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पटना-कोटा एक्सप्रेस में यात्रियों की मौत: शौचालय और गैलरी में हुए निढाल, 17 घंटे मची चीख-पुकार; फूल गए हाथ-पैर
Mon, 21 Aug 2023 09:41 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 21 Aug 2023 09:41 AM IST
सार
पटना से कोटा जा रही ट्रेन में दूषित भोजन से छत्तीसगढ़ के दो तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। वहीं उल्टी दस्त के कारण 20 लोगों की हालत खराब हो गई। ट्रेन के आगरा कैंट पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यात्रियों का इलाज किया। बेहोशी की हालत में 6 यात्रियों को एसएन मेडिकल कॉलेज और कैंट स्थित मंडलीय रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 5 की हालत गंभीर बनी हुई है।
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अस्पताल में भर्ती यात्री
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन के बाद अगला पड़ाव मथुरा था। बम-बम भोले और कान्हा के गीत-भजन गाने के बाद लोगों ने भोजन किया। 10 बजे से लोगों को दस्त, उल्टी, पेट में दर्द, घबराहट की परेशानी होने लगी। 10:45 से हालत बिगड़ने लगी और शौचालय, सीट पर ही निढाल होते देख यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।
एसएन में भर्ती उत्तम साहू के चचेरे भाई चेतन लाल ने बताया कि बनारस से शाम को करीब पांच बजे मथुरा के लिए रवाना हुए। 9 बजे खाने के बाद लोग सीटों पर सोने चले गए। कई लोगों ने खाना नहीं खाया था और आपस में बातचीत कर रहे थे। 10 बजे के बाद एक-एक करके लोग उठने लगे और पेट में दर्द, घबराहट की परेशानी बताई। उल्टी-दस्त होने पर घर से लाए दवाएं खाईं।
पौने ग्यारह बजे से तो तीनों बोगी में 35-40 यात्रियों को उल्टी-दस्त होने लगे। कई तो शौचालय में ही गिर पड़े, इनको लेकर आते तो सीट पर दूसरा साथी उल्टियां करने लगता। तीनों ही बोगियों में ये हाल देख लोग घबरा गए और चीखने-चिल्लाने लगे।
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20 की सुबह 11 बजे तक दवाएं खत्म होने के बाद हालात और बिगड़ गए। गैलरी, सीट, शौचालय में लोग गिरे पड़े थे। लगता था कि अब किसी की जान नहीं बच पाएगी। आगरा कैंट स्टेशन आने तक दो की मौत हो चुकी थी। यहां आने के बाद इलाज मिला, जिससे बाकी की जान बच गई।
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एसएन में भर्ती उत्तम साहू के चचेरे भाई चेतन लाल ने बताया कि बनारस से शाम को करीब पांच बजे मथुरा के लिए रवाना हुए। 9 बजे खाने के बाद लोग सीटों पर सोने चले गए। कई लोगों ने खाना नहीं खाया था और आपस में बातचीत कर रहे थे। 10 बजे के बाद एक-एक करके लोग उठने लगे और पेट में दर्द, घबराहट की परेशानी बताई। उल्टी-दस्त होने पर घर से लाए दवाएं खाईं।
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पौने ग्यारह बजे से तो तीनों बोगी में 35-40 यात्रियों को उल्टी-दस्त होने लगे। कई तो शौचालय में ही गिर पड़े, इनको लेकर आते तो सीट पर दूसरा साथी उल्टियां करने लगता। तीनों ही बोगियों में ये हाल देख लोग घबरा गए और चीखने-चिल्लाने लगे।
