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IND-PAK 1971: लाहौर तक घर में घुसकर मारा... 93 हजार सैनिकों ने किया था आत्मसमर्पण, फिर भी बाज न आया पाकिस्तान
Sat, 10 May 2025 12:55 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 10 May 2025 12:55 PM IST
सार
कबाइली हमले, 1965, 1971 और कारगिल युद्ध में पाकिस्तान करारी हार झेल चुका है। अमर उजाला आर्काइव के पन्नों में पाकिस्तानी सेना के हमलों का ब्योरा देखें, तो पूरी कहानी समझ आ जाएगी।
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अमर उजाला आर्काइव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आतंकवादियों के गढ़ बने पाकिस्तान पर भारतीय सेना की एयर स्ट्राइक के बाद तीन दिन से सीमा पर तनाव है। पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों के जरिए हमला किया। ऐसा ही हमला चार बार कर चुका है, लेकिन हर बार मुंह की खानी पड़ी है। इसके बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।
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आर्काइव के पन्नों में दर्ज है पूरी कहानी
अमर उजाला आर्काइव के पन्नों में पाकिस्तानी सेना के हमलों का ब्योरा तो है ही, 93 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण और लाहौर तक 3600 वर्ग किमी जमीन भारतीय सेना के कब्जे में आ जाने की खबरें भी प्रकाशित की जा चुकी हैं।
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अमर उजाला आर्काइव के पन्नों में पाकिस्तानी सेना के हमलों का ब्योरा तो है ही, 93 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण और लाहौर तक 3600 वर्ग किमी जमीन भारतीय सेना के कब्जे में आ जाने की खबरें भी प्रकाशित की जा चुकी हैं।
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पाकिस्तान को हर बार मुंह की खानी पड़ी
आजादी के बाद कश्मीर में कबाइलियों के भेष में हमला हो या वर्ष 1965 में अप्रैल से सितंबर तक चला युद्ध या फिर वर्ष 1971 में ऑपरेशन चंगेज खां, हर बार पाकिस्तान ने मुंह की खाई। अमर उजाला ने आजादी के बाद से पाकिस्तान की हर हिमाकत पर खबरें जनता के सामने पेश कीं।
ये भी पढ़ें - India-Pakistan Tension: पाकिस्तान के 'नापाक' हमले, 30 दिन की छुट्टी पर आया जवान; 5 दिन में ड्यूटी पर लौटा
आजादी के बाद कश्मीर में कबाइलियों के भेष में हमला हो या वर्ष 1965 में अप्रैल से सितंबर तक चला युद्ध या फिर वर्ष 1971 में ऑपरेशन चंगेज खां, हर बार पाकिस्तान ने मुंह की खाई। अमर उजाला ने आजादी के बाद से पाकिस्तान की हर हिमाकत पर खबरें जनता के सामने पेश कीं।
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लाहौर तक पहुंची भारतीय सेना का शौर्य प्रमुख
इनमें वर्ष 1965 में अप्रैल से सितंबर के बीच चले युद्ध की हर दिन की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की गईं। इनमें सीमा पार कर लाहौर तक पहुंची भारतीय सेना का शौर्य प्रमुख है, वहीं वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्थापना के साथ पाकिस्तानी सेना के 93 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण को लोगों ने देखा।
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इनमें वर्ष 1965 में अप्रैल से सितंबर के बीच चले युद्ध की हर दिन की खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की गईं। इनमें सीमा पार कर लाहौर तक पहुंची भारतीय सेना का शौर्य प्रमुख है, वहीं वर्ष 1971 में बांग्लादेश की स्थापना के साथ पाकिस्तानी सेना के 93 हजार सैनिकों के आत्मसमर्पण को लोगों ने देखा।
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