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मथुरा के जाबरा गांव में आज भी जेठ के साथ होली खेलती है बहू, सदियों पुरानी है यह परंपरा
Wed, 20 Mar 2019 07:52 AM IST
मुकेश कुमार
कुशल प्रताप सिंह, अमर उजाला, मांट (मथुरा)
कुशल प्रताप सिंह, अमर उजाला, मांट (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 20 Mar 2019 07:52 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा के मांट क्षेत्र के गांव जाबरा में राधारानी ने अपने जेठ बलराम संग होली खेली थी। उस परंपरा का निर्वहन ग्रामीण आज भी कर रहे हैं। यहां बहू (छोटे भाई की पत्नी) अपने जेठ के साथ होली खेलती है।
मान्यता है कि ब्रज के राजा बलदेव ने जेठ होते हुए भी राधारानी से भाभी और देवर के समान होली खेलने की अभिलाषा व्यक्त की। राधा यह बात सुन कर विचलित हुईं और कृष्ण से कहा तो वे मुस्करा कर बोले कि त्रेता युग में बलराम लक्ष्मण थे, आप सीता के साथ रूप में उनकी भाभी थीं। उसी नाते से भाभी कहकर होली खेलने के लिए कहा होगा।
गांव जाबरा तहसील मांट से चार किमी दूर मांट-गोरई रोड पर बसा है। प्रसिद्ध भजन गायक स्वामी शिवराम का जन्म भी इसी गांव में हुआ था। गांव में फाल्गुन माह की प्रथम तिथि को सुबह कजरा होता है। इसमें हुरियारे गाते-बजाते गांव की परिक्रमा करते हैं।
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मान्यता है कि ब्रज के राजा बलदेव ने जेठ होते हुए भी राधारानी से भाभी और देवर के समान होली खेलने की अभिलाषा व्यक्त की। राधा यह बात सुन कर विचलित हुईं और कृष्ण से कहा तो वे मुस्करा कर बोले कि त्रेता युग में बलराम लक्ष्मण थे, आप सीता के साथ रूप में उनकी भाभी थीं। उसी नाते से भाभी कहकर होली खेलने के लिए कहा होगा।
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गांव जाबरा तहसील मांट से चार किमी दूर मांट-गोरई रोड पर बसा है। प्रसिद्ध भजन गायक स्वामी शिवराम का जन्म भी इसी गांव में हुआ था। गांव में फाल्गुन माह की प्रथम तिथि को सुबह कजरा होता है। इसमें हुरियारे गाते-बजाते गांव की परिक्रमा करते हैं।
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गांव के वृद्धजन ब्रजभाषा के प्राचीन होली के गीतों को ऊंचे स्वर में गाते चलते हैं। हुरंगा से पूर्व गांव में बच्चों का कुश्ती दंगल होता है। शाम को गांव के बाहर मैदान में ब्रज के होली रसियों के गायन के साथ जेठ और भाभी के बीच हुरंगे होता है।
उसके बाद गांव की परिक्रमा की जाती है। दूज को जाबरा के गांव चंद्रवन में मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें आने वाले सैकड़ों गांवों के लोग अपने-अपने गांव का नगाड़ा लेकर आते हैं। यहां रसियों और नगाड़ों की धाप पर लोग नृत्य करते हैं।
नगाड़े की थाप पर बुजुर्ग करतब दिखाते हैं। जाबरा भन्नी पर कुश्ती दंगल होता है। लगातार तीन वर्ष कुश्ती जीतने वाले पहलवान को पांच किलोग्राम का चांदी का गदा इनाम में दिया जाता है।
उसके बाद गांव की परिक्रमा की जाती है। दूज को जाबरा के गांव चंद्रवन में मेले का आयोजन किया जाता है। इसमें आने वाले सैकड़ों गांवों के लोग अपने-अपने गांव का नगाड़ा लेकर आते हैं। यहां रसियों और नगाड़ों की धाप पर लोग नृत्य करते हैं।
नगाड़े की थाप पर बुजुर्ग करतब दिखाते हैं। जाबरा भन्नी पर कुश्ती दंगल होता है। लगातार तीन वर्ष कुश्ती जीतने वाले पहलवान को पांच किलोग्राम का चांदी का गदा इनाम में दिया जाता है।