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Gandhi Jayanti 2019: यहां रातभर पुलिस बैरक में रुके थे महात्मा गांधी
Wed, 02 Oct 2019 10:34 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 02 Oct 2019 10:34 AM IST
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महात्मा गांधी
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आज देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मना रहा है। इस खास मौके पर मथुरा के अतीत में झांके तो यहां गांधी जी ने पुलिस बैरक में एक रात बिताई थी। इसके साथ आजादी की मशाल को तेज करने भी वो दो बार धार्मिक नगरी मथुरा आए थे।
1919 में आतंकवादी अपराध अधिनियम (काला कानून) के खिलाफ महात्मा गांधी के आह्वान पर देशभर में हुई हड़ताल के दौरान पुलिस ने पंजाब में सत्यागृहियों पर फायरिंग की थी। इसी के विरोध के लिए गांधी जी मुंबई (तत्कालीन बांबे), दिल्ली और अमृतसर की रेल यात्रा करने निकले थे।
इसी दौरान उन्हें मथुरा से आगे पलवल स्टेशन पर अंग्रेजी सरकार की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहां से फिर उन्हें ट्रेन से मथुरा लाया गया। रात हो जाने पर मथुरा में गांधी जी को पुलिस बैरक में रखा गया।
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1919 में आतंकवादी अपराध अधिनियम (काला कानून) के खिलाफ महात्मा गांधी के आह्वान पर देशभर में हुई हड़ताल के दौरान पुलिस ने पंजाब में सत्यागृहियों पर फायरिंग की थी। इसी के विरोध के लिए गांधी जी मुंबई (तत्कालीन बांबे), दिल्ली और अमृतसर की रेल यात्रा करने निकले थे।
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इसी दौरान उन्हें मथुरा से आगे पलवल स्टेशन पर अंग्रेजी सरकार की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। वहां से फिर उन्हें ट्रेन से मथुरा लाया गया। रात हो जाने पर मथुरा में गांधी जी को पुलिस बैरक में रखा गया।
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अगले दिन सुबह अंग्रेज उन्हें मालगाड़ी में बिठाकर राजस्थान की ओर ले गए। हालांकि मथुरा पुलिस बैरक में ऐसा कोई स्मारक या प्रतीक नहीं है, जो इस ऐतिहासिक घटना का स्मरण दिला सके। यह किस्सा सिर्फ गांधी जी से जुड़ी किताबों में है।
स्वाधीनता आंदोलन को धार देने दो बार आए थे गांधी जी
नवंबर 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पुराने शहर के बीच पार्क में आंदोलनकारियों के आमरण अनशन को संबोधित किया। मौलाना आजाद और पंडित मोतीलाल नेहरू ने भी गांधी जी का साथ दिया था। अब इस स्थान को गांधी पार्क के नाम से पहचाना जाता है।
वहीं 1929 में महात्मा गांधी का मथुरा में दूसरी बार आगमन हुआ था। तब वे रंगेश्वर स्थित पुराने डाकघर में ठहरे थे। यही से मथुरा के अलावा वृंदावन, कोसीकलां, गोवर्धन, सादाबाद, गोकुल और महावन में आजादी को लेकर सभाएं व बैठकें की थीं।
स्वाधीनता आंदोलन को धार देने दो बार आए थे गांधी जी
नवंबर 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पुराने शहर के बीच पार्क में आंदोलनकारियों के आमरण अनशन को संबोधित किया। मौलाना आजाद और पंडित मोतीलाल नेहरू ने भी गांधी जी का साथ दिया था। अब इस स्थान को गांधी पार्क के नाम से पहचाना जाता है।
वहीं 1929 में महात्मा गांधी का मथुरा में दूसरी बार आगमन हुआ था। तब वे रंगेश्वर स्थित पुराने डाकघर में ठहरे थे। यही से मथुरा के अलावा वृंदावन, कोसीकलां, गोवर्धन, सादाबाद, गोकुल और महावन में आजादी को लेकर सभाएं व बैठकें की थीं।