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Agra News: बौद्ध अनुयायियों का एलान, मांग पूरी होने तक चलेगा आंदोलन
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जसराजपुर में धरना देते बौद्ध भिक्षु।
- फोटो : संवाद
भोगांव। जसराजपुर के वाईबीएस (युवा बुद्ध सोसायटी) सेंटर में बीटी एक्ट के विरोध में दूसरे दिन भी सांकेतिक धरना प्रदर्शन चालू रहा। बौद्ध अनुयायियों ने सरकार के विरुद्ध नारेबाजी की।बुधवार को धरना पर बैठे भिक्षु भंते सम्यक बोधि, भंते प्रियदर्शी, भंते पद्मानंद, भंते धम्मानंद तथा भंते प्रियदर्शी ने भगवान बुद्ध की वंदना की। भंते प्रियदर्शी ने कहा कि बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म का एक पवित्र स्थल है। यहां भगवान बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था। सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व यहां एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।
कहा जाता है कि 13 वीं शताब्दी में तुर्क आक्रमणकारियों के हमले तक यह मंदिर बौद्ध अनुयायियों के अधिकार में था। लेकिन 1590 में घमंडी गिरी नामक महंत बोधगया पहुंचे और उन्होंने इस मंदिर पर दावा करते हुए खुद को महाविहार महाबोधि मंदिर के वैध उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। सुरेश बौद्ध, डॉ आलोक सिंह शाक्य, जोगराज शाक्य, रामवीर सिंह, प्रेम रतन शाक्य, आलोकदीप, रेखा, प्रियंका, कुलदीप मौजूद रहे।
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क्या है बीटी एक्ट
बोधगया टैंपल एक्ट, 1949 के तहत इस कमेटी में कुल 8 सदस्य होते हैं, जिनमें 4 बौद्ध और 4 हिंदू सदस्य शामिल होते हैं। इस कमेटी के पदेन अध्यक्ष गया के जिला मजिस्ट्रेट होते हैं और उनका हिंदू होना जरूरी था। 2013 में बिहार सरकार ने एक्ट में संशोधन किया और हिंदू होने की बाध्यता समाप्त कर दी। इस बदलाव के बाद अब कोई भी धर्म का व्यक्ति महत्वपूर्ण कमेटी का अध्यक्ष बन सकता है। इसी प्रावधान को लेकर बौद्ध भिक्षु एक्ट को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
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कहा जाता है कि 13 वीं शताब्दी में तुर्क आक्रमणकारियों के हमले तक यह मंदिर बौद्ध अनुयायियों के अधिकार में था। लेकिन 1590 में घमंडी गिरी नामक महंत बोधगया पहुंचे और उन्होंने इस मंदिर पर दावा करते हुए खुद को महाविहार महाबोधि मंदिर के वैध उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। सुरेश बौद्ध, डॉ आलोक सिंह शाक्य, जोगराज शाक्य, रामवीर सिंह, प्रेम रतन शाक्य, आलोकदीप, रेखा, प्रियंका, कुलदीप मौजूद रहे।
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क्या है बीटी एक्ट
बोधगया टैंपल एक्ट, 1949 के तहत इस कमेटी में कुल 8 सदस्य होते हैं, जिनमें 4 बौद्ध और 4 हिंदू सदस्य शामिल होते हैं। इस कमेटी के पदेन अध्यक्ष गया के जिला मजिस्ट्रेट होते हैं और उनका हिंदू होना जरूरी था। 2013 में बिहार सरकार ने एक्ट में संशोधन किया और हिंदू होने की बाध्यता समाप्त कर दी। इस बदलाव के बाद अब कोई भी धर्म का व्यक्ति महत्वपूर्ण कमेटी का अध्यक्ष बन सकता है। इसी प्रावधान को लेकर बौद्ध भिक्षु एक्ट को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
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