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20 की सुबह 11 बजे तक दवाएं खत्म होने के बाद हालात और बिगड़ गए। गैलरी, सीट, शौचालय में लोग गिरे पड़े थे। लगता था कि अब किसी की जान नहीं बच पाएगी। आगरा कैंट स्टेशन आने तक दो की मौत हो चुकी थी। यहां आने के बाद इलाज मिला, जिससे बाकी की जान बच गई।
बहन-मां की हालत देख हाथ-पैर फूल गए
मृतका नेताम की बेटी सुनीति गंदर्भ ने बताया कि मां, बहन और भाभी के साथ यात्रा में आए। मैंने और भाभी ने भूख नहीं लगने के कारण खाना नहीं खाया था। खाने के घंटे-डेढ़ घंटे तो लोगों की हालत ही बिगड़ना शुरू हो गया। मां नेताम और छोटी बहन अनीता तो बेहोश हो गई। ऐसे ही और भी यात्रियों का हाल देख सभी के हाथ-पैर फूल गए। क्या करें, क्या न करें ये भी समझ में नहीं आ रहा था। वे 16-17 घंटे दिल दहला देने वाले थे।
मृतका नेताम की बेटी सुनीति गंदर्भ ने बताया कि मां, बहन और भाभी के साथ यात्रा में आए। मैंने और भाभी ने भूख नहीं लगने के कारण खाना नहीं खाया था। खाने के घंटे-डेढ़ घंटे तो लोगों की हालत ही बिगड़ना शुरू हो गया। मां नेताम और छोटी बहन अनीता तो बेहोश हो गई। ऐसे ही और भी यात्रियों का हाल देख सभी के हाथ-पैर फूल गए। क्या करें, क्या न करें ये भी समझ में नहीं आ रहा था। वे 16-17 घंटे दिल दहला देने वाले थे।
गर्मी, उमस और ट्रेन के पंखे भी चल रहे थे धीरे
मृतका नेताम की बहू भगवंती ने बताया कि बोगी ठसाठस भरी हुई थी। गर्मी और उमस से बुरा हाल था। ट्रेन के पंखे भी धीरे-धीरे चल रहे थे। इससे हालत और बिगड़ गई। ट्रेन के रुक-रुक कर और देरी से चलने के कारण और हालत बदतर हो गई। इन 16-17 घंटों में ट्रेन में आरपीएफ-जीआरपी के जवान भी नहीं आए। अगर कोई अधिकारी आ जाता तो मरीजों को इलाज मौके पर मिल जाता।
मृतका नेताम की बहू भगवंती ने बताया कि बोगी ठसाठस भरी हुई थी। गर्मी और उमस से बुरा हाल था। ट्रेन के पंखे भी धीरे-धीरे चल रहे थे। इससे हालत और बिगड़ गई। ट्रेन के रुक-रुक कर और देरी से चलने के कारण और हालत बदतर हो गई। इन 16-17 घंटों में ट्रेन में आरपीएफ-जीआरपी के जवान भी नहीं आए। अगर कोई अधिकारी आ जाता तो मरीजों को इलाज मौके पर मिल जाता।
बनारस से सभी सकुशल हुए थे सवार
यात्री जयराम ने बताया कि सफर में 70 महिलाएं और 20 पुरुष थे, बच्चा कोई नहीं था। बनारस में सभी स्वस्थ थे। खाना खाने के घंटेभर बाद से हालत बिगड़ने लगी थी। हमारे साथ सरकारी अस्पताल की स्टाफ नर्स भी थी, जिसने दवाएं दीं, इससे कई यात्रियों के हालत में सुधार हुआ। लेकिन कई की हालत लगातार खराब हो रही थी। आगरा कैंट स्टेशन पर यात्रियों को इलाज मिलने से पहले ही दो की मौत हो गई।
यात्री जयराम ने बताया कि सफर में 70 महिलाएं और 20 पुरुष थे, बच्चा कोई नहीं था। बनारस में सभी स्वस्थ थे। खाना खाने के घंटेभर बाद से हालत बिगड़ने लगी थी। हमारे साथ सरकारी अस्पताल की स्टाफ नर्स भी थी, जिसने दवाएं दीं, इससे कई यात्रियों के हालत में सुधार हुआ। लेकिन कई की हालत लगातार खराब हो रही थी। आगरा कैंट स्टेशन पर यात्रियों को इलाज मिलने से पहले ही दो की मौत हो गई।
