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UP: डॉ. कुमार विश्वास ने की बेबाक लेखन की वकालत, भारतीय कवयित्रियां के बारे में कही ऐसी बात; सुनकर चौंक जाएंगे
Sat, 08 Aug 2026 09:48 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 08 Aug 2026 09:48 AM IST
सार
आगरा में केवी शाला 2.0 के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के समापन पर कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि कविता में अपने समय और समाज की सच्चाई को उतारने के लिए रचनाकार में साहस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय कवयित्रियां कई बार सच लिखने से बचती हैं, जबकि विपरीत परिस्थितियों में भी अन्य देशों की महिला रचनाकार बेबाकी से अपनी बात रखती हैं।
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डॉ. कुमार विश्वास
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा के ताज होटल एवं कन्वेंशन सेंटर में 2 से 7 अगस्त तक चले केवी शाला 2.0 के दूसरे राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में 10 युवा कवियों ने अपनी प्रभावी प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि भारतीय कवयित्रियां कई बार सच लिखने से बचती हैं, जबकि विपरीत परिस्थितियों में भी अन्य देशों की महिला रचनाकार, विशेषकर उर्दू में रिहाना रुही, बेबाकी से अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने कविता में समय और समाज की सच्चाई को उतारने का आह्वान किया।
डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि कविता केवल शब्दों को सजाने का माध्यम नहीं है। रचनाकार को अपने समय, समाज और आसपास की सच्चाइयों को भी अपनी रचनाओं में जगह देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कवि के लिए संवेदना के साथ अपनी बात कहने का साहस भी जरूरी है। शिविर में देशभर से चयनित 21 युवा रचनाकारों को कविता लेखन, काव्यपाठ, उच्चारण, मंच संचालन और संवाद का प्रशिक्षण दिया गया। समापन समारोह में इनमें से 10 युवा कवियों ने अपनी प्रभावी प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मुख्य अतिथि, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि हिंदी साहित्य की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजन बेहद जरूरी हैं। कवि रमेश मुस्कान ने बताया कि शिविर का उद्देश्य नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करना है। इस अवसर पर महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान, जिलाधिकारी मनीष बंसल, रंजना बंसल, और पूरन डाबर सहित साहित्य व सामाजिक जगत की कई हस्तियां मौजूद रहीं। अतिथियों ने युवा रचनाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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डॉ. कुमार विश्वास ने कहा कि कविता केवल शब्दों को सजाने का माध्यम नहीं है। रचनाकार को अपने समय, समाज और आसपास की सच्चाइयों को भी अपनी रचनाओं में जगह देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कवि के लिए संवेदना के साथ अपनी बात कहने का साहस भी जरूरी है। शिविर में देशभर से चयनित 21 युवा रचनाकारों को कविता लेखन, काव्यपाठ, उच्चारण, मंच संचालन और संवाद का प्रशिक्षण दिया गया। समापन समारोह में इनमें से 10 युवा कवियों ने अपनी प्रभावी प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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मुख्य अतिथि, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि हिंदी साहित्य की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजन बेहद जरूरी हैं। कवि रमेश मुस्कान ने बताया कि शिविर का उद्देश्य नई प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करना है। इस अवसर पर महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान, जिलाधिकारी मनीष बंसल, रंजना बंसल, और पूरन डाबर सहित साहित्य व सामाजिक जगत की कई हस्तियां मौजूद रहीं। अतिथियों ने युवा रचनाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
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