पुरुष ,101 महिलाएं थी। इनके साथ 73 बच्चे भी थे। वर्तमान में जेल में भईया लाल निवासी फर्रुखाबाद, रामपाल निवासी लखीमपुर, रामेश्वर निवासी ऊधम सिंह नगर (उत्तराखंड), संतराम निवासी प्रतापगढ़, धर्मेंद्र निवासी कन्नौज, प्रिंस निवासी बिजनौर, चरण सिंह, रसूलाबाद कानपुर देहात बंद हैं।

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