शरीर में पानी की हो गई थी कमी
रेलवे की चिकित्सक डॉ. अवंतिका सिन्हा ने बताया कि 20 से अधिक यात्रियों को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। इसमें से सात की हालत गंभीर थी। इनको भर्ती कर उपचार दिया। उल्टी-दस्त होने से इनके शरीर में पानी की कमी भी हो गई थी। बाकी के यात्री सामान्य स्थित होने पर रवाना हो गए।
रेलवे की चिकित्सक डॉ. अवंतिका सिन्हा ने बताया कि 20 से अधिक यात्रियों को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। इसमें से सात की हालत गंभीर थी। इनको भर्ती कर उपचार दिया। उल्टी-दस्त होने से इनके शरीर में पानी की कमी भी हो गई थी। बाकी के यात्री सामान्य स्थित होने पर रवाना हो गए।
उल्टी-दस्त से हालत बिगड़ी
एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मृदुल चतुर्वेदी ने बताया कि उल्टी-दस्त के कारण दो मरीज बेहोशी की हालत में इमरजेंसी में भर्ती किए थे। इनको उपचार के बाद हालत में थोड़ा सुधार होने पर देर रात मेडिसिन विभाग में रेफर किया है, दोनों की हालत गंभीर है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मृदुल चतुर्वेदी ने बताया कि उल्टी-दस्त के कारण दो मरीज बेहोशी की हालत में इमरजेंसी में भर्ती किए थे। इनको उपचार के बाद हालत में थोड़ा सुधार होने पर देर रात मेडिसिन विभाग में रेफर किया है, दोनों की हालत गंभीर है।
वे दर्दनाक पल
- 14 अगस्त रात तो यात्री रायपुर से ट्रेन में सवार हुए।
- 16 अगस्त को वाराणसी पहुंचे, 3 दिन ठहरे।
- 19 अगस्त की पूर्वाह्न 11 बजे कढ़ी-चावल खाए।
- दोपहर एक बजे कद्दू-चावल बनाए।
- शाम करीब 5 बजे ट्रेन में बैठे।
- रात नौ बजे खाना खाया।
- रात 10 बजे से लोगों को परेशानी होने लगी।
- रात 12 बजे तक तीनों बोगियों में लोग बीमार पड़ गए।
- 20 अगस्त को पूर्वाह्न 11 बजे तक दवाएं भी खत्म हो गईं।
- अपराह्न 3:40 बजे आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेन रुकी, यात्री भर्ती किए।
- 14 अगस्त रात तो यात्री रायपुर से ट्रेन में सवार हुए।
- 16 अगस्त को वाराणसी पहुंचे, 3 दिन ठहरे।
- 19 अगस्त की पूर्वाह्न 11 बजे कढ़ी-चावल खाए।
- दोपहर एक बजे कद्दू-चावल बनाए।
- शाम करीब 5 बजे ट्रेन में बैठे।
- रात नौ बजे खाना खाया।
- रात 10 बजे से लोगों को परेशानी होने लगी।
- रात 12 बजे तक तीनों बोगियों में लोग बीमार पड़ गए।
- 20 अगस्त को पूर्वाह्न 11 बजे तक दवाएं भी खत्म हो गईं।
- अपराह्न 3:40 बजे आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेन रुकी, यात्री भर्ती किए।
दूषित भाेजन से ट्रेन में दो की मौत, पांच गंभीर
पटना से कोटा जा रही ट्रेन में दूषित भोजन से छत्तीसगढ़ के दो तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। वहीं उल्टी दस्त के कारण 20 लोगों की हालत खराब हो गई। ट्रेन के आगरा कैंट पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यात्रियों का इलाज किया। बेहोशी की हालत में 6 यात्रियों को एसएन मेडिकल कॉलेज और कैंट स्थित मंडलीय रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 5 की हालत गंभीर बनी हुई है।