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अपनों तक पहुंचने के लिए संघर्ष भरा सफर
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गुरुग्राम हरियाणा से चलकर मथुरा के रास्ते अपने ऑटो से महाराष्ट्र जाता परिवार।
- फोटो : MATHURA
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कोसीकलां। रोजी-रोटी कमाने के लिए पहले घर छोड़ा था, लेकिन अब अपनों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मजदूर संकट में भूखे पेट और पैदल ही चले जा रहे हैं। अपने घरों की ओर सैकड़ों किलोमीटर का पैदल सफर कर रहे हैं।
मजदूरों की भीड़ ने सरकार के इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है, कोई ट्रक में बैठकर आ रहा है तो कोई टेंपो और साइकिल पर। गुरुग्राम में ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले कृष्णा ऑटो से ही मालेगांव (महाराष्ट्र) जा रहा था। लॉकडाउन का पहला चरण शुरू हुआ तो खर्चा चलाने के लिए कुछ जमा पूंजी थी, लेकिन जब लॉकडाउन बढ़ा तो गांव चलने की ठान ली।
न बस मिली और न कोई दूसरा वाहन। लिहाजा अपने ऑटो में पत्नी और बच्चों को बैठाकर निकल पड़ा। सात दिन में वह गांव पहुंच जाएंगे। रास्ते में किसी के परेशान करने के जवाब में उसका कहना था कि वह गुरुग्राम से अनुमति लेकर निकले हैं।
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वही कोटवन बॉर्डर पर गोद में बच्चे को लेकर जा रही सागर (मध्य प्रदेश) जा रही सुनैना का कहना था कि बच्चों के चेहरे भूख-प्यास से सूख रहे हैं। बताया कि खाने को लेकर बिस्किट और ब्रेड ही मिला। भगवान भरोसे ही घर पहुंचना है।
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मजदूरों की भीड़ ने सरकार के इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है, कोई ट्रक में बैठकर आ रहा है तो कोई टेंपो और साइकिल पर। गुरुग्राम में ऑटो चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाले कृष्णा ऑटो से ही मालेगांव (महाराष्ट्र) जा रहा था। लॉकडाउन का पहला चरण शुरू हुआ तो खर्चा चलाने के लिए कुछ जमा पूंजी थी, लेकिन जब लॉकडाउन बढ़ा तो गांव चलने की ठान ली।
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न बस मिली और न कोई दूसरा वाहन। लिहाजा अपने ऑटो में पत्नी और बच्चों को बैठाकर निकल पड़ा। सात दिन में वह गांव पहुंच जाएंगे। रास्ते में किसी के परेशान करने के जवाब में उसका कहना था कि वह गुरुग्राम से अनुमति लेकर निकले हैं।
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वही कोटवन बॉर्डर पर गोद में बच्चे को लेकर जा रही सागर (मध्य प्रदेश) जा रही सुनैना का कहना था कि बच्चों के चेहरे भूख-प्यास से सूख रहे हैं। बताया कि खाने को लेकर बिस्किट और ब्रेड ही मिला। भगवान भरोसे ही घर पहुंचना है।