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मलेरिया विभाग अपनी लैव तक नहीं कर सका विकसित
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कासगंज। जिला में मलेरिया एवं डेंगू की जांच के नाम पर मात्र खानापूर्ति ही हो रही है। मलेरिया विभाग आज तक अपनी लैब नहीं बना सका है। जिला अस्पताल एवं सात स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ही जांच की व्यवस्था है। नवीन स्वास्थ्य केंद्रों पर भी जांच के इंतजाम नहीं है।
मलेरिया एवं डेंगू संक्रमण से प्रतिवर्ष ही बड़ी संख्या में लोग संक्रमित होते हैं। यहां तक कि तमाम जानें भी इस बीमारी से चली जाती है। इसके बाद भी जिला में मलेरिया की जांच को लेकर पर्याप्त व्यवस्थाएं आज तक नहीं हो सकी है। जिला के मलेरिया विभाग के लिए सीनियर लैब टेक्नीशियन का पद स्वीकृत है, लेकिन इस पद को आज तक नहीं भरा जा सका है। जिससे जिला मुख्यालय पर विभाग की अपनी कोई लैब नहीं हैं।
जिला में मलेरिया की जांच के लिए जिला अस्पताल एवं सात ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर ही लैब संचालित हो रही है। वैसे जिला में 29 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बने हुए हैं, इनकी स्थिति काफी खराब है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में से 21 पर लैब सहायक के पद सृजित हैं, लेकिन ये सभी पद रिक्त चल रहे हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की मलेरिया की जांच नहीं हो पाती। ऐसे मरीजों को अपनी जांच के लिए निजी लैबों या फिर जिला या ब्लॉक स्तर के अस्पताल पर जांच के लिए निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी होती है। डेंगू की जांच की स्थिति तो और भी खराब है। किसी भी केंद्र पर डेंगू की जांच नहीं होती। मरीज के एनएस 1 पॉजेटिव आने के बाद डेंगू संक्रमण की पुष्टि के लिए विभाग को बाहरी जनपदों की लैब पर निर्भर रहना पड़ता है।
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जिले में मलेरिया विभाग में स्वीकृत सीनियर लैब टेक्नीशियन का पद रिक्त होने से लैब संचालित नहीं हो पा रही। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सृजित पद रिक्त चल रहे हैं। राजकुमार सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी
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मलेरिया एवं डेंगू संक्रमण से प्रतिवर्ष ही बड़ी संख्या में लोग संक्रमित होते हैं। यहां तक कि तमाम जानें भी इस बीमारी से चली जाती है। इसके बाद भी जिला में मलेरिया की जांच को लेकर पर्याप्त व्यवस्थाएं आज तक नहीं हो सकी है। जिला के मलेरिया विभाग के लिए सीनियर लैब टेक्नीशियन का पद स्वीकृत है, लेकिन इस पद को आज तक नहीं भरा जा सका है। जिससे जिला मुख्यालय पर विभाग की अपनी कोई लैब नहीं हैं।
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जिला में मलेरिया की जांच के लिए जिला अस्पताल एवं सात ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर ही लैब संचालित हो रही है। वैसे जिला में 29 नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी बने हुए हैं, इनकी स्थिति काफी खराब है। इन स्वास्थ्य केंद्रों में से 21 पर लैब सहायक के पद सृजित हैं, लेकिन ये सभी पद रिक्त चल रहे हैं। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की मलेरिया की जांच नहीं हो पाती। ऐसे मरीजों को अपनी जांच के लिए निजी लैबों या फिर जिला या ब्लॉक स्तर के अस्पताल पर जांच के लिए निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को काफी परेशानी होती है। डेंगू की जांच की स्थिति तो और भी खराब है। किसी भी केंद्र पर डेंगू की जांच नहीं होती। मरीज के एनएस 1 पॉजेटिव आने के बाद डेंगू संक्रमण की पुष्टि के लिए विभाग को बाहरी जनपदों की लैब पर निर्भर रहना पड़ता है।
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जिले में मलेरिया विभाग में स्वीकृत सीनियर लैब टेक्नीशियन का पद रिक्त होने से लैब संचालित नहीं हो पा रही। नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सृजित पद रिक्त चल रहे हैं। राजकुमार सारस्वत, जिला मलेरिया अधिकारी