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कीठम के भालू पार्क से विदा हुआ तेंदुआ
अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 28 Apr 2016 01:38 AM IST
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प्रीतम सिंह जठानी गांव के जंगलों में गुच्छी ढूंढने गया था कि तेंदुए ने हमला बोल दिया।
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न्यू आगरा में पकड़े जाने केबाद कीठम स्थित भालू संरक्षण केंद्र (भालू पार्क) में रखे गए तेंदुए को बुधवार दोपहर विदा कर दिया गया। वन विभाग की टीम उसे वाइल्ड लाइफ एनिमल रेस्क्यू वैन से लेकर सहारनपुर के लिए चली गई। देर रात आगरा के वन विभाग के अफसरों ने दावा किया कि उसे शिवालिक के जंगल की मोहंड रेंज में छोड़ दिया गया है। लेकिन सहारनपुर के वन अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया है। उनका कहना है कि उनकी जानकारी में न तो कोई तेंदुआ यहां लाया गया है और न ही ऐसी कोई लिखित या मौखिक जानकारी उन्हें दी गई है।
चार साल उम्र और 80 किलो वजन वाला यह तेंदुआ सोमवार को न्यू आगरा के सुरेश नगर से पकड़ा गया था। इसे तब से कीठम के भालू पार्क में विशेष पिंजरे में रखा गया था। यहां इसकी दहाड़ से भालू परेशान हो रहे थे। इसने खाना देने गए कुलदीप नाम के कर्मचारी पर पिंजरे से ही पंजे से हमला कर दिया था। उसके हाथ में छह टांके आए थे।
माना जा रहा है कि इसी परेशानी को देखते हुए वन विभाग के अधिकारी आनन फानन में उसकी विदाई में लग गए। उसे बुधवार सुबह यहां से सहारनपुर के लिए विदा कर दिय गया। देर रात अधिकारियों ने बताया कि उसे रात आठ बजे मोहंड रेंज में छोड़ दिया गया है। उधर, सहारनपुर के वन विभाग अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि तेंदुआ छोड़े जाने से पहले लिखित अनुमति जरूरी होती है। उन्हें पहले से इसकी जानकारी दी जाती। ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है।
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तेंदुए को मुश्किल में न डाल दे अफसरों की चूक
अगर सहारनपुर के वन विभाग के अफसर सही कह रहे हैं तो तेंदुए को बगैर किसी तैयारी के ही मोहंड रेंज में छोड़ा गया है। यहां पहले से ही कई तेंदुए मौजूद हैं। शिवालिक की तीन रेंज शाकंभरी, बादशाही बाग और मोहंड में कुल मिलाकर 50 तेंदुए है। अगले महीने होने वाले वन्य जीव गणना में संख्या और ज्यादा मिल सकती है। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुए को इस तरह जंगल में नहीं छोड़ा जाता है। इसके लिए पहले से तैयारी करनी होती है। सबसे जरूरी यह मालूम किया जाना है कि उस जंगल में पहले से कोई इस तेंदुए से ज्यादा ताकतवर नर तेंदुआ तो नहीं है। दरअसल, तेंदुओं में नए मेहमान को आसानी से स्वीकार करने की प्रवृित नहीं होती है। इनमें वर्चस्व की लड़ाई होती है। अगर छोड़े गए तेंदुए से ताकतवर तेंदुए वहां पहले से मौजूद हैं, तो वे उसकी मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनके बीच लड़ाई हो सकती है। तराई नेचर कंजर्वेशन सोसायटी के संयोजक डा. वीपी सिंह ने फोन पर बताया कि कहीं से पकड़े गए तेंदुए को जंगल में शिफ्ट करने से पहले देखना होता है कि वह नए जंगल में एडस्ट हो पाएगा या नहीं।
कौन सही-कौन गलत
आगरा के वाइल्ड लाइफ डीएफओ अनिल पटेल का कहना है कि कीठम से तेंदुआ दोपहर ले जाया गया था। इसे सहारनपुर के जंगल में रात आठ बजे छोड़ दिया गया।
सहारनपुर के डीएफओ राजाराम गौतम का कहना है कि आगरा से कोई तेंदुआ यहां के जंगल में छोड़े जाने की जानकारी नहीं है। आगरा के अधिकारियों ने ऐसी कोई सूचना भी नहीं दी है।
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चार साल उम्र और 80 किलो वजन वाला यह तेंदुआ सोमवार को न्यू आगरा के सुरेश नगर से पकड़ा गया था। इसे तब से कीठम के भालू पार्क में विशेष पिंजरे में रखा गया था। यहां इसकी दहाड़ से भालू परेशान हो रहे थे। इसने खाना देने गए कुलदीप नाम के कर्मचारी पर पिंजरे से ही पंजे से हमला कर दिया था। उसके हाथ में छह टांके आए थे।
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माना जा रहा है कि इसी परेशानी को देखते हुए वन विभाग के अधिकारी आनन फानन में उसकी विदाई में लग गए। उसे बुधवार सुबह यहां से सहारनपुर के लिए विदा कर दिय गया। देर रात अधिकारियों ने बताया कि उसे रात आठ बजे मोहंड रेंज में छोड़ दिया गया है। उधर, सहारनपुर के वन विभाग अधिकारियों ने इस दावे को गलत बताया। उन्होंने कहा कि तेंदुआ छोड़े जाने से पहले लिखित अनुमति जरूरी होती है। उन्हें पहले से इसकी जानकारी दी जाती। ऐसा कुछ भी नहीं किया गया है।
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तेंदुए को मुश्किल में न डाल दे अफसरों की चूक
अगर सहारनपुर के वन विभाग के अफसर सही कह रहे हैं तो तेंदुए को बगैर किसी तैयारी के ही मोहंड रेंज में छोड़ा गया है। यहां पहले से ही कई तेंदुए मौजूद हैं। शिवालिक की तीन रेंज शाकंभरी, बादशाही बाग और मोहंड में कुल मिलाकर 50 तेंदुए है। अगले महीने होने वाले वन्य जीव गणना में संख्या और ज्यादा मिल सकती है। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुए को इस तरह जंगल में नहीं छोड़ा जाता है। इसके लिए पहले से तैयारी करनी होती है। सबसे जरूरी यह मालूम किया जाना है कि उस जंगल में पहले से कोई इस तेंदुए से ज्यादा ताकतवर नर तेंदुआ तो नहीं है। दरअसल, तेंदुओं में नए मेहमान को आसानी से स्वीकार करने की प्रवृित नहीं होती है। इनमें वर्चस्व की लड़ाई होती है। अगर छोड़े गए तेंदुए से ताकतवर तेंदुए वहां पहले से मौजूद हैं, तो वे उसकी मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनके बीच लड़ाई हो सकती है। तराई नेचर कंजर्वेशन सोसायटी के संयोजक डा. वीपी सिंह ने फोन पर बताया कि कहीं से पकड़े गए तेंदुए को जंगल में शिफ्ट करने से पहले देखना होता है कि वह नए जंगल में एडस्ट हो पाएगा या नहीं।
कौन सही-कौन गलत
आगरा के वाइल्ड लाइफ डीएफओ अनिल पटेल का कहना है कि कीठम से तेंदुआ दोपहर ले जाया गया था। इसे सहारनपुर के जंगल में रात आठ बजे छोड़ दिया गया।
सहारनपुर के डीएफओ राजाराम गौतम का कहना है कि आगरा से कोई तेंदुआ यहां के जंगल में छोड़े जाने की जानकारी नहीं है। आगरा के अधिकारियों ने ऐसी कोई सूचना भी नहीं दी है।