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कीठम के सेंसिटिव जोन को बचाने की मुहिम
ब्यूूराे, अमर उजाला आगरा
Updated Thu, 02 Jul 2015 02:21 AM IST
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सूर सरोवर (पक्षी विहार) इको सेंसिटिव जोन को 10 किमी से घटाकर ढाई सौ मीटर करने के विरोध में बुधवार को यूथ हास्टल में कई स्वयंसेवी संगठनों ने ‘आरटीसी गोलमेज कांफ्रेंस’ का आयोजन किया।
कीठम क्षेत्र की हरित पट्टिका पर कुछ बिल्डरों की नजर है। तभी तो ईको सेंसिटिव जोन की परिधि को कम कराने के लिए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस जोन की सीमा 10 किमी निर्धारित कर रखी है, तो यूपी सरकार ने एक किमी। मगर, स्थानीय प्रशासन निर्धारित दोनों सीमाओं को समाप्त कर 250 मीटर में ही समेट देना चाहता है। बुधवार को प्रशासन के इसी निर्णय पर शहर की संस्थाओं ने विरोध किया। पांच बिंदुओं पर इंडिया राइजिंग के डॉ आनंद राय ने प्रस्ताव पढ़कर सुनाया। मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी ने कहा कि प्रशासन कोर्ट व यूपी सरकार के निर्णय व मानकों के विपरीत काम कर रहा है। यह बदलाव किसी भी कीमत पर नहीं हो सकता। मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के लिए बृज डेवलेपमेंट काउंसिल के चेयरमैन डॉ केएस राणा के नेतृत्व में 11 सदस्यीय टीम का गठन होना चाहिए। संचालन काउंसिल के सचिव अशोक चौबे ने किया। इस मौके पर प्रदीप खंडेलवाल, डॉ अंगद धारिया, नरेश पारस, डॉ गिरजाशंकर, वेकअप आगरा के शिशिर भगत, सीमा जसोरिया जैन, सतीश शर्मा, अजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
ये रखा प्रस्ताव
- वन क्षेत्र मथुरा तेल रिफाइनरी और ताजमहल के बीच एक हरित मध्यवर्ती पट्टिका का कार्य करता है। ताजमहल को वायु प्रदूषण से सुरक्षा व पृथककरण के लिए एमसी मेहता की पीआईएल पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1993 से समय-समय पर दिए गए सुझावों को लागू किया जाए।
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- आगरा शहर के संबंध में नीतिगत बदलाव करने से पहले डॉ एस वरदराजन कमेटी की रिपोर्ट व सुझावों पर विचार किया जाए।
- 70 के दशक की कुछ रिपोर्ट में राजस्थान मरुस्थल के आगरा की तरफ बढ़ने के प्रति सचेत कर सघन वानिकीकरण का आह्वान किया गया। आगरा में बाईंपुर क्षेत्र के सूर सरोवर वन ने इसमें एक अहम भूमिका निभाई और मरुस्थल की बढ़त को रोक दिया।
- ईको सेंसिटिव ताज ट्रेपेजियम जोन की हरितकीकरण पॉलिसी में बदलाव का कोई भी प्रयास न किया जाए।
-राज्य सरकार इन वन क्षेत्र में एक चमड़ा पार्क बनाने पर विचार कर रही है। जबकि अछनेरा में एक चमड़ा पार्क पहले से ही मौजूद है। प्रशासन को चाहिए कि व्यापारियों को वन क्षेत्र में भेजने से पहले उन्हें अछनेरा स्थित चमड़ा पार्क में स्थानांतरित किया जाए।
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कीठम क्षेत्र की हरित पट्टिका पर कुछ बिल्डरों की नजर है। तभी तो ईको सेंसिटिव जोन की परिधि को कम कराने के लिए हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस जोन की सीमा 10 किमी निर्धारित कर रखी है, तो यूपी सरकार ने एक किमी। मगर, स्थानीय प्रशासन निर्धारित दोनों सीमाओं को समाप्त कर 250 मीटर में ही समेट देना चाहता है। बुधवार को प्रशासन के इसी निर्णय पर शहर की संस्थाओं ने विरोध किया। पांच बिंदुओं पर इंडिया राइजिंग के डॉ आनंद राय ने प्रस्ताव पढ़कर सुनाया। मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी ने कहा कि प्रशासन कोर्ट व यूपी सरकार के निर्णय व मानकों के विपरीत काम कर रहा है। यह बदलाव किसी भी कीमत पर नहीं हो सकता। मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के लिए बृज डेवलेपमेंट काउंसिल के चेयरमैन डॉ केएस राणा के नेतृत्व में 11 सदस्यीय टीम का गठन होना चाहिए। संचालन काउंसिल के सचिव अशोक चौबे ने किया। इस मौके पर प्रदीप खंडेलवाल, डॉ अंगद धारिया, नरेश पारस, डॉ गिरजाशंकर, वेकअप आगरा के शिशिर भगत, सीमा जसोरिया जैन, सतीश शर्मा, अजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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ये रखा प्रस्ताव
- वन क्षेत्र मथुरा तेल रिफाइनरी और ताजमहल के बीच एक हरित मध्यवर्ती पट्टिका का कार्य करता है। ताजमहल को वायु प्रदूषण से सुरक्षा व पृथककरण के लिए एमसी मेहता की पीआईएल पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 1993 से समय-समय पर दिए गए सुझावों को लागू किया जाए।
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- आगरा शहर के संबंध में नीतिगत बदलाव करने से पहले डॉ एस वरदराजन कमेटी की रिपोर्ट व सुझावों पर विचार किया जाए।
- 70 के दशक की कुछ रिपोर्ट में राजस्थान मरुस्थल के आगरा की तरफ बढ़ने के प्रति सचेत कर सघन वानिकीकरण का आह्वान किया गया। आगरा में बाईंपुर क्षेत्र के सूर सरोवर वन ने इसमें एक अहम भूमिका निभाई और मरुस्थल की बढ़त को रोक दिया।
- ईको सेंसिटिव ताज ट्रेपेजियम जोन की हरितकीकरण पॉलिसी में बदलाव का कोई भी प्रयास न किया जाए।
-राज्य सरकार इन वन क्षेत्र में एक चमड़ा पार्क बनाने पर विचार कर रही है। जबकि अछनेरा में एक चमड़ा पार्क पहले से ही मौजूद है। प्रशासन को चाहिए कि व्यापारियों को वन क्षेत्र में भेजने से पहले उन्हें अछनेरा स्थित चमड़ा पार्क में स्थानांतरित किया जाए।