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घुटना प्रत्यारोपण के बाद भी नहीं लचकेगी चाल
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Sat, 24 Oct 2015 02:20 AM IST
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आपरेशन के बाद भी आपकी चाल में कोई लचक नहीं आएगी। चलना-फिरना भी सामान्य होगा। सॉफ्ट टिस्यू बैलेंसिंग (एसटीबी) तकनीकी से घुटना प्रत्यारोपण बेहद आसान हो गया है।
खास बात इसका संतुलन वास्तविक घुटने की तरह होगा। होटल जेपी पैलेस में शुरू हुई तीन दिवसीय ज्वाइंट एनुअल कांग्रेस के पहले दिन विशेषज्ञों ने इसके आपरेशन का लाइव प्रसारण किया।
आर्थोप्लास्टी सोसाइटी इन एशिया और इंडियन आर्थोप्लासटी एसोसिएशन (आईएओ) की वर्कशाप में पहले दिन घुटने और कूल्हे के आपरेशन पर चर्चा हुई। एसटीबी विधि में बैलेंसिंग चिप घुटने (कृत्रिम) का सटीक संतुलन बनाती है।
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इसी के आधार पर हड्डी की छटाई की जाती है। आईएओ अध्यक्ष डा. एसकेएस मार्या ने बताया कि इस तकनीकी में कोबाल्ट क्रोमियम से तैयार घुटना लगाया जाता है, जो बेहद हल्का होता है।
एसटीबी तकनीकी से प्रत्यारोपित होने पर दोनों पैरों की लंबाई समान रहती है। चलने-फिरने में लचक नहीं रहती। वर्कशाप में डा. अनूप खेर, डा. एके गुप्ता, डा. राजीव गुप्ता, डा. मुकेश गोयल, डा. अर्पित गोयल आदि उपस्थित रहे।
ऊकड़ू मारकर भी बैठ सकेंगे लोग
अब ऐसी तकनीकी ईजाद की जा रही है, जिससे मरीज ऊकड़ू और पालथी मारकर बैठ सकेगा। सामान्य की तरह वजन भी उठाने की क्षमता होगी। आर्थोप्लास्टी सोसाइटी इन एशिया के अध्यक्ष प्रो. किम यंग हूं ने बताया कि भारत समेत एशिया भर के दिग्गज इसकी खोज में लगे हुए हैं। सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।
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खास बात इसका संतुलन वास्तविक घुटने की तरह होगा। होटल जेपी पैलेस में शुरू हुई तीन दिवसीय ज्वाइंट एनुअल कांग्रेस के पहले दिन विशेषज्ञों ने इसके आपरेशन का लाइव प्रसारण किया।
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आर्थोप्लास्टी सोसाइटी इन एशिया और इंडियन आर्थोप्लासटी एसोसिएशन (आईएओ) की वर्कशाप में पहले दिन घुटने और कूल्हे के आपरेशन पर चर्चा हुई। एसटीबी विधि में बैलेंसिंग चिप घुटने (कृत्रिम) का सटीक संतुलन बनाती है।
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इसी के आधार पर हड्डी की छटाई की जाती है। आईएओ अध्यक्ष डा. एसकेएस मार्या ने बताया कि इस तकनीकी में कोबाल्ट क्रोमियम से तैयार घुटना लगाया जाता है, जो बेहद हल्का होता है।
एसटीबी तकनीकी से प्रत्यारोपित होने पर दोनों पैरों की लंबाई समान रहती है। चलने-फिरने में लचक नहीं रहती। वर्कशाप में डा. अनूप खेर, डा. एके गुप्ता, डा. राजीव गुप्ता, डा. मुकेश गोयल, डा. अर्पित गोयल आदि उपस्थित रहे।
ऊकड़ू मारकर भी बैठ सकेंगे लोग
अब ऐसी तकनीकी ईजाद की जा रही है, जिससे मरीज ऊकड़ू और पालथी मारकर बैठ सकेगा। सामान्य की तरह वजन भी उठाने की क्षमता होगी। आर्थोप्लास्टी सोसाइटी इन एशिया के अध्यक्ष प्रो. किम यंग हूं ने बताया कि भारत समेत एशिया भर के दिग्गज इसकी खोज में लगे हुए हैं। सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।